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सोशल मीडिया के दौर में लोकतंत्र

Wed, 18 Apr 2018 09:01 PM IST
सुधांशु रंजन
सुधांशु रंजन Updated Wed, 18 Apr 2018 09:01 PM IST
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Democracy in the social media era
सुधांशु रंजन

लोगों की निजता में घुसपैठ करने के आरोप से घिरे फेसबुक के संस्थापक सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने चुनावों की शुचिता बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। फेसबुक पर आरोप है कि लंदन-स्थित कैंब्रिज एनालिटिका ने उसके उपयोगकर्ताओं (यूजर) के बारे में विस्तृत जानकारी (डाटा) प्राप्त कर चुनावों को प्रभावित किया। पहले जुकरबर्ग ने स्वीकार किया था कि ब्रिटेन में 8.7 करोड़ यूजर के व्यक्तिगत डाटा एनालिटिका ने प्राप्त कर लिए। ऐसी भी आशंका जाहिर की जा रही है कि कहीं सोशल मीडिया झूठी खबरें फैलाकर लोकतंत्र का खात्मा तो नहीं कर देगा। ‘ग्लोबल साइंस रिसर्च’ नामक एक कंपनी ने फेसबुक की इजाजत से एक पर्सनैलिटी ऐप का इस्तेमाल किया, उसने दावा किया कि उसका मकसद अकादमिक था। और इस तरह उसने करोड़ों फेसबुक यूजरों की निजी जानकारियां हासिल कर लीं। अकादमिक शोध का उसका दावा झूठा था, क्योंकि उसने इसे एनालिटिका को बेच दिया, जो डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव के लिए कार्य कर रहा था। इसके पूर्व कार्यकारी प्रमुख एलेक्सांद्र निक्स ने, जो फिलहाल निलंबित हैं, कहा कि उसकी कंपनी गुप्त रूप से कई तरीकों से काम करती है।


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एक व्हिस्लब्लोअर ने अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने तथा इस बारे में भविष्यवाणी करने के लिए एनालिटिका एवं वहां के राजनेताओं के रिश्तों का खुलासा किया है। 123 मुल्कों में चुनावी लोकतंत्र है और इनमें से कुछ में वास्तविक, जीवंत लोकतंत्र है। अब आशंका यह है कि सूचना प्रौद्योगिकी, जिसे प्रारंभ में लोकतंत्र की प्राणवायु के रूप में देखा गया, लोकतंत्र को ही समाप्त कर सकती है। चुनावी लोकतंत्र वाले देशों में शासक इन तिकड़मों का प्रयोग कर चुनाव जीत सकते हैं और अधिनायक के रूप में अपना शासन बरकरार रख सकते हैं। 2013 में अजरबैजान के चुनाव में राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव ने अपनी लोकतांत्रिक छवि को चमकाने के लिए एक आइफोन शुरू किया, ताकि जनता मतगणना के साथ-साथ परिणाम जान सके। इसे पारदर्शिता के प्रति सत्ता की प्रतिबद्धता के रूप में प्रचारित किया गया। बाद में पता चला कि उस ऐप पर परिणाम एक दिन पूर्व ही पोस्ट कर दिए गए थे। आन्द्र सिपलवेदा एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी है, जो अभी बोगोटा (कोलंबिया) की जेल में है। उस पर पूरे लैटिन अमेरिका में एक दशक तक चुनावों में धांधली (रिगिंग) का आरोप है। मैक्सिको के राष्ट्रपति चुनाव में उसने एनरिक पीना नीटो के लिए काम किया, जो निर्वाचित हुए। उसने यह सब सोशल मीडिया के दुरुपयोग तथा विपक्षियों के कार्यालयों में जासूसी संयंत्र लगाकर किया।

तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने पर हायतौबा सही है, किंतु यह कोई नई बात नहीं है। एडवार्ड हरमन एवं नोम चॉम्स्की ने अपनी पुस्तक मैनुफैक्चरिंग कन्सेंटः द पॉलिटिकल इकॉनोमी ऑफ द मास मीडिया में दिखाया है कि किस तरह मीडिया सत्य एवं न्याय का पक्ष लेने की जगह आभिजात वर्ग के आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाता है। लोकतंत्र की रक्षा सतत निगरानी से ही हो सकती है, जिसका प्रहरी आम आदमी है। यह तभी संभव है, जब लोग जागरूक हों और उन्हें सही सूचना मिले। गलत सूचना सूचना न मिलने से ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि गलत सूचना पाने वाला गलत काम कर सकता है, जो लोकतंत्र के लिए घातक है। 

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