फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   definition of a true son

धर्मशास्त्रों में सच्चे पुत्र की परिभाषा

Mon, 01 Apr 2013 09:26 PM IST
Updated Mon, 01 Apr 2013 09:26 PM IST
विज्ञापन
definition of a true son

भारतीय धर्मग्रंथों में कई ऐसे प्रसंग हैं, जिसमें परिवार की अहमियत बताई गई है। उनमें कहा गया है कि मां-बाप की सेवा ईश्वर वंदना के समकक्ष ही है और जो पुत्र अपने माता-पिता की इच्छा को सर्वोपरि मानकर उसका निर्वहन करता है, वह स्वतः मोक्ष का अधिकारी हो जाता है।

विज्ञापन


इसी से संबंधित एक प्रसंग महर्षि देवेंद्रनाथ ठाकुर का है। उन दिनों वह आर्थिक रूप से टूटे हुए थे। इसके बावजूद वह किसी प्रकार की आकांक्षा लेकर आने वाले लोगों को खाली हाथ नहीं लौटाते थे। वह सेवा को सर्वोपरि धर्म मानते थे।
विज्ञापन


एक दिन बंगाल में अनाथालयों का संचालन करने वाली एक संस्था के पदाधिकारी महर्षि के पास पहुंचे। उन्होंने कहा, आपके स्वर्गीय पिता जी ने हमारी संस्था को एक लाख रुपये दान देने का आश्वासन दिया था। आपको उनके दिए वचन को पूरा करना चाहिए। महर्षि देवेंद्र ने जवाब दिया, यदि पिता जी ने आश्वासन दिया था, तो मैं उनकी पावन स्मृति में आपको दान की राशि अवश्य दूंगा, किंतु अभी कुछ समय लगेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


कुछ दिनों के अंदर ही महर्षि ने अपनी जमीन बेची और एक लाख रुपये उस संस्था को पहुंचा दिए। उन्होंने अपने पुत्र रवींद्रनाथ ठाकुर से कहा, हमारे धर्मशास्त्रों में सच्चा पुत्र उसे कहा गया है, जो पिता की आकांक्षाओं की पूर्ति करे। यदि मैं स्वर्गीय पिता के आश्वासन को पूरा नहीं करता, तो मुझे उनका श्राद्ध करने का भी अधिकार नहीं होता।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed