डॉन सो रहा है
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डॉन सो रहा है। यह खबर कन्फर्म है। मगर यह आधिकारिक नहीं है, क्योंकि उसकी नींद उसके होने का दस्तावेजी सुबूत नहीं है। डॉन अनिद्रा का रोगी नहीं- यह बात उसकी बीवी ने फोन पर बताई है। वह डॉन की ब्याहता पत्नी है। डॉन की पत्नी अक्सर अपने खाबिंद के मामले में बोदे झूठ नहीं बोला करतीं। वह डाउनमार्केट झूठ नहीं बोलतीं। उनके पास करने लायक इससे बड़े अनेक काम होते हैं। मसलन बुर्ज खलीफा में नए खरीदे गए फ्लैटों की चाभियों के गुच्छे को कमर में लटकाने का। आईएसआई चीफ जैसे लोगों की बीवियों को बर्थडे और मैरिज एनिवर्सरी पर दिली मुबारकबाद देने और बेशकीमती गिफ्ट भिजवाने का। डॉन के दुनिया भर में फैले ‘कनेक्शनों’ का मोबाइल नंबर याद रखने का, ताकि उन्हें जब धमकाने की जरूरत पड़े, तो वह उसे अपने पति को बता सके।
डॉन को जब विभिन्न मुल्कों की पुलिस खोजती है, तब वह चैन से नींद का लुत्फ उठाता है। जब गोपीचंद जासूस उसे तलाशते हुए खुद सो जाते हैं, तब वह जागता है। स्नान-ध्यान के बाद वह अपनी बीवी के हाथ के बने मिस्सी आटे के परांठे खाता है, और हींग-जीरे की छोंक वाला छाछ ठाठ से पीता है। वह खा-पीकर डकार भी लेता है। गुप्तचरों ने उसके डकार की ओडियो-रिकॉर्डिंग की है। डकार पुख्ता सुबूत है। इससे उसके होने की पुष्टि होती है।
यह बात एकदम पक्की है कि डॉन है। वह जिंदा है। उसके जीता-जागता होने का सुबूत है कि वह बाकायदा नाश्ता करता है। जानकार सूत्रों की मानें, तो वह टाट की बोरी पर आलथी-पालथी मारकर बैठता है। नाश्ता कर लेने के बाद वह वहीं प्लेट में हाथ धोता है और बीवी के पल्लू से हाथ पोंछता है। वह बड़ा घरेलू किस्म का आदमी है। दुनिया के लिए वह भले डॉन हो, लेकिन अपनी पत्नी के लिए तो निरा निरीह पति है।
डॉन वाकई डॉन है। उसे पकड़ पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है। दो मुल्कों के बीच वह उच्चस्तरीय वार्ता शुरू और खत्म करने का कारक और सबसे बड़ी उम्मीद है। उम्मीद और डॉन, दो मुल्कों के लिए एक जिंदा लफ्ज है।