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खतरा जेहाद है, लव जेहाद नहीं

Sun, 03 Dec 2017 07:21 PM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Sun, 03 Dec 2017 07:21 PM IST
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Danger is jehad,not  love jehad
तवलीन सिंह

जेहादी आतंकवाद भारत के लिए गंभीर समस्या है। खासकर जेहादी सोच का असर हम कई वर्षों से केरल में देखते आए हैं। पहली बार उसका असर तब दिखा, जब जेहादियों ने एक अध्यापक का हाथ इसलिए काट डाला, क्योंकि वह बच्चों को इस्लाम के रसूल के बारे में एक पाठ पढ़ा रहे थे और उस पाठ में मोहम्मद साहब का चित्र दर्शाया गया था। उस घटना के बाद मालूम हुआ कि प्रोफेसर जोसेफ के हमलावर पॉपुलर फ्रंट नाम के एक संगठन से जुड़े हैं, जो दक्षिण भारत में कट्टर इस्लाम के प्रसार का काम करता है। पत्रकारों ने जब इस संगठन के बारे में तहकीकात शुरू की, तो पता चला कि इस संस्था ने जेहाद के लिए देश में हथियारबंद सेना तैयार कर रखी है। यह बात भी सच है कि केरल वह राज्य है, जहां से सबसे ज्यादा मुस्लिम युवक आईएसआईएस में शामिल होने के लिए गए हैं।


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जेहादी इस्लाम के लिए भारत में कोई जगह नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इस विचारधारा को पाकिस्तान में हर तरह का समर्थन मिलता है। अपने इस दुश्मन देश के सैनिक शासकों का एक ही मकसद है, और वह है भारत के टुकड़े करना। पिछले सप्ताह पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने एक बार फिर माना कि वह हाफिज सईद को आतंकवादी नहीं, हीरो मानते हैं। सो इसमें कोई शक नहीं कि जेहादी संस्थाओं और जेहादी सोच का विरोध भारत को युद्ध स्तर पर करना होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस जेहाद का हिस्सा लव जेहाद भी है। क्या वास्तव में अखिला अशोकन यानी हादिया इस लव जेहाद का शिकार बनी थी, जब मुसलमान बनकर उसने 2016 में शफीन जहां के साथ विवाह किया था? क्या इस चौबीस वर्षीय महिला की शादी रद्द करके केरल हाई कोर्ट ने एक तरह से उस कट्टरपंथी विचारधारा का समर्थन नहीं किया है, जिससे भारत को गंभीर खतरा है?

पिछले सप्ताह सर्वोच न्यायालय ने हादिया के वकीलों को कहा कि महिला को वह इंसान मानते हैं, वस्तु नहीं। कई महीनों से हादिया अपने माता-पिता के घर में रह रही है, जिसको वह जेलखाना मानती है। कई बार वह कह चुकी है कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। लेकिन अभी तक उसको अपने पति के साथ रहने की इजाजत नहीं मिली है। अगर महिला वस्तु नहीं, मनुष्य है, तो हादिया को अपने पति के घर जाने की इजाजत अभी तक क्यों नहीं मिली है? क्या सर्वोच न्यायालय भी मानता है कि लव जेहाद वास्तव में समस्या है?

यदि मान भी लिया जाए कि कुछ इस्लामी संस्थाएं हिंदू लड़कियों की मुस्लिम लड़कों से शादी करवा रही हैं, तब भी सवाल है कि क्या 24 साल की समझदार महिलाओं को भी बहकाया जा सकता है। क्या इस देश में महिलाओं को अपने निजी फैसले लेने का पूरा हक नहीं है? मैं विनम्रता से अर्ज करना चाहती हूं कि देश की मुख्य लड़ाई जेहाद के खिलाफ होनी चाहिए, लव जेहाद के खिलाफ नहीं।

जो लोग लव जेहाद को लेकर हल्ला मचा रहे हैं, वे शायद समझते नहीं हैं कि आज के दौर में दुनिया भर में असली युद्ध जेहादियों के साथ लड़ा जा रहा है। दुनिया के जाने-माने राजनीतिक पंडित जेहादी सोच की तुलना नाजी सोच से करते हैं। उनको डर है कि जिस तरह नाजी सोच को खत्म करने के लिए विश्वयुद्ध हुआ था, उसी तरह भविष्य में जेहादी सोच को समाप्त करने के लिए विश्वयुद्ध होगा। अगर हम लव जेहाद जैसी बेकार बातें छोड़कर असली युद्ध में शामिल होने की बातें करते हैं, तो इस युद्ध में भारत की अहम भूमिका होगी।

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