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क्या हुआ जब धरती के पहले इंसान को यमराज अपने साथ ले गए

Thu, 05 Mar 2015 12:15 PM IST
विमल मित्र
विमल मित्र Updated Thu, 05 Mar 2015 12:15 PM IST
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Dancing with joy on earth up

पता नहीं, घटना कितनी पुरानी है, इसलिए कहते हैं कि हजारों साल पहले धरती की एक ही संतान थी, बिंदी! एक दिन वह स्नान के लिए नदी पर गई, तो वापस घर नहीं लौटी। उसे ढूंढा जाने लगा। धरती के गुप्तचर दुनिया के कोने-कोने में बिंदी की खोज करने लगे। बड़ी मुश्किल से पता लगा कि बिंदी को यमराज उठा ले गए हैं। वजह यह है कि इस लोक में उसके रहने की अवधि समाप्त हो चुकी थी।

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यह सुनते ही धरती फूट-फूट कर रोने लगी। धरती के साथ उसके आसपास बहने वाला पवन भी बिलखने लगा। धूप विलाप करने लगी। आकाश में बादल दर्द के मारे क्रंदन कर उठे। धरती पर पतझड़ छा गया।
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धरती के दूतों ने यमराज से कहा कि प्रलाप से धरती दुख से मर भी सकती है। फिर तो ईश्वर की बनाई सृष्टि भी नष्ट हो जाएगी। इसलिए बिंदी को वापस भेज दें। मगर यमराज जरा भी ढील देने के लिए तैयार नहीं थे। धरती की उदासी से जो तपिश फैली, उससे गर्म हवाएं बहने लगीं, जल सूखने लगा और मिट्टी में दरारें पड़ गईं।
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पशु-पक्षी और इंसान छटपटाकर मरने लगे। यमराज का सिंहासन डोल उठा। तब जाकर वह पसीजे। वह नियमों में थोड़ी ढील देने के लिए राजी तो हुए, लेकिन शर्त रखी कि बिंदी को साल में छह महीने मां के साथ बिताना होगा और शेष समय यमलोक में।


धरती ने शर्त मान ली। बिंदी की वापसी हुई, तो धरती ने खुशी में साज-शृंगार किया। पवन सुहाना हो उठा। धरती की हंसी के साथ सृष्टि में मानो जीवन लौट आई। बिंदी की वापसी को त्योहार की तरह मनाया गया। कहते हैं कि वंसत पंचमी से शुरू होकर होली के दिन तक धरती पूरे साज शृंगार से रही। और फागुन का चांद तो उस खुशी में नाच उठता है।

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