फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   cricket team ipl

मेरे पास क्रिकेट टीम है

Wed, 17 Apr 2013 09:46 PM IST
मुरली मनोहर श्रीवास्तव
मुरली मनोहर श्रीवास्तव Updated Wed, 17 Apr 2013 09:46 PM IST
विज्ञापन
cricket team ipl

इस क्रिकेटमय देश में क्रिकेट टीम का ऑनर होना आज सबसे बड़े गर्व की बात है। हम सभी परिचित हैं कि इस देश को क्रिकेट ने क्या-क्या दिया है।

विज्ञापन


बल्कि कहना यह चाहिए कि क्रिकेट ने इस देश को क्या नहीं दिया है। आज देशवासी महंगाई से परेशान होते हैं, तो आईपीएल के तड़के से गम भूल जाते हैं।

जब बच्चे के शादी-ब्याह और रिजल्ट की चिंता सताती है, तब मुफ्त का क्रिकेट मैच ही एकमात्र सहारा होता है झंझट से बाहर निकलने का। सच कहूं, तो क्रिकेट ने ही देश को एक सूत्र में बांधा है।
विज्ञापन


क्रिकेट न होता, तो न जाने कितने लोगों का टेंशन से हार्ट फेल हो जाता। इस लोकतांत्रिक युग में राजसी शान-बान और आन की पहचान है क्रिकेट टीम की ऑनरशिप।

आजकल आदमी के बड़े होने की पहचान क्रिकेट टीम खरीदने की औकात से होती है। रईसी बताने के लिए बस टीम का नाम काफी है। सुनने वाला खुद अंदाजा लगा लेता है कि इतनी लागत देकर खिलाड़ी को खरीदने वाले की क्या औकात होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पुराने जमाने में राजा-महाराजा हाथी-घोड़े पालते और हीरे-जवाहरात की नुमाइश करते थे। आजकल बड़े लोग क्रिकेटर रखते हैं और लीग कराते हैं। क्रिकेटर को पुरस्कार देते समय धनकुबेरों का सीना गर्व से फूल जाता है।

क्रिकेट लीग को पोषित करते समय उन्हें एहसास होता है कि उनके साम्राज्य में साहित्य, संगीत और कला फल-फूल रही है। कमेंटरी बॉक्स में की जा रही चर्चा आज साहित्य है और एक्सपर्ट कमेंटेटर नए युग के साहित्यकार।

क्रिकेट टीम के खरीदार शरणागत भक्त वत्सल बनकर उभरे हैं। जो लोग अपना प्रोडक्ट रातोंरात लाखों-करोड़ों लोगों के बाजार में पहुंचाना चाहते हैं, वे भी इस क्रिकेट की शरण में हैं।


जैसे ही कोई कहता है कि मेरे पास क्रिकेट टीम है, तो सुनने वाले को पता लग जाता है उसके पास चार्टर्ड प्लेन है, इंपोर्टेड गाड़ी है, रिसोर्ट्स और ढेरों ब्रांड्स की डीलरशिप है। मेरे पास क्रिकेट टीम है, कहते ही एहसास होता है कि मेरे पास दौलत है, शोहरत है इज्जत है, तुम्हारे पास क्या है?

आप कह सकते हैं कि क्या शोहरत, दौलत और इज्जत क्रिकेट टीम की ऑनरशिप के बगैर नहीं होती। हां, होती है, पर उसमें वह शान नहीं, जो क्रिकेट टीम ऑनरशिप वाली शोहरत में है।

एक बात और। मेरे पास मां है, कहकर मेरे पास क्रिकेट टीम है को इमोशनल चुनौती नहीं दी जा सकती।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed