पोकेमॉन के प्रति दीवानगी
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मैं उस पीढ़ी से ताल्लुक रखता हूं, जिसके लिए खेल का मतलब मुख्यतः घर के बाहर खेले जाने वाले खेल होते थे, हालांकि कुछ लोग टेबल टेनिस, शतरंज या कैरम भी खेलते थे। मैं भाग्यशाली था कि एक्स-बॉक्सेस और वि के आने से पहले निन्टेंडो से कंसोल आधारित वीडियो गेम्स खेलने को मिला। जब मैं कॉलेज में था, तब कंप्यूटर गेम बेहद लोकप्रिय हो चुका था और एक-दो वर्षों तक तो कंप्यूटर पर मेरा एकमात्र काम गेम खेलना था। इसलिए 1990 के दशक के मध्य में जब पोकेमॉन (पॉकेट मॉन्स्टर का संक्षिप्त रूप) पहली बार वीडियो गेम के रूप में लॉन्च हुआ, तो इसने तहलका मचा दिया। हालांकि यह एक कंप्यूटर मॉनिटर पर आधारित खेल था, जो समय के साथ अपनी स्वाभाविक मौत मर गया।
इसलिए 2014 में जब गूगल ने पोकेमॉन को अप्रैल फूल दिवस की शरारत के रूप में लॉन्च किया, तो पोकेमॉन गूगल मैप पर प्रकट हुआ, ताकि ब्राउजर उसे वास्तविक दुनिया के स्थलों पर खोज सकें। यह मेरे या अन्य कई लोगों के लिए अतीत से एक धमाके की तरह था। मुझे अब भी मित्रों के साथ हुई वह बातचीत याद है, जिसमें हम पुराने पोकेमॉन खेल को याद कर रहे थे। यह कभी स्पष्ट नहीं हुआ कि निन्टेंडो ने पुराने गेमों को आधुनिक बनाने के लिए एप्प्स और डिजिटल टेक्नोलॉजी का सहारा क्यों नहीं लिया।
दो हफ्ते पहले जब पोकेमॉन गो की खबरें जंगल की आग की तरह फैल गईं, तब मैंने भी इस एप्प को डाउनलोड करने की कोशिश की, लेकिन पता चला कि भारत में अभी यह उपलब्ध नहीं है। तब से मुझ पर भी इस गेम को लेकर सनक सवार है और सच कहूं, तो जो लोग इस एप्प का प्रयोग कर रहे हैं और मजा ले रहे हैं, उनसे मुझे ईर्ष्या हो रही है। सामान्य लोगों के लिए पोकेमॉन गो एक स्मार्टफोन गेम है, जो वास्तविक और डिजिटल दुनिया का मिश्रण है, जिसमें गेम खेलने वाले अपने पड़ोस में जीवों और खजानों की तलाश करते हैं।
स्वाभाविक तौर पर मैंने एक क्षतिग्रस्त एंडरॉयड संस्करण को डॉनलोड करने की कोशिश की, जिसके बारे में मुझे बताया गया कि इसमें समस्याएं हैं और बेहतर होगा कि मुझे इससे अलग रहना चाहिए। अगर हमारे यहां फोन पर बात करते हुए लोगों का सड़क पार करना आम दृश्य है, तो अमेरिका में स्मार्टफोन पर सिर टिकाए टहलते हुए लोग दिख जाएंगे, जो स्क्रीन पर पोकेमॉन को देखते ही रोमांच से भर जाते हैं, और उसके बारे में और कुछ ढूंढने की कोशिश में लगते हैं। फोन पर एक गेम और आसपास के दृश्यों का उससे जुड़ाव एक मनोरंजक मिश्रण है, जिसका अतीत में इस हद तक अनुभव कभी नहीं किया गया। जब यह एप्प खुलता है, तो इस पर खिलाड़ी के आसपास के इलाके का एक नक्शा दिखता है, जिसमें प्रतिमाएं, क्लॉक टावर आदि विभिन्न बिंदु चिह्नित होते हैं। भौतिक रूप से एक बिंदु की तरफ आगे बढ़ने, जिसे गेम में एक पोकस्टॉप कहा जाता है, फिर स्क्रीन पर आइकॉन पर टैप करने पर आपको वस्तुओं और अनुभव के अंक दिए जाते हैं।
पहली नजर में यह गेम लोगों को अपने परिवेश का पता लगाने का मौका देती है। इस गेम का फॉर्मेट बेहद आसान और सरल है-एक बार जब आपका सामना जंगल में पोकेमॉन से होता है, तो आपको उसे पकड़ने के लिए कैप्चर मोड में जाना है, जहां खिलाड़ी पोकबॉल्स को झटका देता है, जब तक कि उसे दबोचा न जाए। शुरुआती कुछ घंटों में यह काफी दिलचस्प होता है, जब खिलाड़ी वास्तविक जीवन के स्थलों के डिजिटल प्रतिनिधित्व, पोकेजीम्स का दावा करने में सक्षम होते हैं, जहां जीव वर्चस्व के लिए एक-दूसरे से संघर्ष कर सकते हैं।
बहरहाल पोकेमॉन गो के प्रति सनक कब तक जारी रहेगा, यह एक खुला सवाल है। स्मार्टफोन गेम्स की एक आदत होती है कि वे बड़ी तेजी से चमकते हैं और फिर चलन से बाहर हो जाते हैं। आखिर वह कौन-सी चीज है, जो पोकेमॉन गो को अन्य गेम से अलग बनाती है! मैकडोनाल्ड समेत कई मार्केटिंग अभियान के दौरान इस गेम के फीचर का अपने आउटलेट के हिस्से के रूप में उपयोग करते हैं, जिसका काफी फायदा हुआ है। भारत के लोग इस एप्प के आधिकारिक लॉन्च की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन यह इंतजार काफी लंबा भी हो सकता है। हालांकि स्मार्टफोन पर गेम खेलने के प्रति भारतीय युवाओं की लगन को देखते हुए मुझे लगता है कि यह एक ऐसा गेम है, जिसमें वे तमाम रोमांच--वास्तविकता और तेज गति- हैं, जिसे भारतीय तलाशते हैं। भारतीय युवाओं की बड़ी आबादी को देखते हुए इस गेम की भारत में असीम संभावनाएं हैं।
बहुत संभव है कि भारत के खुदरा बिक्रेता और गेम्स बाजार के नियंता इस अवसर का लाभ उठाकर भारतीय संदर्भ में इस गेम का मिश्रण करते हुए एक नया उत्पाद विकसित करें, जो संभवतः ज्यादातर युवाओं के फोन का हिस्सा होंगे। जहां तक इसको डाउनलोड करने की लागत का सवाल है, तो यह मुफ्त है, जो भविष्य में इसे युवा भारतीयों के लिए उपयुक्त बनाता है, जिन्हें आप अपने फोन पर शहरी और कस्बाई इलाकों में गेम खेलते हुए देख सकते हैं। एक महीने पहले मैं बस से रायपुर से भिलाई जा रहा था, तो मैंने देखा कि दो कॉलेज जाने वाले छात्र बेहद उत्साह से कैंडी क्रश गेम के स्थानीय संस्करण खेल रहे थे। उन्हें बस में सीट नहीं मिली थी, लेकिन सीट न मिलने की निराशा उनके चेहरे पर मुझे नहीं दिखी। यह असल में पोकेमॉन गेम ही है, जो खिलाड़ियों को आकर्षित कर रहा है, और मेरी पीढ़ी तो इसके प्रति इसलिए आतुर है, क्योंकि हम पोकेमॉन गेम के साथ ही बढ़े हैं। इसका अतिरिक्त प्रभाव निन्टेंडो के शेयरों की कीमत पर भी दिखता है, जिसे फायदा हुआ है। पोकेमॉन कंपनी ने खिलाड़ियों को यह कहते हुए बीस वर्ष बिताए हैं कि उन सबको पकड़ूंगा (कैच एम ऑल)। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपनी ही सलाह का पालन किस तरह करते हैं। जो बीस या तीस वर्ष के हैं, जिन्होंने पोकेमॉन का अनुभव किया है, उनके लिए मौका है कि वे अपनी जवानी को एक बार फिर से अनुभव करें। मैं इस गेम के भारत में रिलीज होने की प्रतीक्षा कर रहा हूं और देखना चाहता हूं कि राजपथ पर यह गेम खेलते हुए कैसा लगता है!
लेखक आउटलुक मनी के संपादक हैं