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जो डरपोक हैं, वे भय के चलते बार-बार मरते हैं
Sat, 28 Mar 2020 02:40 PM IST
देव कश्यप
स्वामी विवेकानंद, संत दार्शनिक
स्वामी विवेकानंद, संत दार्शनिक
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 28 Mar 2020 02:40 PM IST
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- फोटो : Amar Ujala
हम में से ज्यादातर लोग अब तक आतंकवाद को ही मानवता का सबसे बड़ा शत्रु मानते थे। लेकिन विगत कुछ महीनों में कोरोना के चलते कुछ ऐसा हुआ है, जिसने मनुष्य को मजबूर कर दिया है कि जीवन को लेकर समस्त अवधारणाओं पर वह न केवल दोबारा चिंतन करे, बल्कि उन्हें पुनर्परिभाषित भी करे।
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वर्ष 1899 में प्लेग महामारी के वक्त स्वामी विवेकानंद ने पीड़ितों की सेवा के लिए रामकृष्ण मिशन की समिति बनाई थी। समिति ने स्वामी जी के नेतृत्व में 'प्लेग घोषणापत्र' जारी किया था, जिसने तब लोगों को मनोवैज्ञानिक व भावनात्मक सहारा दिया था। निराश लोगों में इसने एक उम्मीद जगाई थी। घोषणापत्र में कही बातें आज भी वैश्विक महामारी से जूझती मानवता के लिए प्रासंगिक हैं। यह था वह प्रेरणास्पद - प्लेग घोषणापत्र
कलकत्तावासी बंधुओ,
- जब आप खुश होते हैं, तो हम खुश होते हैं, और हमें कष्ट होता है, जब आप दुखों का सामना कर रहे होते हैं। इसलिए घोर आपदा के इन क्षणों में, आपके कल्याण के लिए और बीमारी से व महामारी के भय से आपको बचाने के लिए हम निरंतर प्रार्थनाओं में लगे हैं।
- जिस गंभीर बीमारी के चलते उच्च-निम्न, अमीर-गरीब सभी घबराए घूम रहे हैं, वह अगर ज्यादा फैलती है, तो आपकी सेवा-देखभाल करते हुए अगर हम समाप्त हो जाएं, तो भी हम खुद को खुशनसीब मानेंगे, क्योंकि आप सभी ईश्वर की अभिव्यक्ति हैं।
- हमारी आपसे विनम्र प्रार्थना है कि बीमारी के चलते घबराहट का माहौल बनाने की जरूरत नहीं है। ईश्वर का ध्यान करते हुए शांतचित्त से समाधान ढूंढने की कोशिश करें। अगर ऐसा मुमकिन न हो, तो जो ऐसा कर रहे हैं, उनके प्रयासों को मजबूत करें।
- डरने की आखिर कौन-सी बात है? प्लेग की उपस्थित ने लोगों के दिलो-दिमाग में जो डर भर दिया है, वह बेबुनियाद है। ईश्वर की इच्छा से प्लेग ने जैसी त्रासदी अन्य जगहों पर मचाई है, वैसी हालत कलकत्ता में नहीं है। सरकारी तंत्र पूरी तरह से हमारी मदद कर रहा है। तो डर किस बात का है?
- चलिए हम इस व्यर्थ के डर को मिटा दें। ईश्वर पर पूरा भरोसा रखते हुए कुछ कर गुजरने के लिए अपनी कमर कस लें। हम सब शुद्ध और पवित्र जीवन जिएं। ईश्वर के आशीर्वाद से यह बीमारी, महामारी का भय, यह सब कुछ हवा हो जाएगा।
- अपने घर और उसके आस-पास के क्षेत्र को, कमरे, कपड़े, बिस्तर, नालियां इत्यादि को हमेशा साफ रखें। बासी भोजन बिल्कुल न करें। ताजा और पोषणयुक्त आहार लें। ध्यान रखिए एक कमजोर शरीर बीमारियों को आमंत्रित करता है। खुश रहें। हर किसी को एक बार ही मरना है। लेकिन जो डरपोक हैं, वे भय के चलते बार-बार मरते हैं। डर का सामना उन्हें करना पड़ता है, जो अनैतिक ढंग से या दूसरों को सताकर अपनी आजीविका चलाते हैं। इसलिए इस वक्त जब कि मौत हमारे चारों ओर तांडव कर रही है, ऐसे किसी भी व्यवहार से बचें। महामारी के इस समय में, क्रोध, लोभ एवं अन्य दुर्व्यसनों से बचें। अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। हमारे अस्पताल में संक्रमित रोगियों के उपचार में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। ऐसा करते समय धर्म, जाति और महिलाओं के सम्मान का पूरा ध्यान रखा जाएगा। जो समृद्ध हैं, उन्हें इधर-उधर भागने दीजिए। लेकिन हम गरीब हैं, और एक गरीब के दिल की व्यथा हम बखूबी समझते हैं। इस ब्रह्मांड की जननी अभावग्रस्तों का पूरा ख्याल रखती हैं। यही जननी हमें आश्वासन देती है कि डरना नहीं! डरना नहीं!
- भाई, अगर आपकी मदद करने वाला कोई न हो, तो तुरंत बेल्लूर मठ में श्री भगवान रामकृष्ण के सेवकों को इसकी सूचना भेजें। जो मदद बन पड़ेगी, वह की जाएगी। जगतजननी के आर्शीवाद से आर्थिक मदद भी की जाएगी महामारी के भय को दूर करने के लिए आपको हर शाम और हर जगह ईश्वर का नाम जपना चाहिए।