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थोड़े में निर्वाह करने का सबक
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
जैसे-जैसे हम तीन मई के विस्तारित लॉकडाउन के संभावित अंत तक पहुंच रहे हैं, इस बात की संभावना बनती जा रही है कि आंशिक रूप से लॉकडाउन जैसी स्थिति आगे भी जारी रहेगी। लॉकडाउन के आर्थिक प्रभाव पर व्यापक बहस हुई है और दैनिक वेतनभोगियों और प्रवासी श्रमिकों की स्थिति के बारे में भी खबरें आई हैं। हालांकि, शहरी प्रवासियों और मध्यवर्गीय वेतनभोगी लोगों की स्थिति के बारे में ज्यादा चर्चा नहीं हुई है।
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वेतन में कटौती और नौकरी छूटने की हकीकत पहले ही अनेक लोगों को नुकसान पहुंचा चुकी है, ऐसे में, लोगों की वित्तीय स्थिति पटरी पर लौटने में अभी समय लगेगा। जो लोग अपने कौशल के साथ करियर के प्रति आश्वस्त थे, रोजगार की अनिश्चित स्थिति उनके लिए सबसे अधिक चिंताजनक है। किसी भी समय नौकरी छूटना दुर्भाग्यपूर्ण है।
लेकिन जब कोई आर्थिक संकट के समय नौकरी खो देता है, और जब समग्र रोजगार का माहौल खराब हो, तब रोजगार कम होने के कारण या तो लंबे समय तक बेरोजगार रहना पड़ता है या फिर ऐसी नौकरी करनी पड़ती है, जो हमारे स्तर की नहीं है।
घर से काम करने के लाभ बताए गए हैं और अनेक लोगों ने इसका समर्थन भी किया है। पर बहुत-सी ऐसी नौकरियां हैं, जो घर से नहीं की जा सकतीं। मसलन, बैंक का कर्मचारी बैंक में ही काम
कर सकता है, एक कार्यालय सहायक केवल कार्यालय में ही काम कर सकता है। ऑफिस का कैंटीन तभी चलेगा, जब ऑफिस खुलेगा।
अपनी तरफ से सरकार ने कॉरपोरेट्स से कहा है कि वे वेतन में कटौती न करें और न ही लोगों को नौकरी से निकालें। हालांकि इन पर अमल करना असंभव है। इसके अलावा सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की बढ़ी किस्त फिलहाल रोकने का फैसला किया है। कई राज्य सरकारें शराब और ईंधन (आय के दो बड़ेस्रोत) की बिक्री से होने वाली आय के अभाव में केंद्र से सहायता पैकेज की मांग कर रही हैं।
ऐसे में, वेतन में कटौती रोजगार न होने की तुलना में तो बेहतर है। घर में कम पैसे आने से वे परिवार बुरी तरह प्रभावित होंगे, जिनके पास आय का एक ही स्रोत है। इन परिवारों को अपने खर्चों में कटौती की जरूरत पड़ सकती है और बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
कोरोना के कारण किराया घटने की संभावना न होने के चलते किरायेदारों के पास मकान मालिकों को किराया देने के बाद कम पैसे बचेंगे। ऐसे लोगों द्वारा अपने मकान मालिकों से बात कर रियायत मांगने में कोई नुकसान नहीं है। उन्हें घरेलू खर्चों में कटौती करने के तरीकों पर भी विचार करना होगा, लेकिन यह भोजन या स्वास्थ्य के मोर्चे पर समझौता करके नहीं होना चाहिए।
ऐसे परिवारों के लिए लंबी अवधि की बचत हमेशा कठिन होती है, क्योंकि वे हर महीने वेतन पर जीते हैं। वे जो थोड़ी बचत करते भी हैं, वह बच्चों की पढ़ाई या शादी के लिए होती है। परिसंपत्तियां या संपत्ति बहुत कम होने के कारण यह वर्ग बुरी तरह प्रभावित होगा। ऐसे लोगों के पास एकमात्र सहारा नौकरी होती है, जो उन्हें मामूली ढंग से जीने की इजाजत देती है। ऐसे लोगों को अपने गांवों या छोटे शहरों में रह रहे परिवारों से अगर मदद का भरोसा मिलता है, तो शहरों में रोजगार की कठिन स्थिति को देखते हुए उनके लौट जाने में ही दूरदर्शिता है।
अगर किसी ने शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया है और तत्काल पैसे की जरूरत नहीं है, तो उसे छेड़ना नहीं चाहिए। शेयर बाजार अभी अस्थिर है और वह एक साल या उससे अधिक समय में पटरी पर लौट सकता है। यदि किसी ने बैंक या सोने में निवेश किया है, तो आपातकाल में इससे पैसे निकालने का उसके पास आत्मविश्वास होगा। लेकिन जहां तक संभव हो, विवेकपूर्ण ढंग से खर्च करना चाहिए। लॉकडाउन के दौरान खर्च करने के अवसर चूंकि सीमित हैं, ऐसे में, लॉकडाउन खुलने के बाद भी कम या सीमित रूप से खर्च करने का सबक सीखा जा सकता है।
यदि आप शेयर बाजार में नियमित निवेश करते हैं, तो धन का प्रवाह बेहतर होने तक आप उसे स्थगित रखने पर विचार कर सकते हैं। जब तक कोरोना का असर कम नहीं होता, तब तक बैंकों या वित्तीय संस्थानों से लिए गए कर्ज के विलंब से भुगतान की छूट दी जा रही है। यह एक अच्छी मदद है, हालांकि इसका लाभ इस बात पर भी निर्भर है कि आप पर कितना कर्ज है।
यदि आप कर्ज चुकाने के लिए केवल अपनी आय पर निर्भर हैं, तो ईएमआई कम कर और उधार की अवधि बढ़ाकर अपने ऋण का पुनर्गठन करना ठीक हो सकता है। यदि आप ऋण पूरी तरह चुकाने के करीब हैं, तो मित्रों एवं संबंधियों से उधार लेकर ऐसा करने की कोशिश करें, क्योंकि इस स्तर पर ऋण के पुनर्गठन की तुलना में उसे चुकाना सस्ता पड़ेगा। ऐसी स्थिति भी आ सकती है, जब ऋण चुकाना असंभव हो जाए, जैसे उबर / ओला ड्राइवर उधार के पैसे पर कार चलाते हैं।
ऐसे मामलों में, ऋण पूरी तरह चुकाना ही बेहतर है, जिससे नुकसान कम होगा। देर से भुगतान और जुर्माने का गणित केवल पेचीदा होगा। मौजूदा ऋणों को चुकाने के लिए दूसरों से उधार लेने के बजाय जीवन में एक बुरे अनुभव का सबक लेना बेहतर है। कर्ज चुकाने के लिए उधार लेते हुए आप खुद के सबसे बड़े दुश्मन होते हैं, क्योंकि आप जानते हैं कि आपके पास कर्ज चुकाने के साधन नहीं हैं। इस अभूतपूर्व स्थिति से बाहर आने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन की बहुत जरूरत होगी।
ज्यादातर संपन्न लोग भी इन दिनों घर पर रहकर स्वस्थ रहने का महत्व समझ रहे हैं। अपने नियोक्ता को आपकी नौकरी बचाए रखने के तरीकों का पता लगाने के लिए कहें, भले ही इसका मतलब यह हो कि आप वेतन कटौती और अनिश्चितता का सामना करने के लिए तैयार हैं। जो लोग कहीं नौकरी कर रहे हैं, उनके मानसिक व भावनात्मक रूप से मजबूत रहने की संभावना है। पिछले करीब एक महीने में हमने जो सीखा है, वह यह है कि हम थोड़े में निर्वाह कर सकते हैं, और हमारे पास जो है, उसे संभाल सकते हैं। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)