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लाइन में खड़ा होना सीखना ही होगा
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कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
मैं लॉकडाउन का भरपूर आनंद उठा रहा हूं। पर्यावरण के लिहाज से यह बहुत अच्छा समय है। ताजा हवा मिल रही है, पानी भी शुद्ध हो गया है। सुबह उठो तो चिड़ियों की चहचहाहट से मन खुश हो जाता है। चारों तरफ हरियाली दिख रही है।
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रात में आसमान में तारे दिखते हैं। इन सब चीजों का सुख शायद ही हम दिल्ली में ले पाते! हम तो सिर्फ काम में मशगूल थे। सुबह उठकर ऑफिस के लिए निकल जाना, रात को आकर सो जाना। हमारे पास तो इतना भी वक्त नहीं था कि सिर उठाकर आसमान की तरफ भी देख लें। लेकिन इस लॉकडाउन ने हमें हर चीज के लिए वक्त ही वक्त दे दिया है। यह अमूल्य समय है, जिसे आप अपने परिवार के साथ बिताएं। खुद को समय दें।
अपने रिश्तेदारों से फोन पर बात करें, जिनसे आपने वर्षों से बात नहीं की है। इससे दिल की जो दूरियां बनी हुई थीं, वे खत्म हो जाएंगी। कुछ लोगों का कहना है कि कोई कितना घर में बैठेगा, बोरियत हो रही है। तो इसका भी उपाय है। आप अपनी स्किल पर काम करें, जिसे आप समय के अभाव में नहीं कर पा रहे थे। या फिर कोई नई स्किल अपनी प्रोफाइल में जोड़ें।
आजकल ऑनलाइन क्लासेस की भी सुविधाएं हैं। घर बैठे आप कोई नया हुनर सीख सकते हैं। इसका लाभ उठाएं। कोई भी रचनात्मक कार्य करने का यह सबसे बेहतरीन समय है। हां, अगर कुछ नहीं करेंगे और खाली बैठे रहेंगे, तो आपको अवसाद घेरेगा। कई लोग घर बैठे डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं, क्योंकि वे कुछ रचनात्मक नहीं कर रहे हैं।
अभी आपके पास घर में रहने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। इस बीमारी से बचने का यही एक उपाय भी है। ऐसे में अगर आप अवसादग्रस्त हो रहे हैं, तो आप अपनी रुचि का काम करें। इससे आपका मूड डायवर्ट होगा और आपकी क्रिएटिविटी भी बढ़ेगी। इसके अलावा आप नियमित मेडिटेशन करें। लॉकडाउन के कई सकारात्मक पहलू भी हैं। पहले जब हम सुबह अखबार पढ़ते थे, तो वह रेप, हत्या और लूटपाट की खबरों से पटा होता था, लेकिन आजकल इन सब नकारात्मक खबरों से राहत मिली है।
सड़कों पर तेज हॉर्न वाली गाड़ियों की आवाज से छुटकारा मिला है। चारों तरफ शांति ही शांति है। अब मन में नकारात्मक उथल-पुथल की जगह सकारात्मकता ने ले ली है। हालांकि इसका नकारात्मक पहलू यह है कि इसके बाद हम आर्थिक रूप से पीछे चले जाएंगे। हमें अपनी सुख-सुविधाओं में कटौती करनी होगी। या यों कहें कि अब हमें अपनी सुख-सुविधाओं की परिभाषा बदलनी होगी।
लॉकडाउन खुलने के बाद भी हमें सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना होगा, क्योंकि जब तक इसकी कोई वैक्सीन नहीं बन जाती, तब तक हमें इससे खतरा बना रहेगा। इस वायरस को किसी मेडिटेशन से भी दूर नहीं किया जा सकता। ऐसे में जरूरी है कि हम इस महामारी से निपटने के लिए बनाए गए नियमों का पालन करते रहें।
इसके बाद जब आप लॉकडाउन से निकलें, तो एक बेहतर इंसान बनकर निकलें। लाइन में खड़े होने की आदत बना लें। धक्का देकर निकलने की जो आदत है, उसको सुधार लें, अन्यथा इसका दुष्परिणाम आपको ही भुगतना पड़ेगा। अभी लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है। लोगों ने नवरात्र की पूजा घरों में की। रमजान भी घर पर मना रहे हैं।
इस बार ईद भी शायद घर पर ही मनानी पड़े! अगर ऐसा करना भी पड़े, तो आप ईद अपने परिवार के साथ मनाएं। यह उनके लिए और आने वाली पीढ़ी के लिए बेहतर साबित होगा। समय कभी एक-सा नहीं रहता। वह हमेशा बदलता रहता है। कुछ दिन की ही बात है। हौसला रखें, जीवन धीरे-धीरे फिर से पटरी पर लौट आएगा। तब तक सहयोग बनाए रखें। (लेखक प्रसिद्ध अभिनेता हैं।)