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फिर मुस्कराएगा इंडिया, फिर जीत जाएगा इंडिया!
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कोच्चि में कलमासीरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल से ठीक होने के बाद घर लौटते मरीज।
- फोटो : PTI
लोगों का प्यार हो, भरोसा हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मुसीबतों में भी जिंदगी बहुत रोमांचकारी लगने लगती है। लॉकडाउन ऐसी ही कुछ भूली-बिसरी कोशिशों को महसूस करने और उन्हें जीवन में उतारने का जरिया है। जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो समूचा देश एक तरह से सहम गया था। हर तरफ एक डरावनी खामोशी थी।
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उस समय हर हिंदुस्तानी को लगता था कि देश के लिए कुछ करना है। कुछ ऐसा, जिससे लोगों के डर पर, उनके जख्मों पर मरहम लग सके और हमारे काम की वजह से दूसरे लोगों पर भी कुछ सकारात्मक प्रभाव पड़ सके। मैंने सोचा कि देश के लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पर कुछ उत्साहवर्धक चीजें डाली जाएं। इससे पहले मैं सोशल मीडिया पर बहुत ऐक्टिव नहीं था, लेकिन लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में मैंने इंस्टाग्राम पर कई गाने डाले।
कोशिश थी कि लोगों का मन बहले और थोड़ी ही सही, उन्हें खुशी तो मिले। उन्हीं दिनों एक गाना कंपोज करने का आइडिया दिमाग में आया। ऐसा गाना, जो लोगों को खुद से जोड़ सके। अचानक एक दिन मेरे पास फिल्म निर्माता जैकी भगनानी का फोन आया। बस, यहीं से इंडिया के मुस्कराने का सफर शुरू हुआ।
लेकिन असल चुनौती थी कौशल किशोर के लिखे इस गीत की कंपोजिशन और उसका फिल्मांकन। स्टूडियो बंद थे और सहायता के लिए कोई नहीं था। ऑर्केस्ट्रा से लेकर माइक सेट करने और गाने तक के सभी काम खुद ही करने थे। काम मुश्किल था, लेकिन मन में हौसला था और उस हौसले के गवाह थे ड्यूटी पर डटे हुए हजारों पुलिसकर्मी, सफाईकर्मी और डॉक्टर।
फिल्म इंडस्ट्री ने इस गीत को हाथों हाथ लिया। कलाकारों ने इसमें सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के सभी नियमों का पालन करते हुए वीडियो शूट किए। जब भी इस गाने को सुनता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मन में इस अभूतपूर्व आशा का संचार होता है कि हां, इंडिया जरूर मुस्कराएगा। पीएम मोदी के ट्वीट के बाद तो यह गाना देश के कोने-कोने तक पहुंच गया।
मुझे अपने देश को मुस्कराते हुए देखना था। इस गाने ने लोगों को उम्मीद दी है, उनके चेहरों पर चमक बिखेरी है। लोगों ने भी इस गाने को खूब प्यार दिया है। हम जिस मुस्कराहट को इंडिया के चेहरे पर ढूंढ रहे थे, आखिरकार वह मिल ही गई। व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए इससे बड़ी कोई खुशी नहीं हो सकती। लॉकडाउन के एलान के बाद जो मनहूसियत फैली थी, उसके बीच 'मुस्कराएगा इंडिया' का जयघोष पूरी दुनिया ने सुना।
संदेश बहुत साफ है-फिर मुस्कराएगा इंडिया...फिर जीत जाएगा इंडिया...भारत लड़ेगा, भारत जीतेगा...। दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश अब सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के अनुशासन की मिसाल बन गया । मुसीबतों पर पलटवार करने के जज्बे ने देश की महानता का गान किया है। इन मुश्किल दिनों में अपने घर के अंदर बैठने वाला हर हिंदुस्तानी एक सैनिक की तरह है। ऐसे ही योद्धाओं के आत्मबल और संकल्प से कोरोना एक दिन जरूर हारेगा।
अगर हम यूं ही एक-दूसरे का साथ देते रहेंगे, तो देश के चेहरे पर यह मुस्कान सदियों तक खिलती रहेगी। पहले भी इंडिया ने कई मुश्किलों और चुनौतियों को मात दी है, इस बार भी कामयाबी हमारे कदम जरूर चूमेगी। अभी घर की दहलीज पार करना मुनासिब नहीं।
जो लोग सड़कों पर या अस्पतालों और दफ्तरों में हमारी-आपकी जिंदगी को आसान बनाने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं, उनके प्रयासों की सराहना करने के लिए इससे बेहतर तरीका और कुछ नहीं हो सकता। मैं तो यही कहूंगा कि फिर से शहरों में रौनक आएगी, फिर से गांवों में लौटेगी हंसी...जो साथ दे सारा इंडिया तो मुस्कुराएगा इंडिया...। (लेखक गायक और संगीतकार हैं।)