फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Coronavirus case News in Hindi : Emotionally attached with community kitchen

कम्युनिटी किचन में भाव-विभोर

Mon, 13 Apr 2020 12:13 AM IST
Arvind Tiwari अरविन्द तिवारी
Updated Mon, 13 Apr 2020 12:13 AM IST
विज्ञापन
Coronavirus case News in Hindi : Emotionally attached with community kitchen
कोरोना वायरस - फोटो : PTI

देश पर महामारी का संकट है। यह कोरोना वायरस पूरे विश्व में अमीर-गरीब का भेद किए बिना पीड़ा और मौत बांट रहा है! ऐसे समय में भारत के समाजसेवी और आम लोग देश सेवा में लगे हैं। उधर भैया जी अपने घर में लूडो खेलकर और बेड पर लुढ़क कर समय बिता रहे हैं। वह इस फिराक में हैं कि कोई चैनल वाला उनके घर रहने का वीडियो बनाए और पब्लिक को बताए कि भैया जी कैसे घर पर स्टे कर रहे हैं। उनका चमचा चंदू उनके लिए समाज सेवा के मौके निकाल ही लेता है।


loader

आज चंदू के साथ वह एक कम्यूनिटी किचन में जाकर गरीबों को खाना बांटने वाले हैं। पहले ही चंदू को बता दिया है कि उनके घुटने पांच मिनट से ज्यादा खड़े होने की इजाजत नहीं देंगे। चंदू ने ऐसी व्यवस्था कर दी है कि कुछ टीवी चैनल वाले भैया जी को कवर कर लें। भैया जी खाना बांटने लगे और खाना लेने वाले कृतज्ञता से उन्हें देखने लगे। चैनल वालों को आने में थोड़ी देर हो गई।

भैया जी कातर निगाहों से चंदू को देखने लगे। तभी चैनल वाले आ गए। चंदू ने भैया जी को मुस्कराने का इशारा किया, पर वह मुस्करा नहीं पाए। घुटनों के दर्द ने उन्हें मुस्कराने नहीं दिया, पर दर्द ने भाव विभोर कर दिया। लोग समझ गए भैया जी भावनाओं में बह रहे हैं।

चैनलों के जाते ही भैया जी ने खाना बांटना बंद कर दिया। चंदू ने किसी तरह उन्हें पास पड़ी टूटी कुर्सी पर बैठाया। लॉकडॉउन से पंद्रह दिन पहले भी इस चंदू ने भैया जी को भाव विभोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। उस दिन भी भैया जी बुरी तरह फंस गए थे। एक गांव में कथा चल रही थी, जिसके मंच पर भैया जी को  चंदू ने बैठा दिया  था। भैया जी कथा सुन रहे थे। किसी सेलिब्रिटी का कथा सुनना आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।

पंडित जी भक्त प्रह्लाद की कथा सुना रहे थे। श्रोता उन्हें आश्चर्य से देख रहे थे। उनके भाव विभोर चेहरे पर अथाह पीड़ा थी और मन में चंदू के लिए असीमित गालियां! उनके घुटने जवाब दे चुके थे, जिसकी पीड़ा उनके चेहरे पर झलक रही थी। उधर कथा में भक्त प्रह्लाद को उसके पिता द्वारा यातनाएं दी जा रही थीं। पंडित जी समझ रहे थे कि भैया जी कथा के इस प्रसंग से द्रवित हो रहे हैं।

हकीकत में भैया जी के घुटनों का द्रव सूख चुका था, इसलिए चेहरा द्रवित हुआ जा रहा था। भैया जी घुटनों की पीड़ा मुंह पर लिए हुए पंडित जी की ओर मजबूरी में देख रहे थे। श्रोता भी भैया जी को गौर से कथा सुनता देख रहे थे। भैया जी का द्रवित होना उन्हें भी अच्छा लग रहा था, वरना पैथोलॉजी की समस्त रिपोर्टें बताती हैं कि आधुनिक सियासत की शिराओं का समस्त द्रव सुख चुका है! ग्लिसरीन न हो, तो आंसू तक नहीं आते। श्रोता बड़ी देर में भाव को क्रमशः हृदय से आंखों तक ला पाते हैं। लेकिन भैया जी को घुटनों का दर्द हर बार भाव-विभोर कर देता है।

जब भक्त प्रह्लाद को दी जा रही यातनाओं को सुनने से कानों ने साफ इनकार कर दिया, तो भैया जी ने सामने खड़े चंदू को आंखों-आंखों में इशारा किया। चंदू मंच के पीछे जाकर भैया जी के मोबाइल पर घंटी मारने लगा। दो बार भैया जी ने मोबाइल की घंटी बंद कर दी और फोन जेब के हवाले कर दिया, ताकि वह और भाव विभोर दिखाई दे सकें। जब चंदू ने तीसरी घंटी मारी, तो भैया जी किसी तरह खड़े होकर मंच से उतर आए और चंदू का फोन सुनने का नाटक करते हुए दूर चले गए। लोगों ने समझा जरूर कोई अर्जेंट फोन है, वरना कथा में डूबे हुए भैया जी हरगिज नहीं उठते!

कुछ दूर जाने पर चंदू उनके पास आ गया। भैया जी ने चंदू को थप्पड़ तो नहीं मारा, पर मारने के लिए हाथ उठा ही लिया था। चंदू तुरंत भैया जी के घुटनों की मालिश करने लगा। मालिश ने उन्हें फिर भाव पर ला दिया। गाड़ी में बैठकर वह लौट तो गए, मगर सोचते रहे, ये घुटने ऐसे न होते तो वे भाव-विभोर कैसे होते? अच्छा ही हुआ, अच्छे नेता का घुटना भी देश के कितने काम आता है। (लेखक चर्चित व्यंग्यकार हैं।)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed