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कोरोना का कहर : मिसाइल नहीं, वेंटिलेटर की जरूरत

Fri, 27 Mar 2020 07:54 AM IST
mariana babar मरिआना बाबर
Updated Fri, 27 Mar 2020 07:54 AM IST
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Coronavirus alert, there is no need of missile only need Ventilator
पाकिस्तान में कोरोनावायरस - फोटो : पीटीआई

पाकिस्तान में इस बार की सर्दी बेहद कंपकंपाने वाली और बारिश  भरी थी। मैंने सर्दी के मौसम में इतनी बारिश इससे पहले कभी नहीं देखी थी। लेकिन हवा में एक उदासी भरी है। वही उदासी, जिसे फिलहाल पृथ्वी के हर गांव और शहर में महसूस किया जा सकता है। कोरोना वायरस से दुनिया भर के देश किस तरह लड़ाई लड़ रहे हैं, हजारों लोगों की जान कोरोना से किस तरह गई और देशों ने इससे निपटने के लिए किस तरह के आपात कदम उठाए, इसका जवाब दे पाना आसान नहीं है, क्योंकि विभिन्न देश अलग-अलग तरीके से इससे लड़ रहे हैं। मैं यह सुनकर हैरान रह गई कि स्पेन ने अब भी अपने स्कूल, कैफे, पार्क और बार खुले रखे हैं, क्योंकि वहां की सरकार अपने नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कुचलना नहीं चाहती। जबकि कोरोना से लड़ रहे दूसरे अनेक देशों में लॉकडाउन और कर्फ्यू हैं।


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पाकिस्तान चीन के साथ अपनी सरहद साझा करता है और चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) में भारी संख्या में चीनी काम करते हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान में चीन से कोरोना के संक्रमण का एक भी मामला सामने नहीं आया। नया साल मनाने के लिए भारी संख्या में चीनी अपने वतन चले गए थे। बाद में वहां से लौटे लोगों की पाकिस्तान में जांच हुई, लेकिन सभी की रिपोर्टें निगेटिव आईं। पाकिस्तान में कोरोना से संक्रमित लोगों का आंकड़ा फिलहाल 1,000 पार कर गया है, जिनमें से ज्यादातर मामले ईरान से आए हैं।

दरअसल पाकिस्तान से शिया तीर्थयात्री ईरान के पवित्र शहर कोम गए हुए थे और वापसी में वे इस वायरस को साथ ले आए। एक दूसरी बात यह बताई जा रही है कि पाक तीर्थयात्रियों के कोम जाने के अलावा कुछ चीनी भी ईरान गए थे, जहां एक चीनी कंपनी हाई स्पीड ट्रेन रूट का निर्माण कर रही है। कोम गए हजारों पाकिस्तानी तीर्थयात्री न केवल लौट चुके हैं, बल्कि अब भी ईरान से लगी सीमा से लौट रहे हैं, क्योंकि ईरान सीमा पर आवाजाही रोकने में सक्षम नहीं है। पाकिस्तान में ईरान से लगती सीमा बलूचिस्तान स्थित तुरबत में है।

बलूचिस्तान में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब होने के कारण वहां सैनिकों की भारी मौजूदगी है। पाकिस्तान सरकार ने एक बड़ी गलती यह की कि ईरान से लौटे लोगों को अलग-थलग नहीं किया और उन्हें जगह देते हुए सफाई-व्यवस्था का भी ध्यान नहीं रखा गया। नतीजतन लौटे हुए तीर्थयात्रियों के जरिये बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी वायरस से संक्रमित हो गए। जब उन तीर्थयात्रियों के वायरस संक्रमित होने की खबर सोशल मीडिया पर फैली, तब जाकर सरकार ने कदम उठाने शुरू किए। अगर शुरुआत में ही एहतियात बरतते हुए तीर्थयात्रियों को अलग-थलग कर दिया जाता और उनके इलाज की व्यवस्था की जाती, तो पाकिस्तान में आज शायद ही कोरोना वायरस का कोई मामला सामने आता।

तीर्थयात्रियों के अलावा विदेश से लौटे लोगों के कारण भी पाकिस्तान में संक्रमण के मामले बढ़ गए। आज पाकिस्तान के कई प्रांतों में लॉकडाउन है। संक्रमण के सबसे अधिक मामले सिंध में हैं, क्योंकि सबसे अधिक तीर्थयात्री यहीं के थे। इसी सप्ताह सिंध की सरकार ने घोषित किया है कि अगर लोग लॉकडाउन का पालन नहीं करते, तो कर्फ्यू लगा दिया जाएगा।कोरोना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने निर्यातकों ओर मजदूरों को मदद देने का एलान किया है।

प्रधानमंत्री इमरान खान ने 6.7 करोड़ लोगों को राहत देने के लिए 94 करोड़ डॉलर के प्रोत्साहन पैकेज का एलान किया है। जो लोग बहुत कम पैसा कमाते हैं, सरकार उन्हें हर महीने 12,000 रुपये की मदद देगी। विभिन्न इलाकों में धनी लोग खाने-पीने की चीजें बांट रहे हैं और लंगर भी चलते देखे जा रहे हैं। कई साल पहले जो नेकी की दीवारें बनाई गई थीं, वहां खाने-पीने की चीजें बांटी जा रही हैं और कतारों में लगे हुए ज्यादातर मर्द हैं।

लेकिन शहरों में लॉकडाउन होने के कारण चूंकि लोग सदमे में हैं और उनका घर से बाहर निकलना बंद कर दिया गया है, ऐसे में, गरीबों और रोजगार खो चुके लोगों की शिनाख्त और मदद कर पाना मुश्किल है। विद्वानों ने लोगों से अपील की है कि गरीबों की मदद करने के लिए रमजान का इंतजार न करें और जरूरतमंदों को जकात व खैरात दें। सऊदी अरब में खाना काबा तक को बंद कर दिया गया है, ताकि भीड़ न हो।

दूसरे देशों में भी तमाम मस्जिदों को बंद कर देने का एलान किया जा चुका है। लेकिन पाकिस्तान की सरकार उलेमा को नाराज नहीं करना चाहती, इसलिए मस्जिद खुले हैं। कई दूसरे मुल्कों की तरह सैनिक साज-ओ-सामान, परमाणु बम और मिसाइल पर भारी निवेश कर चुका पाकिस्तान आज वेंटिलेटर के लिए तरस रहा है। कोरोना संकट ने पाकिस्तान की खोखली स्वास्थ्य प्रणाली की पोल खोल दी है, क्योंकि पिछले सत्तर साल में किसी भी सरकार ने स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने पर ध्यान नहीं दिया।

दुनिया के हर देश से फिलहाल वेंटिलेटर की भारी मांग है, जबकि आपूर्ति तुलनात्मक रूप से कम है। चीन ने हालांकि पाकिस्तान को वेंटिलेटर मुहैया कराने का भरोसा दिया है, लेकिन इसमें समय लगेगा, क्योंकि चीन के पास दुनिया के अनेक देशों से मांग आई है।

जब न्यूयॉर्क के गवर्नर तक वेंटिलेटर और चिकित्सा उपकरणों की कमी महसूस कर रहे हैं, तब तीसरी दुनिया के देशों के बारे में भला क्या कहा जाए! सवाल यह है कि इस संकट से उबर जाने पर क्या हम सबक सीखेंगे। क्या शानदार सड़क, प्लाजा और मिसाइल पर खर्च करने के बजाय हम लोगों की बेहतरी की व्यवस्था पर खर्च करेंगे? वकालत के पेशे से जुड़े और राजनीतिक टिप्पणीकार बाबर सत्तार कहते हैं, 'बीमारी से रोकथाम व प्रभावशाली स्वास्थ्य प्रणाली तक पहुंच और जीवन निर्वाह का अधिकार, दोनों ही जीने के हमारे अधिकार से जुड़े हैं।'

वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री इमरान खान अभी तक इसका कोई तरीका ही नहीं निकाल पाए हैं कि जीवन निर्वाह के हमारे अधिकार को बरकरार रखते हुए देश को कोरोना के संकट से कैसे मुक्त किया जाए।  

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