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इंडोनेशिया के साथ सहयोग की राह

Fri, 31 Oct 2014 12:41 AM IST
के विक्रम सिंह
के विक्रम सिंह Updated Fri, 31 Oct 2014 12:41 AM IST
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Cooperation with Indonesia

लकड़हारा अब्राहम लिंकन अमेरिका के श्रेष्ठतम राष्ट्रपति और खदान मजदूर निकिता ख्रुश्चेव सोवियत संघ के महाबली प्रधानमंत्री बने, तो इसे अवसर की समानता का ही नतीजा माना गया था। इसी क्रम में चंद माह पूर्व एक चायवाला भारत का प्रधानमंत्री निर्वाचित हुआ, तो समतावादी सिद्धांत और पुख्ता बना। मगर पड़ोसी देश इंडोनेशिया ने इस मामले में हिंदुस्तान को भी मात दे दी, जब नगर सुरकर्ता (सोलो) की झुग्गी झोपड़ी में जन्मे और पले-बढ़े जोको विदोदो गत सप्ताह वहां के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।

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गौरतलब है कि जोको एक बढ़ई थे, लकड़हारे के बेटे। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र और तीसरे बड़े प्रजातंत्र ने यह दिखाया कि व्यक्ति के विकास की गति समता के कारण तेज हो जाती है। मोदी और जोको दोनों ही अपनी राष्ट्रीय राजधानी (नई दिल्ली और जकार्ता) की अभिजात्य संस्कृति के लिए अजनबी हैं।
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इतिहास की बात करें तो, स्वतंत्रता के कुछ ही महीनों बाद भारत ने इंडोनेशिया की मुक्ति के लिए सफल मदद दी। कुछ वैसे ही, जैसे भारत ने चीन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता दिलवाने में दी थी। विडंबना है कि दोनों पड़ोसी गणराज्य कृतघ्न साबित हुए। इंडोनेशिया का यह रवैया भारत के लिए खासा दुःखदायी था, क्योंकि पूरे दक्षिणपूर्वी एशिया, खासकर इंडोनेशिया में राम की संस्कृति आप्लावित रही है।
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संस्कृतनिष्ठ शब्द आज भी जकार्ता, बाली और बोर्नियो में सुनाई पड़ते हैं। इसकी शुरुआत हुई थी, युगों पूर्व, जब किष्किंधा के वानरराज सुग्रीव ने अपने दूतों को जम्बूद्वीप से यवद्वीप (जावा) भेजा था, सीता की खोज में।

अगर वर्तमान संदर्भ में देखें, तो भारत की भांति इंडोनेशिया को भी आंतरिक विघटनकारी तत्वों और भ्रष्टाचार ने घेरा हुआ है। अब तक के लगभग सभी राष्ट्रपतियों पर सत्ता के दुरुपयोग, परिवारवाद और अधिनायकवाद को थोपने का आरोप लगा है। जोको ने अपने प्रथम संबोधन में कहा है कि अराजकता और अनुशासन के दरम्यान वह दीवार बनेंगे।

इस्लामिक स्टेट की फौज में इंडोनेशिया तथा भारत के भ्रमित युवा भी शामिल हुए हैं। इस मामले में दोनों देश एक-दूसरे का साथ दे सकते हैं। इसके अलावा अगले माह आस्ट्रेलिया में जी-20 राष्ट्रों का अधिवेशन हो रहा है, जहां मोदी और जोको की भेंट तय है। भारत के लिए इंडोनेशिया के साथ नौसैनिक रिश्ते बनाने का यह सही वक्त है।

इसमें संदेह नहीं कि भूगोल ने इंडोनेशिया के लिए शाश्वत त्रासदी पैदा की है। तेरह हजार द्वीप, तीन सौ भाषायें और बोलियां, अपर्याप्त संसाधनवाली सेना आदि इंडोनेशिया की नियति है। फिर भी जोको ने लक्ष्य साफ बनाया है कि साथ चलेंगे। काम, काम, बस काम करते जाएंगे। कुछ मिलता-जुलता नारा सुना था हमने भी, सबका साथ, सबका विकास।


आधी बांह वाली बुशर्ट पहने राष्ट्रपति जोको हाथ उठाकर अपनी इच्छाशक्ति को व्यक्त करते हैं, हालांकि उनकी यह पोशाक दशक पूर्व की है, जब वह सोलो के महापौर थे। यह वह समय था, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, और पूरी आस्तीन का कुर्ता पहनते थे। अब मोदी ने भी अपने कुर्ते की बांहे आधी काट ली हैं। उनके बीच का यह सादृश्य शायद दोनों में अनुमानित सहयोग का संकेत बन सके।

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