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संचित सोने से अर्थव्यवस्था को गति

Wed, 15 Oct 2014 11:50 PM IST
जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Updated Wed, 15 Oct 2014 11:50 PM IST
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Consolidated gold speed economy

हाल ही में प्रकाशित वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि जो भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है, वह अब सोने के भंडार के मामले में विश्व के दस शीर्ष देशों में शामिल हो गया है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 557.7 टन सोने का भंडार है, जो देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 7.1 फीसदी है। डब्ल्यूजीसी ने यह भी कहा है कि घरों और मंदिरों में रखे गए 22,000 टन सोने का अगले पांच साल के दौरान न सिर्फ उत्पादक इस्तेमाल होना चाहिए, बल्कि उसे सोने के आयात पर भी अपनी निर्भरता कम करनी चाहिए।

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निश्चय ही हमें घरों और मंदिरों में संचित अनुत्पादक सोने को अर्थव्यवस्था के काम में लगाना चाहिए। इसे देश के वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए। मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था को तेज गति देने के लिए संसाधनों की कमी है और इसी कारण बड़ी संख्या में लोग उद्योग-व्यवसाय में रोजगार संकट की पीड़ाओं का सामना करते हुए दिख रहे हैं। ऐसे में सोने पर ऋण की आकर्षक योजनाएं बनाए जाने से उद्योग-व्यवसाय को प्रोत्साहन मिलेगा। सोने के कारोबार से विदेशी मुद्रा की कमाई और बड़ी संख्या में रोजगार की रणनीति भी बनानी चाहिए। मौजूदा समय में देश से आठ अरब डॉलर के सोने के आभूषणों का निर्यात किया जाता है। इसे 2020 तक पांच गुना बढ़ाकर 40 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके आधार पर भारत को समूचे सोने के कारोबार की शृंखला में 50 लाख लोगों को रोजगार सृजन का भी लक्ष्य लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
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यदि देश के सोने का उपयोग रोजगार बढ़ाने एवं कौशल विकास के लिए किया जाएगा, तो देश की प्रतिभाएं देश को आर्थिक महाशक्ति बना सकती हैं। देश और दुनिया के उद्योग-कारोबार जगत में नई बाजार जरूरतों के अनुरूप भारत की शिक्षित-प्रशिक्षित प्रतिभाओं की मांग बढ़ रही है, लेकिन देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संस्थाओं की कमी और गरीब प्रतिभाशाली छात्रों के पास संसाधनों के अभाव के कारण बाजार की जरूरत के अनुरूप प्रतिभाओं की पूर्ति नहीं हो पा रही है। कटु सत्य यही है कि न सिर्फ सरकार की छतरी के नीचे उद्यमपरक मानव संसाधन तैयार करने वाले गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थाओं की संख्या बहुत कम है, बल्कि प्रवेश और ऊंची फीस की दुष्कर व्यवस्था के कारण निजी क्षेत्र के प्रोफेशनल शिक्षण संस्थानों में गरीब एवं निम्न मध्यवर्ग के विद्यार्थी के लिए मौकों का अभाव है। ऐसे में ट्रस्टों के माध्यम से मंदिरों के संचित सोने का उपयोग अधिक से अधिक गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना एवं प्रतिभाओं को तराशने में करना श्रेयस्कर होगा।
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मोदी सरकार जिस तरह से मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत जैसे एक के बाद एक नए-नए उपयोगी अभियान शुरू कर रही है, क्या उम्मीद करें कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सुझावों के मद्देनजर सोने के उपयोग के लिए भी वह नई रणनीति बनाकर एक ऐतिहासिक अभियान चलाएगी? ऐसा होने पर ही सोने के अधिकतम उत्पादक उपयोग से आने वाले वर्षों में भारत विकसित देश और आर्थिक महाशक्ति बनते हुए दिखाई दे सकेगा।

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