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नक्सलवाद पर नीति स्पष्ट करे कांग्रेस

Fri, 31 May 2013 08:55 PM IST
नई दिल्ली
नई दिल्ली Updated Fri, 31 May 2013 08:55 PM IST
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congress clarify policy on naxalite

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वैंकेया नायडू का मानना है कि केंद्र में सरकार चला रही कांग्रेस के पास नक्सल समस्या से निपटने के लिए कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति की कमान संभाल रहे वैंकेया कहते हैं कि केंद्र सरकार माओवादियों से निपटने के लिए राज्यों की जरूरत भर मदद नहीं करती है। छत्तीसगढ़ की हिंसक घटना समेत नक्सल समस्या पर उनसे हरीश लखेड़ा की बातचीत:-
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:- छत्तीसगढ़ में हुए हिंसक हमले के बाद माओवादियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के बजाय कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग चल रही है। कांग्रेस इसके लिए प्रदेश की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। आपका क्या कहना है?
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:- यह कोई कोई एक राज्य की समस्या नहीं है, वर्तमान समय में नक्सली राष्ट्रीय चुनौती बन गए हैं। खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसे देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बता चुके हैं। केंद्र और राज्यों को मिलकर इसका मुकाबला करना होगा, लेकिन केंद्र में सरकार चला रही कांग्रेस के पास इससे निपटने की कोई स्पष्ट नीति नहीं है। आज छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश सहित अनेक राज्य नक्सल प्रभावित हैं। केंद्र की मदद के बिना इससे निपटा नहीं जा सकता और भाजपा केंद्र सरकार को मदद के लिए भी तैयार है, लेकिन कांग्रेस इस पर ओछी राजनीति कर रही है।

:- आप गृह मंत्रालय से संबंधित संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष भी हैं। समिति ने नक्सल समस्या से निपटने के लिए सरकार को क्या-क्या सुझाव भेजे हैं?

:- स्थायी समिति सरकार को कई बार सुझाव भेजती रही है। समिति का मानना है कि सरकार को इस समस्या का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए। केंद्र और राज्यों के आपसी समन्वय से ही यह सुलझ सकती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को बढ़ावा देना चाहिए। खासतौर पर सड़क निर्माण में सीमा सड़क संगठन की मदद लेनी चाहिए। विकास की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को शामिल करना होगा। नक्सल प्रभावित राज्यों के बीच भी तालमेल बढ़ाना होगा। पुलिस बल को आधुनिक हथियारों से लैस करना होगा, लेकिन दिक्कत यह है कि समिति भी एकमत नहीं हो पाती है, क्योंकि इस मुद्दे पर खुद कांग्रेस में भी आपसी झगड़ा है। इसका उदाहरण सामने है, जब तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम नक्सलियों के खिलाफ कड़ा अभियान चलाना चाहते थे, और दिग्विजय सिंह और मणिशंकर अय्यर जैसे नेताओं ने उनका कड़ा विरोध किया। इसीलिए हम कह रहे हैं कि कांग्रेस पहले अपनी नीति साफ करे।


:- भाजपा के गोवा सम्मेलन में इस मुद्दे पर विचार विमर्श होगा?

:- हां, निश्चित तौर पर हम नक्सल समस्या पर चर्चा करेंगे। पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक में पेश होने वाले राजनीतिक प्रस्ताव में यह विषय शामिल होगा। हम चाहते हैं कि लोकतंत्र और विकास साथ-साथ चले। सत्ता में सभी की भागीदारी हो, लेकिन नक्सली कोई भी विकास कार्य नहीं होने  देते हैं। वास्तव में यह बुलेट और बैलेट का झगड़ा है।

:- छत्तीसगढ़ विधानसभा के चुनाव निकट हैं, इस घटना से कांग्रेस के प्रति सहानुभूति बढ़ सकती है?

:- सहानूभूति का लाभ व्यक्ति को तो मिल सकता है, लेकिन पार्टी को नहीं। वैसे भी स्थानीय स्तर पर लोग सच्चाई जानते हैं। कई तरह की बातें सामने आ रही हैं, जो जांच में सामने आ जाएंगी। कांग्रेस सरकार को इस घटना के बाद केंद्र में सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी, लेकिन वह छत्तीसगढ़ सरकार की बुलाई सर्वदलीय बैठक में भी शामिल नहीं हुई।

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