भारत अमेरिका बन रहा है, बधाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अब इस देश को अमेरिका बनने से कोई नहीं रोक सकता। बल्कि अमेरिका बन ही गया समझिए। एक चुनावी तेवर की ही कमी थी। अमित शाह की कृपा से वह भी दूर हो गई। अब तो चुनाव प्रचार में भी बराक ओबामा की बोली चल रही है-यह बदला लेने का चुनाव है। हमारे अमेरिका बनने में क्या अब भी कुछ बाकी है? चुनाव आचार संहिता की वजह से फौरन इसकी घोषणा करने में कुछ दिक्कत हो सकती है। पर हम उम्मीद करते हैं कि नई सरकार बनते ही यह ऐलान कर दिया जाएगा कि भारत नख-शिख तक अमेरिका बन चुका है। जिस राजनीतिक पार्टी ने भारत को अमेरिका बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, उसे एडवांस में बधाई।
बेशक, हर बड़े काम की तरह अमेरिका बनने में भी मीन-मेख निकालने वाले निकल आए हैं। आलोचक कह रहे हैं कि ओबामा का चुनावी तेवर अपना लेने से कोई अमेरिका नहीं बन जाता। कुछ लोग तो बेचारे अमित शाह पर ओबामा के डायलॉग की चोरी का इल्जाम लगाने पर उतर आए हैं। यह सिर्फ एक डायलॉग का मामला नहीं है। इकॉनोमी वगैरह में तो हम करीब बीस साल से अमेरिका बनने की कोशिश कर रहे थे।
बात पॉलिटिक्स तक पहुंच गई है। ओबामा के चुनाव जैसा चुनाव। ओबामा के चुनाव जैसा खर्च। ओबामा के चुनाव जैसा विज्ञापन। और अब ओबामा के डायलॉग भी। अमेरिका बनने के लिए और क्या चाहिए!
पर भाई लोगों ने इसमें भी पॉलिटिक्स घुसा दी है, और वह भी घटिया चुनावी पॉलिटिक्स। शाह साहब की पीठ ठोकना दूर, उनके खिलाफ मुकदमे ठोक दिए गए हैं। चुनाव आयोग जो कर रहा है, वह उसका काम है, लेकिन राजनीतिक पार्टियों को इस पर हल्ला क्यों मचाना चाहिए? भला बताइए, ऐसे देश का कुछ बन सकता क्या? अमेरिका बनाने के लिए श्रेय नहीं देना है, तो मत दीजिए, पर चीजों को गलत तरह से तो मत देखिए। अमित शाह ने एक सच्चे गांधीवादी की तरह लोगों को सीख दी है कि यह तीर-तलवारों से बदला लेने का टैम नहीं है। पर लोग हैं कि बात का बतंगड़ बना रहे हैं।