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लालबत्ती मिलने पर बधाई

Wed, 19 Jun 2013 09:50 PM IST
अरविंद तिवारी
अरविंद तिवारी Updated Wed, 19 Jun 2013 09:50 PM IST
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congratulation for redlight

हमारे राज्य के एक निर्दलीय विधायक, जो लगभग बीपीएल श्रेणी में शुमार हैं, एक दिन मेरा मोबाइल मांग बैठे। हालांकि उनके पास दो-दो मोबाइल हैं, मगर कड़की के चलते वह दूसरों के फोन से ही बात करते हैं। मेरे फोन से उन्होंने बिहार के निर्दलीय विधायकों को ‘लालबत्ती’ की उम्मीद पर बधाई दी, फिर मेरी ओर मुखातिब होकर बोले, भाई साहब, सियासत और क्रिकेट में कब क्या हो जाए, कह नहीं सकते।

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बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास तीन चौथाई बहुमत था, इसलिए वहां के निर्दलीय विधायक हमसे भी ज्यादा फटेहाल थे। किसी को स्वप्न में भी उम्मीद नहीं थी कि ये निर्दलीय विधायक एक दिन ‘लालबत्ती’ वाली लाइन में आ खड़े होंगे। घूरे के दिन फिरने वाली कहावत शत प्रतिशत सही हुई है। काश, हम भी बिहार के निर्दलीय विधायक होते।
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मैं नेताजी की पीड़ा समझ सकता हूं, क्योंकि जैसे सुहागिन महिला की सार्थकता उसके सिंदूर होती है, उसी तरह किसी नेता की सार्थकता लालबत्ती में होती है। हालांकि केंद्र और राज्यों के आला अधिकारी भी लालबत्ती धारक होते हैं, मगर ‘लालबत्ती’ शब्द मंत्री या मंत्री स्तर के व्यक्तित्व के लिए उसी तरह रूढ़ हो गया है, जैसे ‘सिस्टर’ शब्द नर्स के लिए। हर छुटभैये नेता का अंतिम सपना ‘लालबत्ती’ का होता है।
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मगर ‘लालबत्ती’ एक यक्ष प्रश्न भी है। लालबत्ती नेतागीरी में चार चांद लगाने के साथ-साथ चार पैसे भी दिलवाती है। लालबत्ती जहां जाती है, प्रशासन उस रास्ते पर कालीन की तरह बिछा हुआ मिलता है। लालबत्ती सियासत की बड़ी नियामत है।

नियमों, प्राधिकरणों, अधिकार प्राप्त समितियों, संगीत-साहित्य, सांस्कृतिक अकादमियों आदि के अध्यक्ष भी लालबत्ती धारक होते हैं। कालांतर में प्राधिकरण, निगम, अकादमियां आदि गौण हो जाते हैं, मंत्री का दर्जा प्रबल हो जाता है। आसन्न चुनावों को देखते हुए मंत्रिपरिषद में फेरबदल के बगैर ही मंत्री बढ़ाए जा रहे हैं।


लालबत्तियां ‘रेवड़ियों’ की तरह बंट रही हैं। लेकिन लालबत्तियां जितनी उदारता से बांटी जाती हैं, उतनी ही निर्ममता से छीनी भी जाती हैं। केंद्र सरकार के कई मंत्री इस निर्ममता के शिकार हो चुके हैं। राज्यों में भी लालबत्तियों का चीरहरण होता रहता है। इसलिए प्यारे, लालबत्ती प्राप्त करना जितना आसान है, उसे बरकरार रखना उतना ही मुश्किल।

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