{"_id":"5c092170bdec2241a26d9dae","slug":"conflects-with-hardliner","type":"story","status":"publish","title_hn":"कट्टरपंथियों से जद्दोजहद","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया","slug":"opinion"}}
कट्टरपंथियों से जद्दोजहद
मरिआना बाबर
Updated Thu, 06 Dec 2018 06:47 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
टीएलपी विरोध प्रदर्शन
पाकिस्तान का सुरक्षा से जुड़ा सबसे अहम मुद्दा, जो न केवल नागरिकों को प्रभावित करता है, बल्कि सरहद के बाहर के लोगों को भी परेशान करता है, वह है नॉन स्टेट ऐक्टर्स (ऐसे व्यक्ति या समूह जो राज्य को प्रभावित करते हैं और आंशिक या पूरी तरह से सरकार से स्वतंत्र होते हैं), जिन्होंने पाकिस्तान के भीतर और बाहर आतंक मचा रखा है। संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों से उन पर अंकुश लगाया जा सकता है, लेकिन फिलहाल वे पूरे मुल्क में खुलेआम घूम रहे हैं।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
वर्ष 2018 के चुनाव में एक नई घटना देखी गई, जब तहरीक-ए लब्बैक (टीएलपी) का उदय हुआ, और जिसने सिंध विधानसभा में दो सीटें जीतकर कई लोगों को हैरान कर दिया। वोटों की संख्या के मामले में पंजाब टीएलपी का गढ़ बन गया। पार्टी को मिले हर पांच वोट में से चार वोट अकेले पंजाब से मिले। वोटों के आधार पर पंजाब विधानसभा में टीएलपी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सांसदों (पीपीपीपी) को पछाड़कर तीसरे स्थान पर रही, लेकिन सीट पाने में विफल रही।
टीएलपी के नेता खादिम रिजवी ने एक बिंदु के एजेंडे और बहुत ही संवेदनशील व भावनात्मक मुद्दे, जो आम बरेलवी मस्जिद जाने वालों को अपील करता है, पर लोगों को संगठित किया। कुछ विश्लेषक टीएलपी के उदय को पारंपरिक बरेलवी नेतृत्व (जो ऊपरी आय समूह के विद्वानों और आध्यात्मिक नेताओं से आते हैं) के प्रभाव में कमी का नतीजा मानते हैं। पाकिस्तान की नई कट्टरपंथी मजहबी पार्टी टीएलपी ईशनिंदा करने वालों की मौत का आह्वान करती है और उन लोगों के साथ जश्न मनाती है, जिन्होंने कथित अपराधियों की हत्या की है। जिन्ना के पाकिस्तान में ऐसी आवाजें अल्पसंख्यक हैं, पर मजहब के नाम पर कट्टरपंथियों के जरिये सत्ता प्रतिष्ठान को ब्लैकमेल करना उनके लिए आसान है। एक के बाद एक आने वाली सरकारें हिंसा की उत्तेजना और मजहबी नफरत फैलाने के प्रयासों के खिलाफ मौजूदा कानूनों को लागू करने में नाकाम रही हैं। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई की है।
इसकी शुरुआत तब हुई, जब मुमताज कादरी नामक एक पुलिस वाले ने पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या कर दी, क्योंकि वह जेल में ईशनिंदा की आरोपी ईसाई महिला आसिया बीबी, जिसे मौत की सजा सुनाई गई थी, से मिले थे। नतीजतन नवाज शरीफ और सुरक्षा प्रतिष्ठान ने भारी दबाव में कादरी को मौत की सजा सुनाई, जिसे अब टीएलपी एक संत मानती है और उसकी कब्र अब मकबरा बन गई है, जहां प्रार्थना करने और सम्मान देने के लिए भारी भीड़ जुटती है।
हाल ही में जब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आसिया बीबी निर्दोष है और अब एक स्वतंत्र नागरिक है, तो उसके खिलाफ टीएलपी ने मुल्क भर में भारी विरोध प्रदर्शन किया, जिससे पूरा मुल्क मानो थम गया था। शायद ही किसी को याद हो कि पाकिस्तान में किसी राजनीतिक पार्टी ने कभी मुल्क के संविधान का उल्लंघन कर राजद्रोह और आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों को अंजाम दिया था।
हवाओं के रुख को पहचानते हुए खादिम रिजवी ने सेना प्रमुख जनरल बाजवा की आलोचना करते हुए कहा कि वह गैर मुस्लिम हैं और इमरान खान की बीवी बुशरा बेगम से कहा कि वह अपने पति इमरान खान की हत्या कर दें, क्योंकि वह ईशनिंदा के दोषी हैं, पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ भी उसने सख्त लफ्जों का इस्तेमाल किया और यह सब इसलिए कि आसिया बीबी निर्दोष साबित हुई थीं। खादिम रिजवी द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ लफ्ज इतने सख्त हैं कि उन्हें दोहराया नहीं जा सकता। हालांकि पाकिस्तान में आलोचना के लिए जगह है, लेकिन ऐसे दुर्व्यवहार अविश्वनीय हैं।
यह दूसरी बार था, जब सभी सड़कों व राजमार्गों पर अवरोध पैदा करके और यहां तक कि मासूम यात्रियों पर हमले करके उन्होंने पूरे मुल्क को बंधक बना लिया था, जिसके चलते सरकार को इसे खत्म करने के लिए कदम उठाना पड़ा। कोई यकीन नहीं कर सकता कि जब आसिया बीबी के लिए दूसरी बार मौत का फतवा जारी किया गया, तो सरकार ने उसे सुरक्षात्मक हिरासत में ले लिया और टीएलपी के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया।
खादिम रिजवी पर मुकदमा चलाया जाएगा और उनके खिलाफ मामला पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में आतंकवाद-विरोधी अदालतों में चलाया जाएगा। लेकिन अब भी संदेह है कि इमरान खान और जनरल बाजवा यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पाकिस्तानी कानून को अपने हाथ में नहीं लेगा।
इन गिरफ्तारियों पर टिप्पणी करते हुए द डॉन ने लिखा है कि यह देखना बाकी है कि सरकार इस पर अनुसरण करना चाहती है या नहीं, लेकिन अगर ऐसा होता है, तो यह मुल्क में विरोध प्रदर्शन और वैध बहस के लिए मील का पत्थर होगा। द डॉन ने लिखा, यह विरोध प्रदर्शन राज्य सत्ता की ऐतिहासिक नाकामी थी और एक महीने से भी ज्यादा समय से मुल्क सामान्य हालात बहाल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन टीएलपी की भड़काने वाली प्रकृति का असर कम नहीं हुआ है।
पश्तून तहफुज आंदोलन (पीटीएम) की तरह पाकिस्तानी शांतिपूर्ण तरीके से अपने सांविधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं, पर उन्हें बहुत दमनकारी तरीके से गिरफ्तार किया गया है। सरकार का कहना है कि आसिया बीबी को जेल से रिहा कर दिया गया है, क्योंकि वहां उनका रहना अवैध था और अब वह सरकार की सुरक्षा में रह रही हैं। कई पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान से कहा है कि वे उन्हें और उनके परिवार को शरण देना चाहते हैं, क्योंकि पाकिस्तान में उनका सुरक्षित रहना असंभव है। पाकिस्तानी यह देख रहे हैं कि खादिम रिजवी के खिलाफ मामला कैसे बढ़ता है। उन्हें पाकिस्तान में किसी राजनीतिक दल का बहुत समर्थन हासिल नहीं है और उसके अनुयायी शांत हैं। अगर उसे मुल्क के कानून के अनुसार सजा दी जाती है और उनके समर्थक हिंसक उत्पात नहीं करते हैं, तो पाकिस्तान कट्टरपंथ के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाएगा। सुप्रीम कोर्ट एक राजनीतिक दल के रूप में टीएलपी पर प्रतिबंध लगा सकता है, क्योंकि उसके खिलाफ चल रहे एक अन्य मामले में चुनाव आयोग से पूछा गया है कि उन्होंने 2018 के चुनाव के दौरान टीएलपी को कैसे पंजीकृत किया था।