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कठिन परिस्थितियों में विकासोन्मुख बजट

Sun, 02 Feb 2020 03:20 AM IST
सीएम वासुदेव सीएम वासुदेव
सीएम वासुदेव Published by: सीएम वासुदेव Updated Sun, 02 Feb 2020 03:20 AM IST
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CM Vasudev says Budget 2020 is development oriented in difficult circumstances
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : पीटीआई

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने जो बजट संसद में पेश किया है, वह मेरी समझ से संतुलित बजट है। हमें यह ध्यान में रखना होगा कि यह बजट कठिन आर्थिक परिप्रेक्ष्य में तैयार किया गया है। मुद्रास्फीति बढ़ रही है। विकास दर पांच फीसदी से नीचे जा चुकी है। अर्थव्यवस्था में निवेश घट गया है। मांग में भारी कमी आई है। वित्तीय घाटे पर भी काफी दबाव पड़ा है। वित्तमंत्री ने इन सब कठिनाइयों को मद्देनजर रखते हुए एक विकासोन्मुख बजट बनाने का प्रयास किया है।


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बजट से जो सबसे बड़ी उम्मीद की जा रही थी कि वित्तमंत्री विकास दर की गति को मजबूती देने के लिए फौरी तौर पर कुछ अल्पकालीन कदम उठाएंगी। सरकार की तरफ से बजट के जरिये खपत को बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठाए जाने की उम्मीद थी। चूंकि मुद्रास्फीति बढ़ रही है, इसलिए रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के जरिये खपत को बढ़ाने में कठिनाई है। मौद्रिक नीति में ढील देने से मुद्रास्फीति और बढ़ सकती है। इसलिए बजट के माध्यम से इस दिशा में थोड़े प्रयास किए गए हैं। 

मसलन, मध्यवर्ग के करदाताओं को थोड़ी राहत दी गई है। सड़क, रेलवे, बंदरगाह, आदि क्षेत्र में सार्वजनिक खर्च बढ़ाने की घोषणा की गई है, इससे मांग में थोड़ी बढ़ोतरी होगी। यह भी उम्मीद की जा रही थी कि किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता योजना में बढ़ोतरी करने से मांग में तत्काल बढ़ोतरी हो। जबकि करदाताओं को जो राहत दी गई है, उससे तुरंत मांग में तात्कालिक बढ़ोतरी होने के आसार नहीं हैं। ऐसा लगता है कि दिल्ली में चुनाव के मद्देनजर मध्यवर्ग को लुभाने के लिए कर में राहत दी गई है।

इसके अलावा राजकोषीय घाटा के 3.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है, इससे भी सरकार को सार्वजनिक खर्च बढ़ाने में मदद मिलेगी। वित्त वर्ष 2020-21 में राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी रखने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में एक कठिनाई यह है कि अब भी लोगों को लग रहा है कि इसमें पारदर्शिता नहीं है। 

विश्लेषकों को शंका है कि वित्तीय घाटा 3.8 फीसदी रहने का जो अनुमान जाताया गया है, वह वास्तव में 3.8 फीसदी है या उससे ज्यादा होगा, क्योंकि पिछले वर्ष बजट से अलग सरकार की बहुत-सी देनदारियों को वित्तीय घाटे में नहीं जोड़ा गया था। अगर उन सबकों को वित्तीय घाटे में जोड़ लिया जाए, तो वित्तीय घाटा 3.8 फीसदी से कहीं अधिक हो जाएगा।

आयकर दायरे को बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई है, ताकि उसे सरल बनाया जाए और कर अनुपालन बढ़ाया जाए। आयकर में दी जाने वाली छूटों को धीरे-धीरे समाप्त करने के लिए एक रोडमैप दिया गया है। ये अच्छे प्रयास हैं। शेयर बाजार के लिए लोग उम्मीद कर रहे थे कि दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर टैक्स और डिविडेंड टैक्स में कुछ कमी होगी, वह सब नहीं हुआ। 

मुझे लगता है कि मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में ऐसा करना संभव नहीं था, इसलिए इन क्षेत्रों में कटौती नहीं की गई। डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को खत्म कर दिया गया, अब डिविडेंड जिसके हाथ में आएगा, उसे टैक्स देना पड़ेगा। डिविडेंड आय अब दूसरी आय के बराबर मानी जाएगी। यह एक बहुत अच्छा कदम है। इसके अलावा बॉन्ड बाजार को मजबूत के लिए जो घोषणाएं की गई हैं, वह भी सराहनीय कदम है। इससे कॉरपोरेट सेक्टर में फिनांसिंग हो पाएगी और शेयर बाजार में भी इसका अच्छा असर होगा।

सरकार पर यह दबाव था कि घरेलू उद्योगों को चीन से होने वाले आयात से प्रतिस्पर्धा करने के लिए कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर और ज्यादा संरक्षण दिया जाए, लेकिन कुछ उत्पादों को आम तौर पर सरकार ने कस्टम ड्यूटी आदि को नहीं बढ़ाया है, जो कि अच्छा कदम है, क्योंकि किसी भी विकासशील अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज्यादा संरक्षण देना निर्यात विरोधी माना जाता है, उससे निर्यात पर उल्टा असर पड़ता है। 

निर्यात बढ़ाने के लिए भी सरकार ने कई घोषणाएं की हैं, जो अच्छे परिणाम देंगे। टैक्स राजस्व बढ़ाने के लिए कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है, क्योंकि आज के हालात में यह संभव ही नहीं था। हां, टैक्स आधार का दायरा बढ़ाने की कोशिश जरूर की गई, ताकि सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हो। सरकार ने विनिवेश बढ़ाने पर भी थोड़ा जोर दिया है, जिससे बजट को संतुलित करने में सुविधा होगी।

जहां तक व्यय बजट का प्रश्न है, उसमें सबसे अधिक प्राथमिकता कृषि और किसानों की आय वृद्धि की योजनाओं को दी गई है। कई ऐसी योजनाओं की घोषणा की गई है, जिससे कृषि और किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद की जा सकती है। सौर ऊर्जा पर भी काफी जोर दिया गया है, उससे भी मांग बढ़ेगी। शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी जोर दिया गया है। 

रेलवे, हाई-वे, हवाई अड्डे, बंदरगाह आदि के क्षेत्र में बुनियादी ढांचों के निर्माण पर भी खर्च बढ़ाने की घोषणा की गई है। एक घोषणा जो मुझे बहुत अच्छी लगी, वह यह कि जितने बंदरगाह हैं, उसमें से एक को निगमीकृत करेंगे और उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध करेंगे। इसी प्रकार एलआईसी को सूचीबद्ध करने की बात कही गई है। इस प्रकार से कई छोटे-छोटे कदम के अलावा आर्थिक सुधार के संकेत दिए गए हैं, जिससे अर्थव्यवस्था की दक्षता बढ़ाने में बहुत मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों में तैयार इस बजट को संतुलित बनाने की कोशिश की गई है और वित्तीय घाटे में इसलिए थोड़ी ढील दी गई है, ताकि विकास को गति मिल सके। विकास दर में बढ़ोतरी होने पर ही रोजगार बढ़ेगा और मांग में बढ़ोतरी होगी। 

(लेखक पूर्व में वित्त सचिव रहे हैं।)

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