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Covid 19 in China: पहले जैसा नहीं रहेगा चीन का भविष्य, आर्थिक समस्याएं अब अपने चरम पर पहुंची
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दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेताओं के लिए यह अलग-अलग अनुभवों का वर्ष रहा। इस साल की शुरुआत में जो बाइडन को एक विफल राष्ट्रपति के तौर पर आंका गया था। ऐसा लगता था कि उनका विधायी एजेंडा रुक जाएगा और आर्थिक मुश्किलें उन्हें परेशान करेंगी। इसके बदले में वहां महंगाई पर अंकुश लगाने और जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए बने कानून से परिदृश्य बदल गया, मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बदहाली की आशंका गलत साबित हुई, और जब एकाधिक अर्थशास्त्री अब भी वहां मंदी की आशंका जता रहे हैं, तब बेरोजगारी की दर अब भी कम है और मुद्रास्फीति कम हो रही है।
इसके विपरीत, साल की शुरुआत में चीन के सर्वशक्तिमान नेता शी जिनपिंग कोविड पर अपनी कथित विजय पर शेखी बघार रहे थे। बल्कि कुछ समय तक तो विश्व स्तर पर यह धारणा बन गई थी कि कोविड के खिलाफ चीन ने शानदार प्रबंधन कर खुद को उभरती महाशक्ति के रूप में पेश किया है। अब अलबत्ता जिनपिंग को अचानक ही अपनी 'शून्य कोविड नीति' का परित्याग करना पड़ा है, जिसका नतीजा अस्पतालों में भारी भीड़ और मौत के बड़े आंकड़े के रूप में सामने है। अगले दो से तीन वर्षों तक चीन की अर्थव्यवस्था को भी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, और दीर्घावधि में चीन द्वारा बड़ी आर्थिक उपलब्धि हासिल करने की संभावना भी धूमिल हो गई है।
ऐसा लगता है कि चीन का भविष्य पहले जैसा नहीं रहने वाला। लेकिन क्यों? दरअसल कोविड को रोकने के लिए एकतरफा लंबे लॉकडाउन ने चीन की सर्वशक्तिमान सत्ता की असलियत बता दी है कि वह जनता से नहीं पूछती कि क्या करना चाहिए। 'शून्य कोविड नीति' से आगे की तैयारी और अपने लोगों के लिए दुनिया की सबसे प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध न करा पाने की शी की विफलता ने वस्तुतः अधिनायकवादी सरकारों की कमजोरी के बारे में भी बताया है, जिसमें कोई भी उसके नेता को उसकी गलती के बारे में नहीं बता सकता।
कोविड से चीन में भारी संख्या में मौतें तो तय ही है, लंबे समय से चली आ रही चीन की आर्थिक समस्याएं भी अब अपने चरम पर पहुंच गई हैं। चीन की आर्थिक उपलब्धि के लंबे इतिहास के बावजूद वर्षों से यह स्पष्ट था कि उसकी अर्थव्यवस्था असंतुलित है। चीन की आर्थिक वृद्धि का मामूली-सा हिस्सा आम लोगों तक पहुंचता है, नतीजतन वहां का उपभोक्ता खर्च बहुत कम है। निवेश की अत्यधिक ऊंची दर अब तक इस खाई को पाटती रही है। लेकिन सारे संकेत बताते हैं कि निवेश में अब कमी आ रही है और चीनी उद्योगपति नए उद्यमों में निवेश करने के इच्छुक नहीं हैं।
लेकिन चीन ने पूर्ण रोजगार की अपनी उपलब्धि को जारी रखा है, जो जाहिर है, विराट आवासन क्षेत्र की वृद्धि के बुलबुले को प्रोत्साहित करने से ही संभव हुआ है। चीन का रियल एस्टेट क्षेत्र निस्संदेह फूला हुआ है। एक आकलन के मुताबिक, चीन के जीडीपी में रियल एस्टेट क्षेत्र की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत है। चीनी रियल एस्टेट में मौजूदा निवेश अमेरिका में हाउसिंग सेक्टर में आए बुलबुले के दौरान हुए निवेश का दोगुना है।
जाहिर है, यह स्थिति लंबे समय तक नहीं रहने वाली। इस मामले में अर्थशास्त्री प्राय: अमेरिकी अर्थशास्त्री हरबर्ट स्टेन के नियम का हवाला देते हैं कि 'अगर कोई चीज हमेशा के लिए नहीं चल सकती, तो उसका रुकना तय है।' हालांकि यह तय नहीं है कि चीन में आर्थिक वृद्धि का यह बुलबुला कब फूटेगा-शायद वहां तेज मंदी आ सकती है, या फिर ऐसा भी हो सकता है कि आने वाले कई वर्षों तक चीन की आर्थिक विकास दर कम रहे, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था की वास्तविक समस्या सामने नहीं आएगी। लेकिन चीन को अपने आर्थिक मोर्चे पर जिस भी अनुभव से गुजरना पड़ेगा, वह सुखद तो नहीं ही होगा।
गोल्डमैन सैक्स ने पहले यह संभावना जताई थी कि वर्ष 2020 तक चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा। लेकिन अब उसका आकलन है कि 2035 में ही चीन इस ऊंचाई पर पहुंच सकेगा। जापान सेंटर फॉर इकनॉमिक रिसर्च ने पहले कहा था कि 2028 तक चीन वैश्विक महाशक्ति होगा, फिर उसने कहा कि ऐसा 2033 में होगा। अब उसका मानना है कि महाशक्ति बनने में चीन को कई दशक लग सकते हैं। बहुत से विश्लेषकों को संदेह है कि चीन कभी अमेरिका को पछाड़कर महाशक्ति बन भी पाएगा।
चीन के प्रति इस निराशा का एक कारण उसकी जनसांख्यिकी है। चीन की आबादी में कामकाजी लोगों की हिस्सेदारी 2015 से घट रही है। चीन की आर्थिक वृद्धि बरकरार रह सकती है, लेकिन नीतिगत गलतियों से साफ है कि वह 'मिड्ल इनकम ट्रैप' के दौर में जा रहा है। यह उस आर्थिक स्थिति को कहते हैं, जिसमें गरीब देश कुछ वर्षों तक ऊंची आर्थिक वृद्धि हासिल करते हैं, फिर विकसित देशों से पिछड़ जाते हैं।
लेकिन चीन की मौजूदा कमियों के बावजूद पिछले चार दशक में वहां के जीवन स्तर में जो आश्चर्यजनक ऊंचाई आई है, उसे कोई खारिज नहीं कर सकता। न ही कोई इस तथ्य से इनकार कर सकता है कि चीन एक आर्थिक महाशक्ति है। लेकिन लोग अगर यह उम्मीद कर रहे हों कि आर्थिक मोर्चे पर चीन की मजबूती जारी रहने वाली है, तो उन्हें थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। जैसा कि मैंने कहा कि चीन का भविष्य पहले जैसा नहीं रहने वाला।