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बीआरआई: छोटे देशों को अपने कर्ज के जाल में फंसाकर अपना दबदबा चाहता है चीन

रंजीत कुमार Updated Wed, 01 May 2019 04:24 AM IST
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग - फोटो : social media
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चीन को एशिया, अफ्रीका और यूरोप को ढांचागत निर्माण से जोड़ने वाली चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट ऐंड रोड योजना पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने एक बार फिर मुहर लगाई है। बेल्ट ऐंड रोड मंच (बीआरएफ) शिखर सम्मेलन में भारत ने भले ही संप्रभुता की चिंता बताकर हिस्सा नहीं लिया, लेकिन 25 से 27 अप्रैल तक बीजिंग में आयोजित इस सम्मेलन में 30 से अधिक देशों के राष्ट्रप्रमुखों ने भाग लिया जब कि सौ से अधिक देशों ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों के शिष्टमंडल भेजे। पूरी पृथ्वी पर चीन का दबदबा स्थापित करने वाली चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस ध्वजवाहक परियोजना को सफल बनाने के लिए न केवल चीनी अधिकारियों ने एड़ी-चोटी एक कर दी, बल्कि चीनी राष्ट्रपति ने भी अपने संबोधन में चीन का रवैया बदलने का पूरा संकेत दिया।
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इस ढांचागत निर्माण परियोजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने चीन की हाल के सालों में घोर आलोचना इस आधार पर की थी कि इसके जरिये चीन छोटे देशों को अपने कर्ज के जाल में फंसा कर वहां अपना सामरिक- आर्थिक दबदबा स्थापित करना चाह रहा है। लेकिन चीन ने इन परियोजनाओं में पारदर्शिता लाने और कर्जों को लेकर अधिक जिम्मेदारी निभाने का वादा किया है। चीन ने पहली बार संप्रभुता के मसले पर भी भारत जैसे देशों द्वारा जाहिर चिताओं को दूर करने की कोशिश की है।

बेल्ट ऐंड रोड के बहाने बाकी दुनिया पर अपना दबदबा स्थापित करने को लेकर भारत के अलावा यूरोपीय देशों ने भी अपनी चिंता जाहिर की है। पिछली बार 2017 में बेल्ट ऐंड रोड शिखर सम्मेलन में अमेरिका ने एक निम्न स्तर का आधिकारिक शिष्टमंडल भेजा था। लेकिन इस बार सम्मेलन में भारत की तरह अमेरिका ने भी अपना कोई आधिकारिक प्रतिनिधि नहीं भेजा, लेकिन चीन सात अमीर देशों के संगठन जी-7 में से एक इटली को तोड़ने में कामयाब रहा और इसके प्रधानमंत्री शिखर सम्मेलन में मौजूद रहे। इसके अलावा रूसी राष्ट्रपति और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का भी वहां मौजूद रहना स्वाभाविक था। बेल्ट एेंड रोड पहल की आलोचना के बावजूद जर्मनी  और फ्रांस ने अपने मंत्रियों की अगुवाई में वहां शिष्टमंडल भेजा। अमेरिका के साझेदार ब्रिटेन ने भी अपना एक उच्चस्तरीय शिष्टम़डल वहां भेजा।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीन के ऊपर लग रहे आरोपों को दूर करने की कोशिश की और कहा कि बीआरआई के प्रोजेक्ट केवल दो देशों के समझौतों के आधार पर ही नहीं बल्कि बहुपक्षीय भी होंगे। अरबों डॉलर के निवेश वाले इसके प्रोजेक्ट में अब गैर चीनी कंपनियां भी भाग ले सकेंगी और उन्हें गैर चीनी बैंकों से भी कर्ज लेने की छूट होगी। अब तक यह कहा जाता था कि चीनी बैंक कड़ी शर्तों पर छोटे देशों को कर्ज देकर उन्हें अपने जाल में फंसा लेते थे। अब तक चीन के इस रवैये के बावजूद चीन को यूरोप, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने वाली दस खरब डॉलर की यह महत्वाकांक्षी परियोजना कई देशों को लुभा रही है।

चीन की इस पहल से भारत को सबक लेना चाहिए और कम से कम अपने पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ढांचागत विकास के प्रोजेक्ट उनके सहयोग से शुरू करने चाहिए। चीन जिस राष्ट्रीय संकल्प के साथ बेल्ट एेंड रोड पहल को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, उससे यह साफ है कि चीन अपने को दुनिया के देशों के साथ सड़क, रेल और समुद्री परिवहन के जरिये कुछ सालों के भीतर जोड़ लेगा, जिसका दोतरफा फायदा चीन को मिलेगा।
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