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नौकरशाही का बदलता चेहरा

Mon, 22 Apr 2019 07:13 PM IST
जयंतीलाल भंडारी जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी Published by: जयंतीलाल भंडारी Updated Mon, 22 Apr 2019 07:13 PM IST
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Changing face of bureaucracy
जयंतीलाल भंडारी

हाल ही में देश में पहली बार संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के द्वारा चयनित नौ विभिन्न असाधारण योग्यता वाले अनुभवी पेशेवर विशेषज्ञों को केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में संयुक्त सचिव के पदों पर सीधी नियुक्ति दी गई है। पेशेवर योग्यताओं के चलते नियुक्ति पाने वाले संयुक्त सचिवों को नागर विमानन, कृषि, वित्त, नौवहन के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन जैसे मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई है। इसे 'लैटरल एंट्री' कहा जाता है। अभी इन पदों पर सिविल सर्विसेस से आईएएस बने अधिकारी करीब 25 साल की सेवा के बाद पहुंच पाते हैं। संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्ति का कार्यकाल तीन साल का होगा और अच्छा प्रदर्शन होने पर इसे पांच साल तक किया जा सकेगा।


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नौकरशाही में 'लैटरल एंट्री' का पहला प्रस्ताव 2005 में आया था। प्रशासनिक सुधार पर पहली रिपोर्ट में इसकी अनुशंसा की गई थी। तब इसे खारिज कर दिया गया था। 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई। 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने इस पर आगे बढ़ने की अनुशंसा की। जुलाई 2017 में केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश जारी किया था। तब कहा गया था कि नौकरशाही में लैटरल एंट्री से पेशेवर प्रतिभाओं और मध्यम स्तर के अधिकारियों की कमी को दूर किया जा सकेगा।

यह महत्वपूर्ण है कि निजी क्षेत्र के पेशेवरों को सरकारी क्षेत्र में लेने के इस नए अभियान का उद्देश्य है, विभिन्न असाधारण योग्यता वाले अनुभवी पेशेवरों को उनकी प्रतिभा और क्षमता के हिसाब से प्रशासन व देश के विकास में योगदान देने का मौका सुनिश्चित करना। बड़ी तादाद में विभिन्न क्षेत्रों से सरकार के साथ काम करने के लिए विशेषज्ञों और पेशेवरों के आवेदन आए थे।

मोदी सरकार के पहले भी विभिन्न प्रधानमंत्रियों द्वारा कुछ प्रतिभाओं और पेशेवरों को सरकार के कार्यों में सहयोग के लिए जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में नंदन नीलेकणी को लाया गया और उन्हें आधार के लिए अधिकार दिए गए। इंदिरा गांधी भी नियमित रूप से कारोबारी जगत की प्रतिभाओं को बेहतर उपयोग में लाती रहीं। दूरसंचार में क्रांति के लिए राजीव गांधी सैम पित्रोदा को लेकर आए। अटल बिहारी वाजपेयी ने आर.वी. शाही को बिजली सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका दी थी। वी.पी. सिंह ने अरुण सिंह को जिम्मेदारी देकर देश के रक्षा संगठन का आधुनिकीकरण करने के कदम उठाए। नरसिंह राव मनमोहन सिंह को लेकर आए और उन्हें सीधे वित्त मंत्री बना दिया। मनमोहन सिंह के वित्त सचिव मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।

यद्यपि सरकारी तंत्र में निजी क्षेत्र के पेशेवरों और क्षमतावान विशेषज्ञों की संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्तियां लाभप्रद दिखाई दे रही हैं, पर इसके सामने कई चुनौतियां भी होंगी। इनमें से प्रमुख चुनौती नियुक्त विशेषज्ञों की गुणवत्ता संबंधी है। पेशेवर विशेषज्ञों को एक खास शैक्षणिक मानक पूरा करना होता है और जिन लोगों को चुना जाता है, उन्हें संघ लोक सेवा आयोग के साक्षात्कार से गुजरना होता है। उनके लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं होती है। चूंकि संयुक्त सचिव पदों पर लैटरल एंट्री पहली बार हुई है, अतः अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह बाहरी विशेषज्ञों की नियुक्ति का सर्वश्रेष्ठ तरीका है या नहीं। दूसरी चुनौती यह है कि शुरुआत से ही विभिन्न संयुक्त सचिवों की नियुक्ति विवादों में आ गई है। ऐसे में यह देखना होगा कि सरकार इनकी विशेषज्ञताओं का कितना लाभ ले सकती है।

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