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आम लोगों के सपनों का बजट

Fri, 01 Feb 2019 08:59 PM IST
mohandas pai मोहनदास
Updated Fri, 01 Feb 2019 08:59 PM IST
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Budget for Dream of common people
रुपये

मौजूदा सरकार का यह आखिरी बजट स्वप्न बजट रहा है। एनडीए पांच साल पहले एक स्वच्छ सरकार, सुशासन, रोजगार सृजन के वायदे और सभी भारतीय नागरिकों को जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के प्रावधान के साथ सत्ता में आया था। इनमें से प्रत्येक वायदे को काफी हद तक पूरा किया गया है।


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वर्ष 2013-14 में हम दुनिया की ग्यारहवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थे, लेकिन आज हम छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं। जीएसटी में दक्षता लाई गई है और हर महीने कर संग्रह हो रहा है। भारत ने सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों की कवरेज और गुणवत्ता में पर्याप्त सुधार के साथ बुनियादी ढांचे के विकास में एक उल्लेखनीय परिवर्तन किया गया है।

राजकोषीय स्थिति काफी नियंत्रण में है और 2018-19 के लिए राजकोषीय घाटा 3.4 फीसदी है। हालांकि यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पीएम-किसान योजना (वर्ष 2018-19 के लिए 20,000 करोड़ रुपये और 2019-20 के लिए 75,000 करोड़ रुपये) के योजनागत आवंटन को छोड़कर इस वर्ष के लिए लक्षित राजकोषीय घाटा 3.4 फीसदी और अगले वर्ष के लिए 3.1 फीसदी रहेगा। एनडीए द्वारा खर्च की गुणवत्ता पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है और निहित स्वार्थों के कारण फैलाई गई आशंकाएं निराधार साबित हुई हैं।

समाज के अधिकांश वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए इस बजट को अच्छी तरह से तैयार किया गया है। बारह करोड़ छोटे और मंझोले कृषक परिवारों को 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष वार्षिक आय प्रदान की गई है। असंगठित क्षेत्र के 42 करोड़ श्रमिक 3,000 रुपये मासिक पेंशन की नई योजना से लाभान्वित होंगे। पिछले वर्ष शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना 50 करोड़ लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएगी। रक्षा क्षेत्र को भी काफी तवज्जो दी गई है। पांच लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले मध्य वर्ग को कर से छूट दी गई है। वेतनभोगी वर्ग को 50,000 रुपये तक स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा प्रदान की गई है। ये सारे उपाय भारत के लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप हैं।

लेकिन जहां सबके लिए इस बजट में खुश होने की वजह है, वहीं स्टार्टअप उद्यमियों को खंड 56(2)(viib) के तहत कुख्यात एंजल टैक्स पर राहत नहीं मिली है। स्टार्टअप कारोबार के विस्तार के लिए पैसे जुटाते हैं। इसके एवज में पैसे देने वाली कंपनी या संस्था को वे शेयर जारी करते हैं, जो वाजिब कीमत के मुकाबले अक्सर ज्यादा कीमत पर जारी किए जाते हैं। शेयर की अतिरिक्त कीमत को आय माना जाता है। इस आय पर लगने वाले कर को एंजल टैक्स कहा जाता है। स्टार्ट-अप इंडिया के पक्ष में सबसे बड़ी बाधा के निवारण के लिए सरकार के पास यह एक सुनहरा मौका था। उम्मीद करनी चाहिए कि देर-सबेर सरकार इस पर विचार करेगी।

करोड़ों नए मध्यवर्गीय लोग पहली बार व्यवस्थित निवेश योजना में शामिल हुए हैं, लेकिन अब तक उनकी कोई बड़ी प्रशंसा देखने में नहीं आई है। उन पर पूंजीगत लाभ कर थोपना जल्दबाजी थी और इसलिए व्यापक रूप से उम्मीद की जा रही थी कि उसे खत्म किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने से कुछ निराशा पैदा हुई है।

सरकार के लिए अंतरिम बजट होने के बावजूद इसमें पूर्ण बजट की दूरदर्शिता है। कुछ लोग चुनावी बजट कहकर इकी आलोचना करते हैं, जो निस्संदेह चुनावी है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी मई में होने वाले चुनाव के लिए कमर कस रही है। लेकिन कुल मिलाकर यह आम आदमी-किसानों, मध्य वर्ग और कमजोर तबकों के लिए एक अच्छा बजट है।

-लेखक एरियन कैपिटल के चेयरमैन हैं।

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