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तनाव, चिंता और भावनाएं: आपका दिमाग कैसे संभालता है शरीर का बजट
Sun, 08 Feb 2026 06:40 AM IST
देवेश त्रिपाठी
लिसा फेल्डमैन बैरेट, द न्यूयॉर्क टाइम्स
लिसा फेल्डमैन बैरेट, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 08 Feb 2026 06:40 AM IST
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सार
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शरीर का बजट
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अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
पचास करोड़ साल पहले, एक छोटे-से समुद्री जीव ने इतिहास का रुख बदल दिया-वह पहला शिकारी बन गया। उसने किसी तरह पास में मौजूद दूसरे जीव की मौजूदगी को महसूस किया, उसकी तरफ बढ़ा या रेंगता हुआ गया, और उसे खा लिया। शिकार की इस नई गतिविधि ने एक विकासवादी होड़ शुरू कर दी। तबसे लाखों वर्षों में, शिकारी और शिकार, दोनों के शरीर ज्यादा जटिल हो गए, जो दूसरे जीवों को पकड़ने या उनसे बचने के लिए ज्यादा असरदार तरीके अपना सकते थे और हिल-डुल सकते थे। आखिरकार, कुछ जीवों ने उन जटिल शरीरों के संचालन के लिए एक नियंत्रण केंद्र विकसित कर लिया, जिसे हम दिमाग यानी मस्तिष्क कहते हैं। दिमाग के विकसित होने से संबंधित यह कहानी महज एक अंदाजा है, लेकिन यह मनुष्यों के बारे में एक महत्वपूर्ण बात की तरफ ध्यान दिलाती है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। आपके दिमाग का सबसे जरूरी काम सोचना नहीं है; बल्कि आपके शरीर की प्रणाली को संचालित कर आपको जिंदा और स्वस्थ रखना है।तंत्रिका विज्ञान (न्यूरोसाइंस) की ताजा खोजों के अनुसार, आपका दिमाग आपकी सोच से भी अधिक सचेत विचार और भावनाओं को पैदा करता है, जो संख्या में आपके शरीर को प्रबंधित करने की जरूरतों को पूरा करने से बहुत अधिक होती हैं। जिंदगी के तनाव भरे और चुनौतीपूर्ण समय में, आपकी मानसिक जिंदगी पर यह जिज्ञासु नजरिया असल में आपकी चिंताओं को कम करने में मदद कर सकता है। आपके दिमाग की ज्यादातर गतिविधियां आपकी जानकारी के बिना होती हंै। हर पल, आपके दिमाग को अगले पल के लिए आपकी शारीरिक जरूरतों का पता लगाना होता है और उन जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले से ही एक योजना बनानी होती है। उदाहरण के लिए, हर सुबह जब आप जागते हैं, तो आपका दिमाग उस ऊर्जा का अंदाजा लगाता है, जिसकी जरूरत आपको अपने शरीर को बिस्तर से बाहर निकालने और अपना दिन शुरू करने के लिए होगी। यह आपके रक्त की धारा में कोर्टिसोल हार्मोन को तेजी से भेजता है, जो ऊर्जा के लिए शीघ्र ग्लूकोज उपलब्ध कराने में मदद करता है।
आपका दिमाग बजट की तरह कुछ चीजों का इस्तेमाल करके आपके शरीर को चलाता है। जिस तरह वित्तीय बजट में आय और व्यय पर नजर रखी जाती है, उसी तरह आपके शरीर का बजट पानी, नमक और ग्लूकोज जैसे संसाधनों पर नजर रखता है, तथा आप उन्हें पाते और खोते हैं। हर काम, जिसमें ऊर्जा खर्च होती है, जैसे खड़े होना, दौड़ना और सीखना, वह आपके खाते से पैसे निकालने जैसा है। जिन कार्यों से आपकी ऊर्जा वापस आती है, जैसे खाना और सोना, वे खाते में पैसे जमा करने की तरह हैं। शारीरिक बजट (बॉडी बजटिंग) का वैज्ञानिक नाम एलोस्टेसिस है।
इसका मतलब है शरीर की जरूरतों के पैदा होने से पहले ही उनका अंदाजा लगाना और उन्हें पूरा करने के लिए तैयार रहना। जरा सोचिए, जब आपको प्यास लगती है और आप एक गिलास पानी पीते हैं, तो क्या होता है। पानी को आपके रक्त की धारा तक पहुंचने में लगभग 20 मिनट लगते हैं, लेकिन कुछ ही सेकंड में आपकी प्यास बुझने लगती है। आखिर आपकी प्यास इतनी जल्दी कैसे बुझ जाती है? इसके पीछे आपका दिमाग काम करता है। उसने पिछले अनुभव से सीखा है कि पानी आपके शरीर के बजट के लिए जमा-पूंजी है, जो आपको हाइड्रेट करेगा, इसलिए पानी का आपके खून पर सीधा असर होने से बहुत पहले ही आपका दिमाग आपकी प्यास बुझा देता है। आपके शारीरिक कामों के मामले में दिमाग के काम करने का यह बजट वाला तरीका सही लग सकता है। लेकिन अपनी मानसिक जिंदगी को जमा और निकासी की एक शृंखला के तौर पर देखना शायद उतना स्वाभाविक न लगे। लेकिन आपका अपना अनुभव शायद ही कभी आपके दिमाग की अंदरूनी कार्यप्रणाली का मार्गदर्शक होता है। आपके मन में आने वाला हर विचार, खुशी, गुस्सा या हैरानी की हर भावना, जो आप महसूस करते हैं, आपकी हर अच्छाई और हर अपमान, जो आप सहते या करते हैं, ये सब आपके दिमागी हिसाब-किताब का हिस्सा हैं, क्योंकि यह आपकी मेटाबॉलिक (चयापचयी) जरूरतों का अंदाजा लगाता है और उनके लिए बजट बनाता है।
इन्सानों की समझ के लिए दिमाग के नजरिये के कई मायने हैं। उदाहरण के लिए, हम अक्सर खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से अलग समझते हैं। भारी या काफी खाना खा लेने के बाद जब हमें पेट दर्द की समस्या होती है, तो हम उदरविकास चिकित्सक (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) के पास जाते हैं, लेकिन जब हमें मुश्किल तलाक के दौरान वही दर्द होता है, तो हम शायद मनोचिकित्सक (साइकोथेरेपिस्ट) के पास जाएंगे। उदरविकास चिकित्सक के क्लिनिक में, हम अपनी परेशानी को एक अंदरूनी शारीरिक समस्या के तौर पर महसूस करते हैं; वहीं मनोचिकित्सक के क्लिनिक में, हम उसी परेशानी को एंग्जायटी यानी एक मनोवैज्ञानिक गड़बड़ी के तौर पर महसूस करते हैं, जो शारीरिक रूप से सामने आती है।
मगर बॉडी-बजटिंग के मामले में, मानसिक और शारीरिक समस्या के बीच यह अंतर ज्यादा मायने नहीं रखता। एंग्जायटी से पेट दर्द नहीं होता; बल्कि, एंग्जायटी और पेट दर्द, दोनों ही ऐसे तरीके हैं, जिनसे इन्सान का दिमाग शारीरिक परेशानी को समझता है। पूर्णतः मानसिक कारण जैसी कोई चीज नहीं होती, क्योंकि हर मानसिक अनुभव की जड़ें आपके शरीर की भौतिक बनावट में होती हैं। यही कारण है कि गहरी सांस लेने या भरपूर नींद लेने जैसे शारीरिक कार्य उन समस्याओं को सुलझाने में आश्चर्यजनक ढंग से मददगार हो सकते हैं, जिन्हें हम आम तौर पर मनोवैज्ञानिक मानते हैं।
हम सभी के जीवन में चुनौतीपूर्ण समय आते ही रहते हैं और हम सभी को अपने शारीरिक बजट के बिगड़ने का बहुत ज्यादा खतरा रहता है। यदि आप इन चुनौतियों से थक गए हैं और प्रेरणा की कमी से जूझ रहे हैं, तो अपनी स्थिति को बॉडी-बजटिंग के नजरिये से देखें। अगर आप अपनी परेशानी को शारीरिक तौर पर समझेंगे, तो आपका बोझ हल्का महसूस हो सकता है। जब आपके मन में कोई अप्रिय विचार आता है, जैसे 'मैं अब यह पागलपन और बर्दाश्त नहीं कर सकता,' तो खुद से बॉडी-बजटिंग वाले सवाल पूछें। मसलन, 'क्या मुझे कल रात पर्याप्त नींद मिली? क्या मेरे शरीर में पानी की कमी है? क्या मुझे टहलने जाना चाहिए? किसी दोस्त को फोन करना चाहिए? क्योंकि मुझे अपने बॉडी बजट में एक या दो चीजें जमा करने की जरूरत है।'
यह कोई शब्दों का खेल नहीं है। यह आपकी शारीरिक संवेदनाओं से नया मतलब निकालकर अपने कार्यों को निर्देशित करने के बारे में है। कहने का आशय यह नहीं है कि आप चुटकी बजाकर गहरे दुख को खत्म कर सकते हैं, या नजरिये में बदलाव करके अपने अवसाद को दूर कर सकते हैं। कहने का तात्पर्य केवल इतना है कि यह जानना बिल्कुल संभव है कि आपका दिमाग असल में क्या कर रहा है और उससे कुछ आराम मिल सकता है या नहीं। दरअसल आपका दिमाग सोचने के लिए नहीं है। दिमाग जो कुछ भी पैदा करता है, विचारों से लेकर भावनाओं और सपनों तक, वह सब शारीरिक बजट के लिए होता है। यदि इस नजरिये को आप समझदारी से अपनाएंगे, तो किसी भी चुनौतीपूर्ण समय में यह मजबूती का स्रोत बन सकता है।