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खुद खबर बन गए

Fri, 22 Mar 2013 09:28 PM IST
रमण कुमार सिंह
रमण कुमार सिंह Updated Fri, 22 Mar 2013 09:28 PM IST
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bobby ghosh named editor of time international

कॉलेज से निकलकर सीधे पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने वाला दक्षिण भारत के एक छोटे से अखबार का पत्रकार एक दिन टाइम जैसी मशहूर पत्रिका का इंटरनेशनल एडिटर बन जाएगा, यह शायद उसने भी नहीं सोचा होगा।

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लेकिन काम के प्रति उसकी निष्ठा ही थी कि वह टाइम के अस्सी वर्षों के इतिहास में पहला गैर अमेरिकी संपादक है। जी हां, भारत के तेजस्वी पत्रकार बॉबी घोष न सिर्फ इस शिखर पर पहुंचे हैं, बल्कि टाइम को नई ऊंचाई तक पहुंचाने की चुनौती भी उन्होंने स्वीकारी है।
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बॉबी ने डेक्कन क्रॉनिकल से करियर की शुरुआत कर आज वह मुकाम हासिल किया है, जो किसी भी पत्रकार का सपना हो सकता है। व्यक्तिगत जीवन में बेहद सरल बॉबी घोष ने भारत में दस वर्षों तक कोलकाता, दिल्ली और मुंबई में पत्रकारिता की। फिर 1995 में वह दो वर्षों के लिए हांगकांग में फॉर ईस्टर्न इकोनॉमिक रिव्यू से जुड़े रहे।
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उसके बाद वह 1998 में टाइम से जुड़े। टाइम एशिया से सीनियर एडिटर के रूप में जुड़ने के साथ ही उन्होंने टाइम डॉट कॉम में सब-कांटिनेंटल ड्रिफ्ट नामक कॉलम लिखना शुरू किया। और फिर 2007 में वह लंदन चले गए, जहां टाइम यूरोप के लिए काम करना शुरू किया। वहां उन्होंने टाइम्स ग्लोबल एडवाइजर नामक यात्रा परिशिष्ट की शुरुआत की और यूरोपीय सामाजिक प्रवृत्तियों तथा मध्य-पूर्व की राजनीति पर लिखा।

फिर इराक-अमेरिका के युद्ध के समय वह बगदाद में करीब पांच वर्षों तक टाइम के ब्यूरो चीफ रहे, जहां उन्होंने लाइफ इन हेल (नरक में जिंदगी) एवं शिया बनाम सुन्नी जैसी अद्भुत कवर स्टोरी कीं। वहां उन्होंने न केवल खुद पूरी निर्भीकता से साथ अपने पत्रकारीय कर्तव्यों को निभाया, बल्कि बगदाद ब्यूरो में काम करने वाले तमाम सहयोगियों के अभिभावक बनकर रहे।


उन्होंने फिदायीन आतंकियों के साथ-साथ राजनीतिक हस्तियों के ऊपर भी काफी लिखा। बगदाद ही नहीं, फलस्तीन एवं कश्मीर जैसे अशांत इलाकों से भी उन्होंने रिपोर्टिंग की है। उनकी दिलचस्पी की व्यापकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खेल जगत के लियो मेस्सी से लेकर बॉलीवुड सितारे आमिर खान और मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी जैसी हस्तियों तक पर बेबाकी से उन्होंने कलम चलाई है। तमाम उम्र चुनौतियों से जूझने वाले बॉबी के लिए टाइम को सफलता के नए शिखर पर ले जाना एक बड़ी चुनौती होगा।

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