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काला धन कैसे आ पाएगा

Mon, 23 Mar 2015 02:26 AM IST
तवलीन सिंह
तवलीन सिंह Updated Mon, 23 Mar 2015 02:26 AM IST
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black money tavleen singh.

जब काले धन को वापस लाने की बातें राजनेता करते हैं, तब मुझे समझ में नहीं आता कि मैं हंसूं या रोऊं। ऐसा इसलिए, क्योंकि सबसे ज्यादा काला धन किसी के पास है, तो वे राजनेता ही हैं। लेकिन प्रायः राजनेताओं के घरों में आयकर विभाग के छापे नहीं पड़ते। इन पर शिकंजा तब कसता है, जब ये लोग कोई ऐसी हरकत करते हैं, जिससे प्रधानमंत्री या वित्त मंत्री को गुस्सा आ जाए। तब जाकर मिलता है इनके घरों में, काले धन का भंडार।

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कुछ वर्ष पहले लंदन में मैं तब थी, जिस समय दुनिया की सबसे महंगी इमारत वहां बन रही थी। यह इमारत रिहायशी है, और इसका नाम है, वन हाइड पार्क। इसकी एक फ्लैट उस वक्त 1,400 करोड़ रुपये की बिकी थी। यानी उस दाम पर, जिस दाम में भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी ने मुंबई में एंटीला नाम की अपनी रिहायशी इमारत बनाई है। लंदन में यह खूब चर्चा थी कि भारतीय उद्योगपतियों और राजनेताओं ने इस इमारत में फ्लैट खरीदे हैं। मैंने मालूम करने की जब कोशिश की, तो पता लगा कि जितनी भी खोजी पत्रकारिता की जाए, भारतीय खरीदारों के नाम नहीं मालूम होंगे, क्योंकि इस बिल्डिंग के तकरीबन जितने भी अपार्टमेंट हैं, वे बेनामी खरीदे गए थे।
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क्या यह 'काला धन' वापस लाया जा सकता है? कतई नहीं। इसी तरह उन जगहों पर छिपाकर रखा हुआ है काला धन, जिनको अंग्रेजी में 'टैक्स हैवन' कहते हैं। यानी वे जगहें, जहां टैक्स चोरों को बेझिझक शरण दी जाती है, क्योंकि वहां की अर्थव्यवस्था इस शरण देने के भरोसे ही चलती हैं। कहने का मतलब यह है कि संसद में चाहे जितने भी कानून पारित हो जाएं, जो काला धन बाहर गया है, वह वापस नहीं लाया जा सकेगा, क्योंकि वह ज्यादातर जमीन-जायदाद में तब्दील हो चुका है।
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लिहाजा जब राजनेता का ही काला धन विदेशों में छिपाकर रखा गया है, तो आखिर क्यों वे इसे वापस लाने का काम करेंगे? यानी ढोंग है यह कानून, जिसे मोदी सरकार सिर्फ इसलिए पारित करने की कोशिश कर रही है, क्योंकि बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर जैसे आध्यात्मिक गुरु दबाव डाल रहे हैं। धर्मगुरुओं को धर्म-अध्यात्म की जितनी समझ होती है, आर्थिक मुद्दे वे उतना ही कम जानते हैं। इसलिए वे दबाव डाल रहे हैं ताकि अपने समर्थकों को कह सकें कि नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार हटाने की जी-जान से कोशिश कर रहे हैं।


बाबा रामदेव कई बार कह चुके हैं कि भारत का काला धन अगर विदेशों से वापस लाया जाए, तो हरेक भारतीय नागरिक करोड़पति बन जाएगा, एक रुपये की कीमत सौ डॉलर के बराबर हो जाएगी। ऐसा कहते हुए वह भूलते हैं कि मुद्रा बाजार में रुपये की कीमत तभी बढ़ेगी, जब भारत एक आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरेगा। भारत आर्थिक महाशक्ति कैसे बनेगा, जब हमारे शासक ही उलझे रहेंगे उन चीजों में, जो वे जानते हैं कि बेमतलब है। काला धन को रोकने के बदले अगर नरेंद्र मोदी सही आर्थिक नीतियां बनाकर श्वेत धन पैदा करने पर ध्यान देते हैं, तो देश का ज्यादा भला होगा। लेकिन चुनाव अभियान के जोश में वे पंद्रह लाख रुपये वाली वह बात कह गए थे, जिसे अब 'चुनावी जुमला' कहा जा रहा है। सो अब फंस गए हैं मोदी काला धन वापस लाने के मायाजाल में। इसलिए शायद कानून बन भी जाएगा, लेकिन काला धन वापस लाने की कोशिशों में सिर्फ यही होगा कि आयकर विभाग के छापामार खुद काले धन से अमीर हो जाएंगे।

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