भाजपा की नजर अब दक्षिण पर : यही वजह है कि द्रमुक रजनीकांत को भाजपा की बी टीम बताती है
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दक्षिण भारत के एक दिन के दौरे ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इन दिनों लगभग पूरे दक्षिण भारत में बाढ़ का प्रकोप जारी है। ऐसे में शाह ने कर्नाटक के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया, लेकिन इससे केरल में असंतोष बढ़ गया है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दक्षिण भारत के एक दिन के दौरे ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इन दिनों लगभग पूरे दक्षिण भारत में बाढ़ का प्रकोप जारी है। ऐसे में शाह ने कर्नाटक के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया, लेकिन इससे केरल में असंतोष बढ़ गया है।
वहां राज्य में सत्तारूढ़ माकपा ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय गृह मंत्री ने जानबूझकर हवाई सर्वे के दौरान केरल को नजरंदाज किया। शाह ने रविवार को कर्नाटक और महाराष्ट्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे किया था। हालांकि इन दो राज्यों के अलावा केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना भी बाढ़ और बारिश से प्रभावित हैं।
वास्तव में एनडीए सरकार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के रूप में दो नए सहयोगी मिले हैं, जिनकी पार्टियों ने संसद में अहम बिलों पर उसका समर्थन किया है। चंद्रेशखर राव ममता बनर्जी और एम. के. स्टालिन के साथ तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद के विफल होने के बाद से भाजपा के करीब जाना चाहते हैं। कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के पतन और बी. एस. येदियुरप्पा के उभार से भाजपा उत्साह में है।
पुड्डुचेरी जैसे छोटे से राज्य में कांग्रेस की सरकार है। ऐसा लगता है मानो, नरेंद्र मोदी ने दक्षिण भारत को कांग्रेस मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब जरा तमिलनाडु की राजनीति पर ध्यान केंद्रित करें। तमिलनाडु में तीन बड़े घटनाक्रम हुए हैं, जहां भाजपा और कांग्रेस जीत का दावा नहीं कर सकतीं।
पहला, रजनीकांत ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाए जाने के बाद अमित शाह की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कृष्ण और अमित शाह को अर्जुन बताया है। यह तमिलनाडु में भाजपा के लिए एक बड़ी उत्साहजनक खबर है। आध्यात्मिक राजनीति करने वाले रजनीकांत बहुत से हिंदू वोटों को आकर्षित करेंगे और भाजपा इसका फायदा उठाएगी।
उन्होंने शाह और मोदी की जोड़ी की प्रशंसा करते हुए कृष्ण और अर्जुन वाला बयान दिया। रजनीकांत की इन आध्यात्मिक टिप्पणियों का तालियों की गर्जना के साथ स्वागत किया गया। क्या यह हिंदुत्व सोच के प्रति रजनीकांत का खुला समर्थन नहीं है? इस कार्यक्रम से एक दिन पहले द्रमुक ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाए जाने की निंदा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की थी। इसकी वजह यह है कि 1989 में अपने अपहरण और रिहाई के बाद पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती की बेटी सुरक्षा कारणों से चेन्नई में रह रही थीं।
द्रमुक नेता पीडीपी के समर्थक हैं। तमिल मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि द्रमुक -पीडीपी के नेता के राजनीतिक गठबंधन के अलावा अन्य व्यापारिक संबंध भी रहे हैं। अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने का रजनीकांत द्वारा खुला समर्थन करने की बात तमिलनाडु के गांव-गांव तक फैल गई है। यही वजह है कि द्रमुक रजनीकांत को भाजपा की बी टीम बताती है।
दूसरा, कांचीपुरम में हिंदू समर्थक भावना का समेकन देखा गया, जहां एक करोड़ श्रद्धालुओं ने अति वरदार की पूजा अर्चना की। वहां देवता चालीस साल में एक बार कुएं से बाहर आते हैं। हिंदुओं द्वारा अति वरदार देवता के प्रति इस कदर आस्था देखकर द्रविड़ नेता परेशान हो गए। यह निश्चित रूप से आस्तिक लोगों की एकजुटता है, जो हिंदुत्व और भाजपा के समर्थक हैं।
एम. के स्टालिन के बेटे को भविष्य का द्रमुक नेता बनाने के बारे में बहुत ज्यादा कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन कम अंतर से जीत के कारण इसे झटका लगा है। अन्नाद्रमुक के कार्यकर्ता इस बात को लेकर काफी खुश हैं कि उन्होंने द्रमुक को कड़ी टक्कर दी। उधर, कर्नाटक में बी. एस. येदियुरप्पा के लिए राजनीतिक समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्हें मंत्रिमंडल का गठन करना होगा। अब से उनका प्रमुख काल शुरू होता है।
कांग्रेस बंटी हुई है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के अलग होने के बाद कांग्रेस में येदियुरप्पा के सामने टिकने की क्षमता नहीं है। संघ और भाजपा निश्चित रूप से कर्नाटक में बढ़त बनाएगी। अमित शाह द्वारा कर्नाटक के बाढ़ प्रभावित इलाकों में निर्मला सीतारमण को भेजे जाने से स्पष्ट है कि केंद्र येदियुरप्पा की मदद कर रहा है।
अखिल भारतीय परिप्रेक्ष्य से देखें, तो दक्षिण भारत की राजनीति (जो एक छोटा सा इंद्रधनुष है, क्योंकि सभी छह राज्यों में अलग-अलग पार्टियों की सरकार है) एक तरह से भाजपा की मदद कर रही है। अमित शाह की नजर अब दक्षिण भारत पर होगी, जो 2024 के चुनाव में तमिलनाडु और केरल से लोकसभा की 20 सीटें जीतना चाहते हैं।
राज्यसभा में जब अनुच्छेद 370, तीन तलाक और सूचना का अधिकार कानून से संबंधित संशोधन को पारित कराने के लिए केंद्र सरकार के पास संख्या बल की कमी थी, तो तीन दक्षिण भारतीय पार्टियां नरेंद्र मोदी के समर्थन में आगे आईं। इस तरह अमित शाह की फूट डालो और राज करो की नीति ने देश की सबसे पुरानी पार्टी को अप्रासंगिक बना दिया। दक्षिण भारत में कांग्रेस का पतन हो गया। तमिलनाडु में कांग्रेस 60 वर्षों से सत्ता से बाहर है।
इसके अलावा इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शासन चलाने के लिए वित्त की खातिर नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी पर निर्भर रहना होगा। चाहे आप जिस भी पक्ष में हों, अमित शाह का समीकरण दक्षिण भारत में भाजपा के लिए सकारात्मक रहा है। केरल और तमिलनाडु की राजनीति को अगले दो वर्षों तक उत्सुकता से देखना होगा।