फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   bharatnatyam in jalebi bai age

जलेबी बाई के दौर में भरतनाट्यम

Tue, 30 Jul 2013 08:16 PM IST
सुधीर विद्यार्थी
सुधीर विद्यार्थी Updated Tue, 30 Jul 2013 08:16 PM IST
विज्ञापन
bharatnatyam in jalebi bai age

साधो, मेरे चचा खुन्नस खाए बैठे हैं कि पड़ोस के एक खड़ूस ने एक अभिनेत्री पर अश्लील डांस करने के आरोप में मुकदमा दायर कर दिया है। उस अभिनेत्री पर अश्लीलता का आरोप लगाने वाले की बुद्धि पर हमें भी तरस आया। वह अभिनेत्री जहां पहुंच चुकी हैं, वहां श्लीलता और अश्लीलता में कोई फर्क नहीं रह जाता। वैसे भी अश्लीलता देखने वाले की दृष्टि में होती है। आप गिलास को आधा भरा या आधा खाली भी कह सकते हैं। यह आपके दृष्टिबोध पर है। चचा कहते हैं कि जो सज्जन उस अभिनेत्री का डांस देखने गए थे, वे उससे अश्लील प्रदर्शन की ही उम्मीद कर रहे थे। क्या वे वहां कथक या भरतनाट्यम की शास्त्रीयता की उम्मीद लेकर पहुंचे थे?

विज्ञापन



लगता है कि इस मामले में जो मुद्दई है, उसके भीतर कला का कोई बोध नहीं। वह अभिनेत्री एक कलाकार हैं। उनके पास एक अदद खूबसूरत शरीर है और वह उसे लोगों को दिखाती हैं। ध्यान रखना चाहिए कि छिपाना अश्लीलता है, उजागर करना नहीं। अभिनेत्री के पास जो कुछ है, वह प्रकृति प्रदत्त है। लोग उसे देखना चाहते हैं और वे उसे दिखाने में किसी तरह का संकोच नहीं करतीं। ऐसा वह लोगों की मांग पर करती हैं। उस अभिनेत्री का डांस देखने के लिए लोग बड़ी रकम खर्च करते हैं। अपना शरीर दिखाने का वह करोड़ों रुपये वसूलती हैं। इस देश की संस्कृति का परचम अब ऐसी अभिनेत्रियों के हाथों में है। वह देश की नई सांस्कृतिक राजदूत हैं। उन्होंने नए सांस्कृतिक मूल्य गढ़े हैं।
विज्ञापन



घर में बच्चे उस अभिनेत्रियों का डांस देख रहे हैं। वे जलेबी बाई की नकल करते हैं। मां-बाप खुश होते हैं। बच्चे आधुनिक हो रहे हैं। अभिनेत्री पर मुकदमा करने वाले की चिंता इस भयावह और निर्लज्ज होते परिवेश को लेकर नहीं है, जहां बचपन का अपहरण हो रहा है। मेरे एक मित्र अभिनेत्री पर मुकदमा दायर होने के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चला रहे हैं। वह कहते हैं कि देश में आजादी का अधिकार सभी को होना चाहिए। अभिनेत्री को भी और उसे देखने वालों को भी। उनका तर्क है कि मनुष्य बिना कपड़े के पैदा होता है और मरते समय भी वह बिना कपड़े के होता है। ऐसे में कोई यदि नंगा होना चाहता है, तो उसके इस कृत्य पर आपत्ति क्यों। हमारे चारों तरफ इतना नंगापन है कि उसके सामने उस अभिनेत्री का नंगापन छोटा पड़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुझे अपने इस दोस्त की बात में दम लगता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed