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राहत और सुधारों के बीच
जयंतीलाल भंडारी
Updated Thu, 21 Feb 2013 12:59 AM IST
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इस समय पूरे देश की निगाहें 28 फरवरी को वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा पेश किए जाने वाले 2013-14 के केंद्रीय बजट पर लगी हुई है। नया बजट वित्त मंत्री के लिए कठिन परीक्षा की तरह है। उन्हें आगामी बजट लोकलुभावन के साथ जवाबदेह भी बनाना होगा।
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चूंकि देश लोकसभा चुनाव की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में वित्त मंत्री को देश के करोड़ों लोगों एवं विभिन्न वर्गों का ध्यान रखते हुए बजट में विभिन्न सुविधाओं एवं रियायतों के लिए पर्याप्त धन का प्रबंध करना है। खास तौर से गरीब और मध्यवर्ग को ध्यान में रखकर लोककल्याणकारी योजनाएं बजट में शामिल करनी पड़ेंगी। इस परिप्रेक्ष्य में बजट के केंद्र में खाद्य सुरक्षा विधेयक, नकद हस्तांतरण और महिला सशक्तिकरण केंद्रित योजनाएं दिखाई देंगी।
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लोकलुभावन योजनाओं के साथ नीतिगत व्यवस्था कायम करने की दिशा में कृषि, बिजली एवं सिंचाई को प्राथमिकता देते हुए बुनियादी ढांचा क्षेत्र में कुछ ऊर्जावान प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी नई योजनाएं दिख सकती हैं। राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन को लोकप्रिय बनाया जा सकता है तथा किसानों को कर्ज से भारी राहत दिए जाने की भी संभावना है।
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वस्तुतः महंगाई जिस हिसाब से बढ़ रही है, उसे देखते हुए सरकार नए बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ा सकती है। अधिकांश आयकरदाता जरूरी खर्चों की पूर्ति में भी कठिनाई अनुभव कर रहे हैं। फिलहाल दो लाख रुपये तक की वार्षिक आमदनी पर कर नहीं देना पड़ता। इस छूट की सीमा बढ़ाकर ढाई लाख की जा सकती है।
सभी बड़े शहरों में मकान की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए बजट में होम लोन पर चुकाए जा रहे ब्याज के मद में मिलने वाली सालाना कर छूट की सीमा को मौजूदा डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर दो या ढाई लाख रुपये करने की संभावना है। आयकर की सीमा में आनेवाली महिलाओं और वृद्ध लोगों को विशेष राहत दी जा सकती है। अप्रत्यक्ष करों में एक बार फिर कमी आ सकती है। कृषि उपकरणों और घरेलू वस्तुओं पर कर घटाए जा सकते हैं।
वित्त मंत्री ने कई बार कहा है कि सरकार आम चुनाव से पहले अपने कई आर्थिक सुधारों को लागू करेगी, अतएव आगामी बजट इस दृष्टि से जवाबदेह साबित होगा। वित्त मंत्री का प्रयास देश में तेज विकास को लेकर विश्वास बहाल करने की दिशा में भी दिखाई देगा। वह न केवल संभावित विदेशी निवेशकों को यकीन दिलाते हुए दिखाई देंगे, बल्कि उद्योगों, व्यापारियों, निर्यातकों, घरेलू कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अलावा शेयर बाजार में नया भरोसा पैदा करने का भी प्रयास करेंगे।
नए बजट में पेंशन फंडों के शेयर बाजार में निवेश के नियमों में महत्वपूर्ण छूट के विकल्प आजमाने पर विचार किया जा सकता है। उद्यमियों और निर्यातकों में उत्साह की भावना का संचार करने के लिए जोरदार कदम उठाए जा सकते हैं। माल्टी ब्रांड रिटेल कारोबार में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को हरी झंडी दिए जाने के बाद सरकार अब चाहेगी कि देश में ज्यादा से ज्यादा एफडीआई आए।
नए बजट में वित्त मंत्री ऐसा कोई कर प्रस्ताव लेकर नहीं आएंगे, जिससे वित्तीय निवेशक खफा हो जाएं या निवेश पर नकारात्मक असर पड़े। जनरल ऐंटी एवॉयडेंस रूल्स (गार) के क्रियान्वयन को 2016 तक टालकर इसका खौफ दूर करने में चिदंबरम सफल रहे हैं। इस तरह वह यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि देसी अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश आता रहे।
वित्त मंत्री के लिए जहां लोकलुभावन योजनाओं के लिए भारी धन जुटाना मुश्किल होगा, वहीं दरों में इजाफा करते समय उन्हें काफी विचार करना होगा। उन्हें पूरा ध्यान राजकोषीय घाटा कम करने पर केंद्रित करना होगा। इसे अगले वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी के 4.8 फीसदी तक लाना है। देश का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 5.3 फीसदी से ज्यादा है। अतएव सरकारी खर्चों में भारी कटौती जरूरी होगी।
नए बजट में संभावना है कि वित्त मंत्री सब्सिडी के मद में होने वाले एक बड़े खर्च को इस आधार पर आगे टाल दें कि पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरक जैसी सब्सिडी प्राप्त वस्तुओं के दाम बढ़ाने का फैसला लिया जा चुका है। टाले गए बोझ को अगले वित्त वर्ष के दौरान शामिल किया जा सकता है। नए बजट में समावेशी विकास की कई योजनाओं को ठंडे बस्ते में रखा जा सकता है।
चूंकि पी चिदंबरम को अधिक राजस्व जुटाने हेतु प्रत्यक्ष करों के नए-नए प्रयासों के लिए जाना जाता है, इसलिए वह बजट में अमीरों के लिए अलग से अधिक कर जैसी पहल कर सकते हैं। वित्त मंत्रालय ऐसे 12 लाख स्थायी खाता संख्या (पैन) धारकों को नए करदाता के रूप में चिह्नित कर सकता है, जिन्होंने रिटर्न आवेदन नहीं किया है।
नए बजट में कर संग्रह बढ़ाने की खातिर वित्त मंत्रालय रियल एस्टेट, विदेश यात्रा, म्यूचुअल फंड, क्रेडिट कार्ड से भुगतान और किसी भी लग्जरी खर्च जैसे क्षेत्रों में लेन-देन के लिए स्रोत पर कर संग्रह कटौती को अनिवार्य कर सकता है। जो लोग भारी कमाई के बावजूद टैक्स नहीं देते, उन्हें कर देने के लिए मजबूर किया जा सकता है। भ्रष्ट तरीकों से अवैध कमाई करने वाले बेईमान लोगों के धन की पुख्ता जांच और काला धन बाहर लाने के प्रावधान भी बजट में किए जा सकते हैं।
उम्मीद करनी चाहिए कि बजट में वित्त मंत्री का एक कदम बजट को लोकलुभावन बनाने के लिए आम आदमी को राहत, कृषि, उद्योग और बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहन देने के लिए बढ़ेगा, वहीं उनका दूसरा कदम जवाबदेही को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने एवं अनावश्यक रियायतों को नियंत्रित कर राजस्व और राजकोषीय घाटे में कमी करने के प्रयासों के लिए भी उठेगा। इन दोनों के संतुलन पर ही बजट की सफलता निर्भर करेगी।