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दयालु बनें: मानवीय करुणा हमें एक-दूसरे से जोड़ती है... दयालुता बाधाओं को तोड़ चिरस्थायी रिश्ता बना सकती है
Mon, 21 Oct 2024 06:10 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
नेल्सन मंडेला
नेल्सन मंडेला
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Mon, 21 Oct 2024 06:10 AM IST
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विस्तार
मैंने आजादी की ओर जाने वाले उस लंबे रास्ते पर चलना शुरू कर दिया है और कोशिश की है कि लड़खड़ाऊं नहीं। मुझे किसी भी चीज का डर नहीं है, लेकिन अगर कोई चीज मुझे कभी मार सकती है, तो वह है उन लोगों के हिस्से में खुशी नहीं दे पाना, जिनके पास कोई संसाधन नहीं है, जो गरीब हैं, अशिक्षित हैं और जानलेवा बीमारी से ग्रस्त हैं। अगर मैं अपने जीवन का एक छोटा-सा हिस्सा उन्हें खुश करने में लगा सकता हूं, तो मैं खुशी महसूस करूंगा। यह बात मेरे जेहन में हमेशा रहती है कि एक अच्छा दिमाग और एक अच्छा दिल हमेशा एक मजबूत संयोजन होता है।
मानवीय गरिमा की कमी का परिणाम है कि आज बच्चे कस्बों की सड़कों पर भटकते रहते हैं, क्योंकि उनके पास स्कूल जाने के लिए पैसे नहीं हैं, उनके माता-पिता परिवार चलाने के लिए सुबह ही काम करने के लिए घर से निकल जाते हैं। इस तरह उनके पास कोई भी नहीं होता, जो उन्हें स्कूल जाने के लिए प्रेरित करे। इससे नैतिक मानकों में गिरावट आती है, अवैध कार्यों में खतरनाक वृद्धि होती है और हिंसा बढ़ती है। इन सबको रोकने के लिए समाज में शांति स्थापित करनी होगी। इसके लिए हमें शिक्षा का सहारा लेना होगा, क्योंकि शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग हम दुनिया बदलने के लिए कर सकते हैं। शिक्षा के बिना आपके बच्चे कभी भी उन चुनौतियों का सामना नहीं कर सकते, जिनका उन्हें सामना करना है। इसलिए बच्चों को शिक्षा देना और यह समझाना बहुत जरूरी है कि उन्हें अपने देश के लिए भूमिका निभानी चाहिए। हम हर तरह की परिस्थितियों से ऊपर उठ कर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
एक चीज मैं हमेशा से ही जानता हूं कि हर इन्सान के दिल की गहराई में दया और उदारता होती है, उसे स्वयं को शिक्षित करके उन्हें बाहर लाना चाहिए। हमारी मानवीय करुणा हमें एक-दूसरे से जोड़ती है-दया या संरक्षण के भाव से नहीं, बल्कि ऐसे इन्सानों के रूप में, जिन्होंने सीखा है कि कैसे अपने साझा दुख को भविष्य की आशा में बदला जाए। एक दिन, मैं अपने घर के सामने वाले बगीचे के पास खड़ा था और मैंने एक पेड़ पर बैठी गौरैया पर बंदूक तान दी। वहीं मौजूद आर्थर की पत्नी हेजल मुझे देख रही थीं और मजाक में बोलीं कि मैं निशाना नहीं लगा पाऊंगा। लेकिन अभी उन्होंने अपनी बात पूरी ही की थी कि गौरैया जमीन पर गिर पड़ी। मैं उनकी ओर मुड़ा और शेखी बघारने ही वाला था कि हेजल का बेटा पॉल, जो तब लगभग पांच साल का था, आंखों में आंसू लिए मेरी ओर मुड़ा और बोला, आपने उस चिड़िया को क्यों मारा? उसकी मां दुखी होगी। मेरा भाव तुरंत गर्व से शर्म में बदल गया। मुझे लगा कि इस छोटे लड़के में मुझसे कहीं ज्यादा इन्सानियत है।
सूत्र: दयालु बनें
जीवन एक मुश्किल और चुनौतीपूर्ण यात्रा हो सकता है। कई चीजों में से एक, जो इसे सार्थक बनाती है, वह है दूसरों के प्रति दयालुता और खुद के प्रति भी वही दयालुता और करुणा दिखाना। दयालुता बाधाओं को तोड़ सकती है, किसी व्यक्ति के पूरे भाव को बदल सकती है और एक चिरस्थायी रिश्ता बना सकती है। हमेशा याद रखें, दयालुता का सबसे छोटा कार्य सबसे बड़े इरादे से भी अधिक मूल्यवान है।