{"_id":"99e408b8-8a70-11e2-9052-d4ae52bc57c2","slug":"banks-will-provide-new-job","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोजगार की नई राह खोलेंगे बैंक","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
रोजगार की नई राह खोलेंगे बैंक
Updated Mon, 11 Mar 2013 10:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने अपनी तरह की पहली घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार 1,000 करोड़ रुपये की राशि से एक पूर्ण महिला बैंक बनाएगी। यह रोजगार की तलाश में लगी महिलाओं के लिए एक बड़ी घोषणा थी।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, उन्होंने भारत में काम कर रहे सरकारी बैंकों में बड़े पैमाने पर पूंजी लगाने की भी घोषणा की, जिसका मतलब यह हुआ कि वे पहले से बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे और अपना विस्तार कर सकेंगे। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने देश के ग्रामीण इलाकों में बैंकों की शाखाएं खोलने पर प्रतिबंध हटा दिया, ताकि वे कस्बों और गांवों में विस्तार कर सकें, जिसका मतलब हुआ कि उनमें रोजगार की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
विज्ञापन
सरकार ने अब उन वित्तीय कंपनियों को बैंकिंग लाइसेंस देने का भी फैसला कर लिया है, जो दस वर्ष से इस क्षेत्र में काम कर रही हैं और जिनका ट्रैक रिकॉर्ड बढ़िया है। इससे कम से कम दस नए और बड़े बैंक काम करने लगेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार ने उनके लिए यह शर्त रखी है कि वे 25 प्रतिशत शाखाएं गांवों और कस्बों में खोलेंगे। इससे इन इलाकों में रहने वाले नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इस पहल के पीछे मंशा यह थी कि लोगों को बचत करने के लिए प्रेरित किया जा सके।
विज्ञापन
दरअसल अब भारतीयों की बचत करने की आदत घटती जा रही है और वे कम बचत कर रहे हैं। बचत करने की आदत ने उन्हें ही नहीं, देश को भी समय-असमय बहुत फायदा पहुंचाया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से महंगाई बढ़ने तथा उपभोक्तावाद की संस्कृति के विस्तार ने भारतीयों को इसकी ओर से विमुख कर दिया है और इसका नतीजा हुआ कि अब वे पहले से काफी कम धन बचा रहे हैं।
भारतीयों की बचत की आदत ने उन्हें हमेशा बचाया और अगर 2008 की महामंदी से भारत बच निकला, तो इसका कारण यह रहा कि भारतीयों के पास अतिरिक्त धन था, जिसका उन्होंने बुरे समय में इस्तेमाल किया। अब यह आदत खत्म होती जा रही है। इसका नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि वह इस कोष का अपने कार्यों के लिए इस्तेमाल करती है। बाहर से धन उठाने पर उसकी लागत ज्यादा होती है।
भारत के 26 सरकारी बैंकों में इस समय रोजगार देने की होड़ है और बड़े पैमाने पर रिक्तियां हैं। इस समय सरकारी बैंकों में 85,000 पद खाली हैं, जो भरे जा रहे हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अलावा अन्य बैंकों में अगले छह महीनों में ही 56,500 पद भरे जाने हैं, ताकि इनका विस्तार हो सके। देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा रोजगार देगा। अब बजट में बैंकों को पूंजी देने की घोषणा के बाद उनमें और भी पद सृजित होंगे।
बैंकिंग उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि देश में अगले तीन वर्षों के दौरान बैंकों में तीन लाख से भी ज्यादा पद सृजित होंगे। इसकी वज़ह यह है कि बैंकों से बड़ी तादाद में कर्मचारी और ऑफिसर रिटायर हो रहे हैं तथा ये बैंक गांवों-कस्बों में अपनी शाखाएं खोलने जा रही हैं। प्राइवेट बैंक भी नई स्पर्धा के लिए तैयार हो रहे हैं और वे भी बड़े पैमाने पर भर्तियां करेंगे। यस बैंक ने तो अपने स्टाफ की संख्या दोगुनी करने की घोषणा कर दी है।
देश के सबसे बड़े तीन व्यापारिक घराने टाटा, बिड़ला और अंबानी बैंक खोलने को तैयार हैं। ये तीनों बैंकिंग ऑपरेशन करना चाहते हैं और इसके लिए वे बड़ी संख्या में भर्तियां करेंगे। इनके अलावा कुछ बड़े कॉरपोरेट्स जैसे महिंद्रा, लार्सन ऐंड टुब्रो, रेलिगेयर वगैरह भी इस क्षेत्र में उतरने को तैयार हैं। इनका कामकाज काफी बड़ा है और जाहिर है कि वे बड़े पैमाने पर काम करेंगे, जिसके लिए उन्हें भारी तादाद में कर्मी चाहिए।
केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों में इस समय रोजगार के अवसर कम हैं और ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र देश का सबसे बड़ा नियोक्ता बनता दिख रहा है। दूसरी ओर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर भी इस समय बीमार-सा दिख रहा है और वहां रोजगार के अवसर कम ही हैं। ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होना स्वागत योग्य है। पिछले वर्ष तक भारत के बैंकों में 7.7 लाख लोग काम कर रहे थे, जिसका अर्थ हुआ कि यह तेजी से देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं की सूची में शामिल होता जा रहा है।
यह देखते हुए कि भारत में अभी भी आधी आबादी के पास बैंक अकाउंट नहीं है। एक आकलन के मुताबिक, भारत में महज 35 प्रतिशत लोगों के पास बैंक में खाता है, जबकि विश्व औसत 50 प्रतिशत का है। विकसित देशों में तो यह औसत 41 प्रतिशत का है। इसका अर्थ हुआ कि भारत में बैंकों के लिए काफी अवसर हैं और अभी बड़ी तादाद में बैंक या उनकी शाखाएं खोलने की जरूरत है। इससे ही देश में रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा बचत की आदत बढ़ेगी। भारत में अब पहले से बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर है और गांवों तक कंप्यूटरों की पहुंच हो जाने से वहां बैंक खोलना अब पहले से कहीं सुविधाजनक और आसान हो गया है।
भारतीय बैंकों के लिए आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बेशक देश का सबसे बड़ा बैंक है, पर दुनिया के सबसे बड़े बैंकों की तुलना में अभी बहुत पीछे है। विश्व के सबसे बड़े बैंकों में वह साठवें स्थान पर है। जाहिर है, हमारी अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ-साथ हमारे बैंकों को भी आगे बढ़ना होगा और उनमें ज्यादा लोगों को रोजगार देना होगा। अगर भारतीय अर्थव्यवस्था को 2015 तक दुनिया की सातवीं अर्थव्यवस्था बनाना है, तो बैंकों की बड़ी भूमिका रहेगी। उनके कामकाज में विस्तार से ही यह संभव होगा और इससे बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेंगे।