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जनता परिवार का गुब्बारा
सुधीर विद्यार्थी
Updated Fri, 21 Nov 2014 12:09 AM IST
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साधो, उस दुकान में तरह-तरह के गुब्बारे थे। भिन्न-भिन्न साइज के। उनके रंग भी वैसे ही थे। तमाम गुब्बारे राजनीतिक पार्टियों के झंडों के रंगों के थे, जिन पर नेताओं की तस्वीरें छपी थीं। मेरे एक बसपाई मित्र ने अपने बच्चे को बहन जी मार्का नीले रंग का गुब्बारा दिलवाया। भाजपाई केसरिया रंग के गुब्बारों की खरीदारी में मग्न थे, जिन पर मोदी और अमित शाह की तस्वीरें थीं।
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तिरंगे गुब्बारों पर सोनिया और राहुल के साथ प्रियंका की भी तस्वीर थी। एक नया गुब्बारा कई रंगों वाला था, जिस पर जनता परिवार लिखा था। मुलायम, लालू, नीतीश और देवगौड़ा की तस्वीरों से सजा यह गुब्बारा कोई खरीद नहीं रहा था। दुकानदार ने बताया कि यह आने वाले समय का गुब्बारा है। अभी नया-नया लांच हुआ है। उसने बताया कि यह गुब्बारा देखने में तो बड़ा है, पर इसकी उम्र अधिक नहीं होती। हैपी बर्थडे बोलने वाले लोग इसे खुद ही फोड़ देते हैं। मैंने दुकानदार से पूछा कि आम आदमी पार्टी के गुब्बारे कहां हैं? वह बोला, आप के गुब्बारों का रंग उतर गया है। वे दुकान पर लगे हैं, पर दिखाई नहीं देते।
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सभी गुब्बारों में एक ही तरह की गैस भरी थी, जिससे वे ऊपर की तरफ तनकर खड़े थे। गैस निकल जाए, तो सबके सब जमीन पर आ गिरें। एक कोने में लगा राकांपाई रंग का गुब्बारा एकाएक इतरा कर डोलने लगा। दुकानदार ने बताया, कल तक यह पीछे दुबका था, पर शिवसेना के गुब्बारों की हवा कम होते ही यह अपने को किंगमेकर समझने लगा है। दुकानदार ने एक और गुब्बारा दिखाया, जिस पर ममता की फोटो थी, पर उससे गुस्सा झलक रहा था।
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जयललिता की तस्वीर वाला गुब्बारा मुरझा कर पिचक गया था। उमर अब्दुल्ला के गुब्बारे की शक्ल छुहारे जैसी हो रही थी। खरीदार बढ़ते जा रहे थे, पर गुब्बारे बिकने का नाम नहीं ले रहे थे। अचानक दुकानदार घर जाने की तैयारी करने लगा। उसने सभी गुब्बारों की हवा निकाल दी। अब वे एक जैसे हो गए, जिन पर छपी तस्वीरों की आकृतियां आड़ी-तिरछी होकर अपना ही मुंह चिढ़ा रही थीं।
सुधीर विद्यार्थी