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किसकी राह पर चलेंगे बाजवा
मरिआना बाबर
Updated Thu, 01 Dec 2016 07:34 PM IST
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मरिआना बाबर
नई दिल्ली क्या पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के विचारों को सुनने के लिए तैयार है, खासकर इस मामले में कि वह पाकिस्तान की भारत संबंधी नीति और अन्य सुरक्षा नीतियों को कैसे आगे बढ़ाना चाहते हैं? यह तो भारत पर निर्भर है कि वह बाजवा की बातों को कितनी तवज्जो देता है, लेकिन फिलहाल पाकिस्तानी सेना में भारत को लेकर जल्दी किसी नीतिगत परिवर्तन की उम्मीद नहीं दिखती।
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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय एवं नई दिल्ली स्थित पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अमृतसर में होने वाले हार्ट ऑफ एशिया कॉन्फ्रेंस में अगर भारत अलग से बातचीत की कोई पहल करता है, तो वहां जा रहे पाकिस्तान की विदेश नीति के सलाहकार सरताज अजीज उसका स्वागत करेंगे।
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बाजवा अभी पाकिस्तान के सबसे ताकतवर व्यक्ति हैं और पदभार ग्रहण करते ही इस 16वें सेना प्रमुख का सबसे पहला बयान नियंत्रण रेखा के पार गोलाबारी जारी रखने से संबंधित था। उनकी इच्छा मीडिया को सहभागी बनाने की है। मीडिया से एक अनौपचारिक बातचीत में बाजवा ने कहा कि 'नियंत्रण रेखा पर सब कुछ बहुत जल्दी ही ठीक हो जाएगा।' उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया कि मौजूदा हालात में चीजें किस तरह से सामान्य होंगी, जबकि पाकिस्तान और भारत, दोनों ओर लोग हताहत हो रहे हैं और हालात बेहतर होने के कोई संकेत दिखाई नहीं देते।
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निश्चित रूप से सरताज अजीज, सैन्य प्रमुख बाजवा और पाकिस्तान-भारत-अफगानिस्तान नीति पर निगाह रखने वाले अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श करके ही अमृतसर जाएंगे। इससे भारतीय अधिकारियों को पाकिस्तान की विदेश नीति के सलाहकार को आमने-सामने सुनने का मौका मिलेगा कि पाकिस्तान की भारत से संबंधित नीति में कोई बदलाव आता है या नहीं या भविष्य में पाकिस्तान का क्या रुख रहेगा। इससे पहले पाकिस्तान की संसद में सरताज अजीज ने गोलीबारी रोकने और जैसे को तैसा वाली प्रतिक्रिया देने से मना करने के साथ ही भारत के साथ संवाद करने पर बल दिया था।
जो लोग बाजवा को जानते हैं, उनका कहना है कि वह सरल, तेज दिमाग वाले और विभिन्न विषयों पर अपने मातहतों के साथ सलाह-मशविरा करने वाले आदमी हैं। कई मौकों पर उन्होंने कहा है कि सेना को अपनी बैरकों में रहना चाहिए और राजनीतिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए। लेकिन इसमें कोई शुबहा नहीं कि जिन लोगों ने उनके साथ बातचीत की है, उनके मुताबिक, वह एक 'सख्त पेशेवर' हैं। फिर भी इस समय यह कह पाना मुश्किल है कि वह राहील शरीफ से अलग होंगे। बाजवा मशहूर होना नहीं चाहेंगे। पाकिस्तानी सेना का मनोबल बढ़ाने का काम राहील शरीफ ने किया था, साथ ही, उन्होंने अपना काफी समय दूसरे मुल्कों की राजधानियों में बिताया, जहां उन्हें मुल्क के मुखिया की तरह सम्मान मिलता था।
यह देखना दिलचस्प होगा कि बाजवा अपने तीन साल का कार्यकाल पूर्व सैन्य प्रमुख परवेज अशफाक कियानी की तरह शुरू करना चाहेंगे और अपना ध्यान पाकिस्तान के अंदरूनी सुरक्षा खतरों पर केंद्रित करेंगे या राहील शरीफ की तरह भारत को सबसे बड़ा खतरा बताएंगे।
कियानी सिद्धांत ने सेना का ध्यान पूर्वी सीमा से हटाकर देश के भीतर पाकिस्तानी तालिबान और अन्य कट्टरपंथी समूहों के बढ़ते खतरों की तरफ केंद्रित कर दिया था। लेकिन राहील शरीफ के समय में सेना का ध्यान भारत पर ज्यादा केंद्रित था और उन्होंने भारत को पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था। हालांकि उन्होंने अंदरूनी दहशतगर्दी के खिलाफ सबसे बड़ी लड़ाई लड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
बाजवा को सेना की कमान सौंपते हुए सैन्य प्रमुख के तौर पर अपने आखिरी भाषण में राहील शरीफ ने कहा, 'हाल के महीनों में कश्मीर में भारत के आक्रामक रुख ने इस क्षेत्र को खतरे में डाल दिया है। भारत को यह पता होना चाहिए कि धैर्य की हमारी नीति को कमजोरी समझना उसके लिए खतरनाक होगा।' आगे उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और प्रगति के लिए कश्मीर मुद्दे का राजनीतिक समाधान निकालना चाहिए।
जब नए सेना प्रमुख के रूप में बाजवा के नाम की घोषणा हुई, तब शायद अन्य किसी से ज्यादा स्वयं बाजवा को हैरानी हुई होगी, क्योंकि जिन चार लोगों के नाम राहील शरीफ ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को चुनने के लिए सौंपे थे, उनमें सबसे नीचे बाजवा का नाम था। हालांकि नवाज शरीफ द्वारा उनके नाम की घोषणा से पहले ही लोगों ने नियंत्रण रेखा पर उनके अनुभवों को लेकर बातचीत करनी शुरू कर दी थी।
बाजवा रावलपिंडी स्थित सैन्य बेस की 10वीं कोर के प्रमुख होंगे, जो नियंत्रण रेखा की निगरानी के लिए भी जवाबदेह है। बाजवा ने ऐसे समय में पाकिस्तानी सेना प्रमुख का पदभार संभाला है, जब 2003 की संघर्ष विराम सहमति के चीथड़े उड़ गए हैं और दोनों में से कोई भी देश उस पर टिका नहीं है। नए सेना प्रमुख का यह कहना, कि नियंत्रण रेखा पर सब कुछ जल्दी ही ठीक हो जाएगा, इस बात का संकेत है कि एक बार फिर से 2003 की संघर्ष विराम सहमति को लागू किए जाने की संभावना बन सकती है। असल में हाल ही में भारत स्थित पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने भारत के सामने 2003 की सहमति को औपचारिक द्विपक्षीय संधि में बदलने की पेशकश की है, इसलिए उम्मीद है कि संघर्ष विराम उल्लंघन में कमी आएगी।
जिस समय नवाज शरीफ नए सेना प्रमुख के रूप में बाजवा के नाम पर विचार कर रहे थे, उस समय जनरल बाजवा जेनरल हेडक्वार्टर में प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन विभाग के इंस्पेक्टर जनरल थे। यह वही पद है, जिस पर सैन्य प्रमुख बनने से पूर्व राहील शरीफ भी कार्यरत थे। जनरल कमर जावेद बाजवा, जिन्हें अपने करियर में अब चार सितारा मिला है, बलूच रेजीमेंट में पैदल सेनाधिकारी रहे हैं।