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राजनीति में बाहुबली : उन्नाव की युवती की शर्मनाक कहानी ने हमें ऐसा आईना दिखाया है

Mon, 05 Aug 2019 04:30 AM IST
Tavleen Singh तवलीन सिंह
Updated Mon, 05 Aug 2019 04:30 AM IST
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Bahubali in politics
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : a

अपने भारत महान के कुछ ऐसे यथार्थ हैं और जिनका सामना करना इतना दुखदायी है कि हम उनकी तरफ देखना नहीं चाहते। लेकिन कभी-कभी ऐसा कुछ हो जाता है कि इनकी तरफ देखना ही पड़ता है। उन्नाव की उस युवती की शर्मनाक कहानी ने हमें ऐसा आईना दिखाया है और जिसमें हमको वे सारे यथार्थ स्पष्ट दिखते हैं, जिनको हम देखना नहीं चाहते।


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अपने भारत महान के कुछ ऐसे यथार्थ हैं और जिनका सामना करना इतना दुखदायी है कि हम उनकी तरफ देखना नहीं चाहते। लेकिन कभी-कभी ऐसा कुछ हो जाता है कि इनकी तरफ देखना ही पड़ता है। उन्नाव की उस युवती की शर्मनाक कहानी ने हमें ऐसा आईना दिखाया है और जिसमें हमको वे सारे यथार्थ स्पष्ट दिखते हैं, जिनको हम देखना नहीं चाहते।

कुछ इसलिए कि हमारी देशभक्ति को चोट पहुंचती है, कुछ इसलिए कि यह यथार्थ हमको डराने का काम करते हैं। पिछले सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप ने पहली बार उन्नाव की इस बेटी को न्याय मिलने की थोड़ी-सी आशा जगाई है, लेकिन बात सिर्फ न्याय मिलने या न मिलने की नहीं है। बात इससे कहीं ज्यादा बड़ी है।

हम जानते हैं कि ग्रामीण भारत में कानून-व्यवस्था केवल नाम के वास्ते है। हम जानते हैं कि कुलदीप सेंगर जैसे तथाकथित बाहुबली इतने शक्तिशाली होते हैं कि गंभीर अपराध करने से नहीं डरते, क्योंकि पुलिस विभाग इनके इशारों पर काम करता है और प्रशासन भी। हम जानते हैं कि ऐसे लोग राजनीति में जनता की सेवा करने नहीं, बल्कि जनता का शोषण करने आए हैं।

इस शोषण का सबसे आसान शिकार बनती हैं बहु-बेटियां। इनमें से कोई चूं करने की भी हिम्मत दिखाती है, तो अपने पूरे परिवार को खतरे में डाल देती है। उन्नाव में यही हुआ। कोई कुछ नहीं कर सका, बावजूद इसके कि मुख्यमंत्री के घर के सामने जब इस बेटी ने आत्महत्या करने का प्रयास किया, तो उसकी शिकायत पर भाजपा के इस विधायक को हिरासत में पुलिस को लेना ही पड़ा।
 

इससे इस बाहुबली को कोई फर्क नहीं पड़ा। जेल के अंदर भी सेंगर की ताकत कम नहीं हुई। पुलिस ने बच्ची के पिता को हिरासत में उसकी शिकायत के बाद ले लिया और वहां से वह जीवित लौटकर नहीं आया। उसकी मृत्यु (हत्या?) के बाद उसके परिवार पर सेंगर के साथी शिकायत वापस लेने के लिए लगातार दबाव डालते रहे। जब उन्होंने इनकार किया, तो वह हादसा हुआ, जिस पर सर्वोच न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा।शायद इस बेटी को न्याय मिलेगा, लेकिन उसके साथ जो हुआ, इस देश की बेटियों के साथ तब तक होता रहेगा, जब तक राजनेता सेंगर जैसे लोगों को राजनीति में आने के टिकट देते रहेंगे।

सेंगर इतना बड़ा बाहुबली है कि उससे जेल में मिलने भाजपा सांसद साक्षी महाराज गए और मिलने के बाद इस ‘संन्यासी’ ने गर्व से टीवी पत्रकारों को कहा कि वह चुनाव जिताने में मदद करने के लिए उनको धन्यवाद करने गए थे। भाजपा के आला अधिकारी मौन साधे रहे और जब उनसे पूछा गया कि सेंगर को पार्टी से निष्कासित क्यों नहीं किया गया है अभी तक, तो उनका जवाब वही था, जो अक्सर होता है : अपराध साबित होने के बाद करेंगे।

पिछले सप्ताह सेंगर को भाजपा से तब निकाला गया, जब सर्वोच न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को ऐसी फटकार लगाई कि उसे शर्मिंदा होना चाहिए। इनसे भी ज्यादा शर्मिंदा होना चाहिए भाजपा के बड़े नेताओं को, जो नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए नहीं थकते। असली खराबी है राजनीतिक प्रणाली में।

इसको अंदर से खा गए हैं ऐसे दरिंदे, जिनकी जगह न सांसद में होनी चाहिए, न विधानसभाओं में। राजनीति में जिस दिन सुधार आएंगे, पूरे प्रशासनिक ढांचे में भी आने लगेंगे। वर्तमान स्थिति यह है कि उन्नाव में इस युवती के साथ जो हुआ,  वह ग्रामीण भारत के हर गांव, कस्बे और शहर में हो रहा है, क्योंकि राजनीति पूरी तरह बाहुबलियों के नियंत्रण में है।
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