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सियासी जंग का आगाज: नतीजे तय करेंगे राष्ट्रीय राजनीति की दिशा-दशा, पूर्वी और दक्षिण भारत में चुनावी परीक्षा

Mon, 16 Mar 2026 06:36 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Mon, 16 Mar 2026 06:36 AM IST
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सार
जिन चार राज्यों व एक केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव कराने की घोषणा चुनाव आयोग ने की है, उनमें किस पार्टी का जादू सिर चढ़कर बोलेगा, इसका पता तो चार मई को ही चलेगा। साथ ही चुनावी नतीजों से विभिन्न मुद्दों पर देश के 17.4 करोड़ मतदाताओं के रुख की भी जानकारी मिलेगी।
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assembly elections 2026 five states political battle ECI Assam Tamil Nadu Kerala West Bengal puducherry
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार - फोटो : ANI

विस्तार

चार राज्यों-असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु व केरल और एक केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों की जो घोषणा की गई है, वह इस मायने में महत्वपूर्ण है कि पिछली बार के मुकाबले इस बार मात्र तीन चरणों में इन सभी राज्यों की 824 विधानसभा सीटों पर मतदान संपन्न करा लिया जाएगा। असम, केरल और पुदुचेरी में जहां 9 अप्रैल को मतदान होंगे, वहीं तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 23 अप्रैल एवं पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर एवं दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान कराए जाएंगे। गौरतलब है कि पिछली बार पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में चुनाव हुए थे, लेकिन इस बार दो चरणों में चुनाव संपन्न कराने की घोषणा के साथ चुनाव आयोग ने यह संदेश भी दिया है कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोई हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी राज्यों में मतगणना चार मई को संपन्न होगी। भर्ती घोटालों व भ्रष्टाचार के मामलों और डेढ़ दशक की सत्ता विरोधी लहर के बीच पश्चिम बंगाल में अपनी प्रतिष्ठा और सत्ता बचाने के लिए जूझ रहीं ममता बनर्जी, जिन्हें पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट से फटकार सुनने को मिली थी, ने चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा से ठीक पहले मतदाताओं को रिझाने के लिए बकाया डीए भुगतान एवं पुरोहितों व मुअज्जिनों के वेतन में 500 रुपये बढ़ोतरी की दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। केरल में स्थानीय चुनावों में यूडीएफ की जीत ने कांग्रेस के लिए उम्मीदें बढ़ाई हैं, तो तिरुवनंतपुर नगर निगम में एनडीए के सबसे बड़ा गठबंधन बनकर उभरने से मिले झटके के बाद राज्य में वाम मोर्चे के सामने देश भर में केरल की इकलौती सत्ता बचाने की परीक्षा है। तमिलनाडु में स्टालिन की द्रमुक मजबूत दावेदार है, पर तथ्य यह भी है कि 1971 के बाद से द्रमुक लगातार दूसरी बार कभी सत्ता में नहीं लौटी है। इसके अतिरिक्त, अभिनेता विजय की टीवीके ने समीकरण जटिल कर दिए हैं, जिसका दक्षिणी तमिलनाडु व युवाओं में खासा असर दिख रहा है। असम में हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा मजबूत स्थिति में दिख रही है। विपक्षी दलों द्वारा एसआईआर पर उठाए गए सवालों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने 100 फीसदी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था कर चुनावों की निष्पक्षता व पारदर्शिता बनाए रखने की भरसक कोशिश की है, ताकि संदेह की गुंजाइश न रहे। अब यह तो चार मई को ही पता चलेगा कि मतदाताओं का समर्थन किस पार्टी या गठबंधन को मिलेगा, पर इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति के साथ पूर्वी और दक्षिण भारत में राजनीति की दिशा व दशा तो तय करेंगे ही।
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