{"_id":"66245bcf3dcc7bd3bb012ea3","slug":"artificial-intelligence-can-ai-read-your-mind-2024-04-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Artificial Intelligence: आपके दिमाग में क्या चल रहा, क्या इसका पता लगा सकता है एआई?","category":{"title":"Opinion","title_hn":"विचार","slug":"opinion"}}
Artificial Intelligence: आपके दिमाग में क्या चल रहा, क्या इसका पता लगा सकता है एआई?
Sun, 21 Apr 2024 05:50 AM IST
निर्मल कांत
जो अदेतुंजी, संपादक, द कन्वर्सेशन यूके
जो अदेतुंजी, संपादक, द कन्वर्सेशन यूके
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 21 Apr 2024 05:50 AM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
एआई
- फोटो :
iStock
विस्तार
साल की शुरुआत में एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने 29 वर्षीय अमेरिकी नोलैंड अरबॉ, जो कंधे से नीचे तक पूरी तरह लकवाग्रस्त हैं, के दिमाग के अंदर एक चिप बैठा दी। यह चिप ह्यूमन ब्रेन और कंप्यूटर के बीच सीधा कम्युनिकेशन चैनल बनाएगी। जरा सोचिए, अगर यह टूल पूरी तरह से विकसित हो गया, तो लकवाग्रस्त मरीज और दिव्यांगों के लिए यह किसी वरदान से कम होगा क्या?
जाहिर तौर पर दिमाग की गतिविधियों को कोड करके और दिमाग में क्या चल रहा है, इसका पता लग जाए, तो ऐसे में लकवाग्रस्त लोगों की दुनिया निश्चित रूप से काफी आसान बन सकती है। हालांकि कंपनी ने चिप के माध्यम से अरबॉ को माउस पॉइंटर की तरह स्क्रीन पर घूमने की कल्पना करने में सक्षम बना दिया। मई, 2023 में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने जेनेरिक एआई की मदद से व्यक्ति के मस्तिष्क को स्कैन करके उसके द्वारा सोचे गए शब्दों को ‘डीकोड’ करने के लिए एक अद्भुत तरीके की भी घोषणा की। तो क्या वास्तव में न्यूरल इम्प्लांट्स और जेनरेटिव एआई ‘दिमाग पढ़ सकते हैं?’ क्या वह दिन अब दूर नहीं, जब कंप्यूटर हमारे विचारों की सटीक प्रतिलिपि तैयार कर सकेंगे?
जाहिर है कि ऐसी तकनीकी के कुछ लाभ हो सकते हैं, लेकिन यह हमारे अपने दिमाग की गोपनीयता को खत्म भी कर सकता है। इससे घबराएं नहीं और यह सोचें कि क्या न्यूरल इम्प्लांट्स और जेनरेटिव एआई वास्तव में ‘मन को पढ़ने’ का काम कर सकते हैं? जहां तक हम सभी जानते हैं कि मनुष्य का सचेत अनुभव उसकी दिमाग की गतिविधियों से उत्पन्न होता है। सचेत मानसिक स्थिति के लिए आप चाहे रोमन साम्राज्य के बारे में सोच रहे हों या कर्सर को हिलाने की कल्पना कर रहे हों, आपके दिमाग में इन गतिविधियों का एक सही पैटर्न बन रहा होता है। यदि कोई उपकरण हमारे दिमाग की स्थिति को ट्रैक कर सकता है, तो जाहिर है कि वह हमारे दिमाग को आसानी से पढ़ने में भी सक्षम होगा। लेकिन चेहरे के बदलते भाव भी काफी कुछ कहते हैं।
सवाल यह है कि क्या एआई इन भावों को पढ़ सकेगा। एआई हमारे दिमाग व विचारों को पूरी तरह से पढ़ सके, इसके लिए उसे हमारे चेहरे के भावों को भी पढ़ना होगा, जो फिलहाल संभव नहीं है। न्यूरल इंप्लांट्स आमतौर पर किसी मरीज के किसी खास कार्य को करने में मदद करता है, उदाहरण के लिए स्क्रीन पर कर्सर ले जाना। न्यूरल इंप्लांट्स वही काम कर सकते हैं, जिनके लिए उन्हें अनुकूलित किया गया है। अन्य किसी भी तरह की मानसिक गतिविधि को यह नहीं पढ़ सकता।