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आंग ली: कला फिल्मों का नया जीवनीकार

Fri, 11 Jan 2013 10:30 PM IST
हेमेन्द्र मिश्र
हेमेन्द्र मिश्र Updated Fri, 11 Jan 2013 10:30 PM IST
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art films new biographer ang lee

दोस्तों के लिए वह 'जिज्ञासु फिल्मकार' हैं, तो आलोचकों के लिए कला फिल्मों के 'नए जीवनीकार'। अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के शौकीन लोगों के लिए आंग ली अनजाना नाम नहीं है। ऑस्कर विजेता इस फिल्मकार ने विषयों को जिस संवेदनशीलता से परोसा, उसकी झलक सेंस ऐंड सेंसिबिलिटी (गोल्डन बीयर सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित फिल्म) से लेकर ब्रॉकबैक माउंटेन (सर्वश्रेष्ठ निर्देशक सहित तीन ऑस्कर पुरस्कार विजेता फिल्म) तक दिखती है।

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चुनौती स्वीकारने की उनकी क्षमता ही है कि शुरुआत में आधुनिकता और परंपरा के बीच के द्वंद्व को सिनेमा में उतारने वाला यह शख्स अब बच्चे, पानी और पशुओं को रूपहले परदे पर परोस रहा है, जिसके साथ फिल्म बनाना किसी भी फिल्मकार के लिए 'दुःस्वप्न' से कम नहीं होता। लाइफ ऑफ पाई  ऐसी ही फिल्म है, जो ऑस्कर की 11 श्रेणियों में नामित की गई है। इसमें सर्वश्रेष्ठ निर्देशक की श्रेणी भी शामिल है। यानी ताइवानी मूल का यह अमेरिकी फिल्मकार फिर से ऑस्कर की दहलीज पर है, जबकि यह पुरस्कार जीतने वाला वह एशियाई मूल का पहला निर्देशक है।
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आंग ली का अब तक का सफर रूपहले परदे की तरह ही रंगीन है। बचपन में शर्मीले और मृदुभाषी रहे ली ने जब जीवन को समझना शुरू किया, तो उन्हें फिल्मों में ही भविष्य दिखा। इसकी वजह भी थी। पढ़ाई में कमजोर होने के कारण वह महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय वार्षिक संयुक्त प्रवेश परीक्षा में दोनों बार विफल रहे। ताइवान में कॉलेज में प्रवेश के लिए यह परीक्षा पास करना आवश्यक था। लिहाजा पिता ने उनका दाखिला नेशनल आर्ट्स स्कूल में करवा दिया। वहां उन्हें अपनी भावना व्यक्त करने का मौका मिला और फिर जीवन की गाड़ी ऐसी चल निकली कि प्रोफेसर बनाने का पिता का सपना धरा का धरा रह गया।
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ली उन फिल्मकारों में गिने जाते हैं, जो अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहते हैं। बकौल ली, 'सीखने की उनकी ललक' आज भी भले जारी हो, पर लगन और दूरदर्शिता की झलक उन्होंने अपनी दूसरी फिल्म द वेडिंग बैंगक्विट  से दे दी थी, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खूब सराहा गया था। आम सुंदरता को भी भव्य तरीके और स्पेशल इफेक्ट्स की सहायता से पेश करने की उनकी खासियत ही है कि आज एक बार फिर वह उस ऑस्कर की दौड़ में है, जिसे फिल्मी दुनिया में अर्जित की गई 'विशिष्ट उपलब्धियों का सम्मान' भी कहा जाता है।

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