फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   Arrest before crime

अपराध से पहले ही गिरफ्तारी

Thu, 11 Jun 2015 08:23 PM IST
प्रकाश पुरोहित
प्रकाश पुरोहित Updated Thu, 11 Jun 2015 08:23 PM IST
विज्ञापन
Arrest before crime

मेरे शहर की पुलिस हो चुके अपराध पर मिट्टी डालकर होने जा रहे अपराध पर रोक लगाने में ज्यादा दिलचस्पी लेती है। एक बानगी देखिए-थाने का रमणीय माहौल है। थानेदार साहब झपकी लगाकर लौटे हैं। चाय आ गई है।

विज्ञापन


क्या सर, गश्त पर चलोगे? सहायक पूछता है।

कुछ खास है क्या आज?

हां, जमाया है कल्लू पहलवान ने कुछ!

चलो, देखते हैं क्या किया है उसने।

तय जगह पर कुछ लोग बैठे बातें कर रहे थे। थानेदार ने उनसे पूछा, कौन-सा क्राइम करने वाले हो आज तुम लोग?
हमें तो कल्लू पहलवान ने कहा था कि यहां पुलिया के नीचे बैठ जाना, क्योंकि अपराधी पुलिया के नीचे बैठकर ही योजना बनाते हैं, सीनियर अपराधी ने कहा।

तुम तो गांजे के साथ पकड़ाए थे, सेठ का घर लूटने जाते समय, थानेदार को चेहरा देखकर याद आया। उस डकैती वाले मामले में फिर क्या हुआ था?

आसपास सेठ का घर ही नहीं था। छूट गए इसी बात पर।

आज क्या इरादा है? थानेदार ने पूछा!

हत्या की सोच रहे हैं। चोरी-चकारी के तो इतने मामले हो गए कि मजा नहीं आ रहा।

ठीक है, पर हथियार हैं या हमें ही देने पड़ेंगे? सीनियर ने चाकू निकालकर दिखा दिया।

अरे, यह नहीं चलेगा। हेड साहब, जरा गाड़ी में से वह बड़ा वाला छुरा निकालना, जो करीम कसाई के यहां से लाए थे। हेड साहब छुरा लेकर आ गए।

काम होने के बाद मुझे मिल जाएगा इनाम में? सीनियर अपराधी ने खुश होकर पूछा।

पहले पकड़े तो जाओ। हां, याद करो। सेठ धनीराम की हत्या करने जा रहे थे कि पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया, हेड साहब ने समझाना चाहा।

अब साहब, इतना भी नया नहीं हूं। आप गिरफ्तार कर लीजिए। बाकी मैं संभाल लूंगा। सीनियर अपराधी यह कहते हुए पुलिस की गाड़ी में बैठ गया। उसके साथी भी बैठ गए।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed