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भारत अमेरिका की नई साझेदारी
नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा
Updated Tue, 30 Sep 2014 09:31 PM IST
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लोकतंत्र, स्वतंत्रता, विविधता और उद्यम को समर्पित राष्ट्र के रूप में भारत और अमेरिका समान मूल्यों और साझे हितों की डोर से बंधे हुए हैं। दोनों देशों ने मानवीय इतिहास को एक सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में, अपने संयुक्त प्रयासों के जरिये हमारी स्वाभाविक और विशिष्ट साझेदारी आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति को आकार देने में मददगार साबित हो सकती है।
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दरअसल अमेरिका और भारत में जुड़ाव की जड़ें न्याय और समानता के लिए हमारे नागरिकों की साझा कामना में निहित हैं। उल्लेखनीय है कि स्वामी विवेकानंद ने जब हिंदुत्व को वैश्विक धर्म के रूप में प्रस्तुत किया था, तो इसका जरिया बनी थी, 1893 में शिकागो में संपन्न वैश्विक धर्म संसद। इसी तरह, जब मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अफ्रीकी अमेरिकियों के खिलाफ कायम भेदभाव और पक्षपात को खत्म करने के लिए आंदोलन छेड़ा, तो वह महात्मा गांधी के अहिंसा के विचारों से प्रभावित थे। स्वयं गांधी जी पर हेनरी डेविड थोरो के लेखन का असर था।
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बतौर राष्ट्र, दोनों ही देश अपने लोगों की प्रगति के लिए दशकों से एक-दूसरे का साथ देते आए हैं। भारत के लोग हमारे सहयोग की मजबूत बुनियाद भूले नहीं हैं। चाहे वह हरित क्रांति के जरिये खाद्य उत्पादन में बढ़ोतरी हो, या भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) की स्थापना, ये हमारे सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों के कुछ प्रमाण हैं।
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आज्ा हमारे बीच मजबूत, विश्वसनीय और स्थायी सहयोग है, जो लगातार अपनी परिधि का विस्तार कर रहा है। द्विपक्षीय संबंधों के तौर पर हमारे रिश्तों में आज जैसा सहयोग, पहले कभी नहीं दिखा। न केवल संघ स्तर पर, बल्कि राज्य और स्थानीय स्तर पर, सेना, निजी क्षेत्र और सिविल सोसाइटी के स्तर पर भी यह सहयोग दिख रहा है। इस संदर्भ में इतना कुछ हुआ है कि 2000 में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दोनों देशों को स्वाभाविक सहयोगी तक बताया था।
तब से लेकर लगातार बढ़ते सहयोग के तमाम वर्षों के दौरान हमारे विद्यार्थियों ने अनुसंधान परियोजनाओं में, हमारे वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक के विकास में, और वरिष्ठ अधिकारियों ने वैश्विक मुद्दों पर गहन विमर्श करने में निरंतर सहयोग किया है। हमारी सेनाओं ने वायु, थल और सागर में संयुक्त सैन्याभ्यासों को अंजाम दिया है, हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम सहयोग के अभूतपूर्व क्षेत्रों में संलग्न रहा है, और इसी की बदौलत हम मंगल तक पहुंच चुके हैं। इस साझेदारी में भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने एक सक्रिय सेतु की भूमिका निभाई है। यह कामयाबी हमारे लोगों की जीवंतता, अमेरिका के खुले समाज के मूल्य और इस सोच को सही मायने में प्रतिबिंबित करती है कि एक-दूसरे के साथ होने पर हम क्या कुछ नहीं कर सकते।
हालांकि यह भी सच है कि हमारे रिश्तों में जो संभावनाएं हैं, वे पूरी तरह साकार नहीं हो सकी हैं। भारत में नई सरकार के आगमन ने हमारे संबंधों को ज्यादा विस्तार देने का स्वाभाविक अवसर दिया है। उम्मीदों के नए उत्साह और अधिक आत्मविश्वास के साथ अब हम परंपरागत और छोटे लक्ष्यों से आगे सोच सकते हैं। यह एक ऐसे नए एजेंडा को तय करने का वक्त है, जिससे हमारे नागरिकों को ठोस फायदे मिल सकें।
यह एजेंडा व्यापार, निवेश और तकनीकी क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग के ऐसे मार्ग ढूंढने में सहायक होगा, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी हों। यह ऐसा एजेंडा होगा, जो अमेरिका को प्रगति का वैश्विक इंजन मानते हुए भारत के महत्वाकांक्षी विकास एजेंडे के साथ संगत हो। वाशिंगटन में जब हम आज मिलेंगे, हम विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और सस्ती अक्षय ऊर्जा के विस्तार के रास्ते तलाशेंगे, ताकि हमारे साझा पर्यावरण का भविष्य सुरक्षित किया जा सके। भारत में, खासकर निर्धनतम नागरिकों को आधारभूत सेवाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपलब्धता सुनिश्चित कराने में हमारे व्यवसाय, वैज्ञानिक और सरकारें सहयोगी बन सकती हैं। इन सभी मामलों में अमेरिका सहयोग के लिए हमेशा तैयार है। ठोस सहायता देने में हमारा ध्यान सबसे पहले 'स्वच्छ भारत' अभियान पर है, जिसके तहत पूरे भारत में स्वच्छता और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार के लिए हम निजी क्षेत्र और सिविल सोसाइटी के नवाचारों, विशेषज्ञता तथा तकनीक का पूरा लाभ उठाएंगे।
हमारे साझा प्रयास जहां हमारे लोगों के लिए फायदेमंद साबित होंगे, वहीं हमारे सहयोग का क्षेत्र भी निरंतर बढ़ता जाएगा। बतौर राष्ट्र और लोगों के तौर पर हम सभी के लिए बेहतर भविष्य की कामना करते हैं। फिर हमारा रणनीतिक सहयोग पूरी दुनिया के लिए भी लाभदायक है। जहां अमेरिकी निवेश और तकनीक सहयोग से भारत को फायदा मिलेगा, वहीं एक ज्यादा मजबूत और समृद्ध भारत अमेरिका के लिए भी लाभकारी होगा। फिर हमारी मित्रता स्थायित्व और सुरक्षा के जिस माहौल को तैयार करेगी, वह न केवल क्षेत्रीय, बल्कि पूरे विश्व के लिए फायदेमंद होगा। दक्षिण एशिया को अखंड बनाने और इसे मध्य व दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों तथा लोगों से जोड़ने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।
वैश्विक साझेदार के रूप में जहां हम खुफिया जानकारियों को साझा करके, आतंकवाद विरोध और कानून प्रवर्तन सहयोग के जरिये अपनी आंतरिक सुरक्षा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, वहीं हम समुद्री परिवहन एवं वैध समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता बहाल करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं। हमारा स्वास्थ्य सहयोग हमें कठिन चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा, चाहे इबोला के प्रसार से मुकाबला हो, कैंसर के इलाज के लिए शोध हो या तपेदिक, मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों को पराजित करना हो। और हम महिला सशक्तिकरण, क्षमता निर्माण और अफगानिस्तान एवं अफ्रीका में खाद्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए साथ-साथ काम करने की ताजा परंपरा का विस्तार करने का इरादा रखते हैं।
अंतरिक्ष अन्वेषण लगातार हमारी कल्पनाशीलता को उत्साहित कर रहा है और हमारे सामने अपनी महत्वाकांक्षा बढ़ाने की चुनौती है। हम दोनों के पास मंगल ग्रह की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों का होना अपनी कहानी खुद बयां कर रहा है। बेहतर भविष्य का वायदा सिर्फ भारतीयों और अमेरिकियों के लिए ही नहीं है, बल्कि यह हमें एक बेहतर दुनिया के लिए साथ आगे बढ़ने का इशारा कर रहा है। यह इक्कीसवीं सदी के लिए हमारी पारिभाषित साझेदारी का केंद्रीय आधार है। फॉरवर्ड टुगेदर वी गो- हम चलें साथ-साथ।
वाशिंगटन पोस्ट से साभार