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ऐ दिल है मुश्किल

Wed, 26 Oct 2016 07:32 PM IST
कुमार प्रशांत
कुमार प्रशांत Updated Wed, 26 Oct 2016 07:32 PM IST
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Aie dil hai mushkil
कुमार प्रशांत

करण जौहर हमारे सिनेमा के प्रतिनिधि नामों में नहीं हैं और उनकी फिल्में रुपये भले गिनती हों, किसी खास गिनती में नहीं आतीं। लेकिन अक्सर मूर्खता व शालीनता की हद पार कर जाने वाले करण जौहर ने अपनी एक बेबाक छवि जरूर गढ़ी थी, जो आज अपमानित अवस्था में टूटी-फूटी पड़ी है। आज वह और उनका पूरा मुंबइया फिल्म उद्योग किसी बंधुआ मजदूर की तरह दिखाई दे रहा है, तो इसलिए कि मनसे नेता राज ठाकरे की देशभक्ति की गाज उस पर गिरी है।

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पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारतीय समाज और संविधान पर लगातार सर्जिकल स्ट्राइक हो रहे हैं। ऐसा कर केंद्र सरकार देशभक्ति का वह बुखार पैदा करना चाहती है, जिसे वह चुनाव में भुना सके। राज ठाकरे ने इस मौके को पहचाना और फरमान जारी किया कि मुंबइया फिल्मों में काम कर रहे सारे पाकिस्तानी कलाकार भारत छोड़कर चले जाएं। यह अधिकार इन्हें किसने दिया?
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राज ठाकरे की चुनौती ने पाकिस्तानी कलाकारों का जो भी किया हो, भारतीय फिल्मकारों को कठघरे में खड़ा कर दिया। शाहरुख अपनी पिछली पिटाइयों से बेहोश-से हैं, लेकिन सलमान खान और करण जौहर ने बड़े तेवर से जवाब दिया कि कलाकार देशी-विदेशी नहीं होता, कलाकार होता है। तभी इसकी हवा निकाली अमिताभ बच्चन ने। उन्होंने अपने जन्मदिन पर राज ठाकरे के पुत्र का घर पर स्वागत किया और राज ठाकरे द्वारा भेजा जन्मदिन का वह तोहफा कबूल किया, जो राज ठाकरे की कलम से बने उनके ही कार्टूनों का फ्रेम था। उन्होंने गलती से भी यह नहीं कहा कि राज ठाकरे का तोहफा मैं स्वीकार करता हूं, पर उनकी राजनीति को अस्वीकार करता हूं। अमिताभ हमेशा सावधान रहते हैं कि वह अपनी बारीक राजनीति चलाते रहें, पर किसी विवाद में न पड़ें।
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करण जौहर, सलमान खान या मुकेश भट्ट ने कहा होता कि भले फिल्म रिलीज न हो, हम किसी समझौते को तैयार नहीं हैं, तो हवा बदल जाती! इन लोगों के पास इतना पैसा है कि एक फिल्म के अटक जाने से रोटी के लाले नहीं पड़ जाएंगे। लेकिन पैसा ही है, जो आपको चूहा बना देता है। मुकेश भट्ट गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिले, जिन्होंने उन्हें समझौता कर लेने की सलाह दी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने घर पर राज ठाकरे की अदालत सजाई। सभी उसमें हाजिर हुए। कभी कांग्रेस ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को निपटाने के लिए बाल ठाकरे और शिव सेना को खड़ा किया था। वही खेल अब भाजपा खेल रही है। राज ठाकरे की अदालत में त्रिसूत्री फैसला हुआ : करण जौहर फिल्म की शुरुआत में शहीदों को सलाम करने वाली घोषणा दिखाएंगे, आगे कभी किसी पाकिस्तानी को अपनी फिल्म से नहीं जोड़ेंगे तथा वह सेना कल्याण कोष में पांच करोड़ रुपयों का दान देंगे।


सवाल पाकिस्तानी कलाकारों का नहीं है। हमारी सारी फिल्में उनके बिना ही बनती हैं। एकाध अपवाद होती हैं। सरकार की अनुमति से विदेशी कलाकार यहां आते हैं। सरकार जब चाहे, इनका आना रोक सकती है। सरकार को यह अधिकार संविधान ने दिया है। क्या कोई सरकार या कोई नागरिक संविधान के बाहर जा सकता है? अपवादों की बात छोड़ दें, तो संविधान के बाहर जाना देशद्रोह है। अब आप फैसला करें कि इस मामले में देशद्रोह का इल्जाम किस पर आता है।

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