फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Opinion ›   AIADMK's inner drama

अन्नाद्रमुक का अंदरूनी ड्रामा

Wed, 14 Jun 2017 01:42 PM IST
bhaskar sai भास्कर साई
Updated Wed, 14 Jun 2017 01:42 PM IST
विज्ञापन
AIADMK's inner drama
एम भास्कर साई

जयललिता के निधन के बाद से उनकी विरासत को लेकर तमिलनाडू की राजनीति में जो तूफान मचा हुआ है, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में एक स्टिंग ऑपरेशन में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के दो विरोधी गुटों के विधायकों के इस दावे पर कि फरवरी में शशिकला खेमे का समर्थन करने के लिए विधायकों को पैसे और सोने की पेशकश की गई थी, मुख्य विपक्षी पार्टी द्रमुक ने मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है कि इस मामले की सीबीई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच करवाई जाए। गौरतलब है कि अन्नाद्रमुक मुख्यमंत्री एडापड्डी के पलानीस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेलवम और अन्नाद्रमुक (अम्मा) के उप महासचिव टीटीवी दिनाकरन (शशिकला के भतीजे) के खेमों में बंटी हुई है। 


loader

हाल ही में शशिकला के भतीजे दिनाकरन के जमानत पर रिहा होने के बाद तमिलनाडु की राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। उनके दिल्ली की जेल से चेन्नई लौटने के तुरंत बाद समर्थन जताने के लिए उनके घर पर विधायकों का तांता लग गया। अभी उन्हें 32 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो पलानीस्वामी की सरकार के सामने मुश्किलें खड़ी करने के लिए पर्याप्त है। 
उधर रविवार को जयललिता के पॉस गार्डन के आवास पर एक नाटकीय दृश्य उपस्थित हो गया, जब उनकी भतीजी दीपा जयकुमार को कथित तौर पर घर में घुसने से मना कर दिया गया। उसने आरोप लगाया कि 'दीपक और शशिकला के परिजन मुझे मारना चाहते हैं, मैं प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाऊंगी। दीपक और शशिकला के परिजनों ने जयललिता की हत्या की है।' हालांकि यह सब जानते हैं कि दीपा इस ड्रामे की एक मामूली-सी किरदार हैं। 

मानो राज्य की राजनीति में उफान लाने के लिए यही पर्याप्त नहीं था, रविवार रात पन्नीरसेलवम ने मुख्यमंत्री पलानीस्वामी के नेतृत्ववाले धड़े अन्नाद्रमुक (अम्मा) के साथ विलय वार्ता के लिए अप्रैल में गठित सात सदस्यीय समिति को भंग करने की घोषणा की।पन्नीरसेलवम ने यह घोषणा पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद वरिष्ठ पार्टी नेताओं के दबाव के बाद की। 
इस फैसले का कारण रविवार दिन में घटी दो घटनाओं को बताया जा रहा है-एक सरकारी समारोह में मुख्यमंत्री द्वारा एक कहानी सुनाने और पन्नीरसेलवम खेमे के पूर्व मंत्रियों का दिनाकरन खेमे के प्रति निष्ठा जताना। नए फ्लाईओवर के शिलान्यास के दौरान पलानीस्वामी ने एक मित्र की कहानी सुनाई, जो धोखेबाज बन गया। उधर पूर्व मंत्री परिथि इलमवसुहति ने दिनाकरन से मिलकर समर्थन की पेशकश की। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि पन्नीरसेलवम शिवाजी गणेशन से बड़े नौटकिया (अभिनेता) हैं और वह खुद उन लोगों में से हैं, जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने नाटकीय कौशल से धोखा दिया। 

जैसा कि अन्नाद्रमुक के विभिन्न खेमों के एकसाथ आने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं और पलानीस्वामी सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी और सुपरस्टार रजनीकांत खाली जगह को भरने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा, जिसे तमिलनाडु में मजबूती से अपनी जड़े जमाना शेष है, मानती है कि पांच दशकों से द्रविड़ पार्टियों के वर्चस्व वाले दक्षिणी राज्यों में खुद को मजबूत करने का इससे बेहतर अवसर और कोई नहीं हो सकता है। और तमिल सिनेमा के शीर्ष अभिनेता रजनीकांत, जिनका व्यापक जनाधार है, बताया जाता है कि राजनीतिक विशेषज्ञों और अपने शुभचिंतकों से तमिलनाडु की जनता को 'सुशासन' देने के लिए चर्चा कर रहे हैं। उनके ही शब्दों में, 'व्यवस्था सड़ गई है और इसे बदलना चाहिए।' लेकिन इसे बदलेगा कौन?

इन सबके इतर राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज है। एक तरफ जहां अन्नाद्रमुक के तीनों खेमे से संबंद्ध विधायकों एवं सांसदों के राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की संभावना है, वहीं मुख्य विपक्षी पार्टी द्रमुक शक्तिशाली भाजपा से लोहा लेने के लिए सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश में जुटी हुई है।
तमिलनाडु के हर निर्वाचित विधायक के वोट का मूल्य 176 और सांसदों के वोट का मूल्य 708 है। अन्नाद्रमुक के सभी धड़ों को मिलाकर 134 विधायक और 50 सांसद हैं (37 लोकसभा में और 13 राज्यसभा में)। अन्नाद्रमुक का वोट शेयर 5.36 फीसदी (करीब 59,000  वोट) है। दूसरी तरफ राज्य के सभी विपक्षी दलों (द्रमुक, कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग) को मिलाकर 98 विधायक हैं, जिनके 17,248 वोट होते हैं। अन्नाद्रमुक के अलावा तमिलनाडु में द्रमुक के चार और भाजपा, पीएमके, माकपा और भाकपा के एक-एक सांसद हैं। 

सूत्रों का कहना है कि भाजपा अन्नाद्रमुक के सभी खेमों को 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में अपने पक्ष में वोट डालने के लिए मनाने की कोशिश कर रही है। इस बात की पुष्टि करते हुए केंद्रीय मंत्री पॉन राधाकृष्णन और वरिष्ठ भाजपा नेता एल गणेशन ने हाल ही में बताया कि अन्नाद्रमुक उनके राष्ट्रपति उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेगी। हालांकि भाजपा अन्नाद्रमुक के समर्थन के बिना भी राष्ट्रपति चुनाव में जीत सकती है, लेकिन माना जाता है कि भाजपा अन्नाद्रमुक का वोट इसलिए चाहती है, ताकि उत्तर प्रदेश की तरह बड़ी जीत हासिल की जा सके। 

जहां तक द्रमुक की बात है, तो कार्यकारी उपाध्यक्ष एम के स्टालिन अभी पार्टी का संचालन कर रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के 94वें जन्मदिन समारोह के अवसर को द्रमुक ने खुद को राष्ट्रीय फलक पर एक बड़े खिलाड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश की। इस अवसर पर उसने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, माकपा नेता सीताराम येचुरी और भाकपा नेता डी राजा समेत देश भर के राजनेताओं को एकजुट किया। क्या यह एकजुटता तमिलनाडु की राजनीति को प्रभावित करेगी? क्या भाजपा वहां जमीन मजबूत करने में सफल होगी? क्या अन्नाद्रमुक में विलय की कोई संभावना बची हुई है? इन सारे सवालों के जवाब के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed