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अवस्था : बुढ़ापा कह कर नहीं आता, यह स्वाभाविक है... पर कहीं नाटकीय भी हो सकता है क्रम
Sun, 09 Mar 2025 06:29 AM IST
शिव शुक्ला
मोहना रवींद्रनाथ
मोहना रवींद्रनाथ
Published by: शिव शुक्ला
Updated Sun, 09 Mar 2025 06:29 AM IST
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बुजुर्ग दंपति।
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Meta AI
विस्तार
बुढ़ापा कहकर नहीं, बल्कि अचानक आता है। क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप रात में सोए और सुबह एकाएक महसूस हुआ कि कहीं बुढ़ापा तो नहीं आ गया? या कभी सब कुछ ठीक चल रहा हो, लेकिन एक दिन लगे कि घुटनों में लगातार दर्द रहने लगा है। जर्मनी में कंप्यूटेशनल बायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. स्टीव हॉफमैन कहते हैं, ‘आप सुबह जगते ही अगर खुद को बुजुर्ग महसूस करते हो, तो यह एक तरह की चेतावनी है।’ हालांकि इस अनुभव का कुछ वैज्ञानिक आधार भी हो सकता है।
उम्र संबंधी कुछ मानकों, जैसे-प्रोटीन और डीएनए टैग्स में रक्तप्रवाह का विश्लेषण कर कुछ वैज्ञानिकों ने पाया कि वयस्कता में बुढ़ापा एक सीधी प्रक्रिया के बजाय कुछ लोगों के जीवन में एक निश्चित उम्र पर नाटकीय ढंग से आता है। बीते वर्ष प्रकाशित स्टैनफोर्ड के विस्तृत अध्ययन में उम्र को ट्रैक करने के लिए 25 से 75 वर्ष की उम्र के 108 वयस्कों के ब्लड सैंपल इकट्ठे किए गए। अलग-अलग उम्र के सैंपलों का परीक्षण करने पर पता चला कि लोगों पर 44 और 60 वर्ष के बीच किसी समय बुढ़ापा तेजी से असर दिखाता है। अध्ययन के सह लेखक और स्टैनफोर्ड मेडिसिन में जेनेटिक्स के प्रोफेसर माइकल स्नाइडर कहते हैं, अमूमन चालीस के दशक में लोगों को अल्कोहल पचाने में दिक्कत होने लगती है, तो साठ के दशक में वे बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। डॉ. हॉफमैन द्वारा बीते वर्ष चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि उम्र बढ़ने के तीन चरण होते हैं। वर्ष 2019 में 4,000 से अधिक लोगों के रक्त प्लाज्मा को देखने वाले एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया था कि जीवन के चौथे, सातवें और आठवें दशक में उम्र बढ़ने से जुड़ी प्रोटीन की सांद्रता में महत्वपूर्ण बदलाव आता है।
2013 में हुए उम्र संबंधी अध्ययन के विशेषज्ञ डॉ. स्टीव होर्वाथ के अनुसार, बचपन से लेकर 20 वर्ष तक तीव्र गति से शारीरिक बदलाव होते हैं, जबकि 20 वर्ष के बाद उम्र रैखिक हो जाती है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में न्यूरोलॉजिकल विज्ञान के प्रोफेसर, जो 2019 में हुए अध्ययन से भी जुड़े थे, डॉ. टॉनी विस-कॉरे के अनुसार, शरीर के अन्य अंगों की अपेक्षा बढ़ती उम्र का सबसे तेज असर हृदय और दिमाग पर होता है। फिलहाल आणविक परिवर्तन का बढ़ती उम्र और बीमारी से स्पष्ट संबंधों का पता नहीं चला है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग अपने स्वास्थ्य की देखभाल ठीक से करते हैं, उन पर उम्र संबंधी बदलाव तत्काल नहीं दिखते। शोधकर्ता प्रयास कर रहे हैं कि बीमारियों से बचाव के साथ लोगों की जीवन प्रत्याशा में पांच वर्ष का इजाफा हो जाए, मानो उन्हें 75 की उम्र में 70 का एहसास हो।