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आर्थिक अपराध के विरुद्ध : जांच एजेंसियों को खुली छूट देकर भ्रष्टाचार पर नकेल कसेगी

Fri, 23 Aug 2019 05:53 AM IST
आर. राजगोपालन आर राजगोपालन
आर राजगोपालन Published by: आर. राजगोपालन Updated Fri, 23 Aug 2019 05:53 AM IST
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Against economic crime
चिदंबरम - फोटो : a

आईएनएक्स मीडिया जांच में कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निशाने पर रहे पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम अब 26 अगस्त तक सीबीआई की हिरासत में हैं।


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आईएनएक्स मीडिया जांच में कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निशाने पर रहे पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम अब 26 अगस्त तक सीबीआई की हिरासत में हैं।

वर्ष 2015 के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े पर नजर डालें, तो वह उससे एक साल पहले दर्ज किए गए आर्थिक अपराधों की संख्या में मामूली वृद्धि दर्शाता है। लेकिन अगर कोई एक दशक पीछे के आंकड़े को देखे, तो आंकड़े ठीक इसके विपरीत हैं।

पिछले दस साल में धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात जैसे आर्थिक अपराधों की संख्या दोगुनी हो गई है। अपराध दर यानी प्रति लाख लोगों पर अपराध की घटनाएं भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाती हैं। आर्थिक अपराधों के लिए वर्ष 2006 में अपराध दर 6.6 थी, जो 2015 में बढ़कर 11.9 हो गई।

ट्राइलीगल लॉ फर्म के साझेदार शंख सेनगुप्त के अनुसार, ठेकों का विस्तार और महत्व (चाहे सार्वजनिक हो या निजी) पहले की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गया है, जिसके चलते हर स्तर पर पैसे की उपलब्धता ज्यादा है। इसके अलावा सरकारी कार्यालयों में रिश्वत और भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर अधिक जागरूकता और सक्रियता देखी जा रही है।

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दस साल में अनियमितताओं के मामले में भारी संख्या में सरकारी अधिकारी पकड़े गए हैं। सीबीआई द्वारा जांच किए गए मामलों में नियमित विभागीय कार्रवाई के लिए दर्ज मामलों की संख्या वर्ष 2006 में 237 थी, जो वर्ष 2015 में 15 फीसदी की दर से बढ़कर 272 हो गई। हालांकि 2012 के बाद से ऐसे मामलों में कमी आई है।

पिछले दशक में भारत में जो बड़े आर्थिक अपराध हुए, उनमें वर्ष 2009 में हुए सत्यम कंप्यूटर का 7,314 करोड़ रुपये की एकाउंटिंग धोखाधड़ी और 204 कोयला खदानों का आवंटन शामिल था, जिन्हें 2014 में सर्वोच्च अदालत ने रद्द कर दिया। वर्ष 2016 में रिको इंडिया के झूठे खातों के मामले में करीब 1,123 करोड़ रुपये का नुकसान आर्थिक घोटाले का ताजा उदाहरण है।

आइए, जरा मोटे तौर पर इसके दो पहलुओं पर चर्चा करें। पहला है आर्थिक अपराध और दूसरा है कानूनी प्रक्रिया। विजय माल्या, ललित मोदी और नीरव मोदी-ये कुछ ऐसे नाम हैं, जो मनी लॉन्ड्रिंग की चर्चा करते ही जेहन में कौंध जाते हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित कई अपराध हैं। वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम से संबंधित कानून के प्रावधानों को सख्त बना दिया है। इसके बावजूद कई अपराधी कानूनी खामियों का फायदा उठाकर गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेश भाग गए।

भारत से दूसरे देशों में धन के हस्तांतरण की कई विधियां हैं। मनी लॉन्ड्रिंग एक कला है। पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के मामले में विभिन्न टैक्स हैवन देशों (जहां दूसरे देशों की तुलना में कम टैक्स लगता है या कोई टैक्स नहीं है) में शेल यानी मुखौटा कंपनिया खोली गईं। मोदी ने अपने पिछले कार्यकाल में दो लाख से ज्यादा शेल कंपनियों को नोटिस जारी किया, जिनमें से कई फर्जी और नकली हैं।

उनका विदेशी धरती पर कोई कार्यालय नहीं हैं, सिवा पते के, जो कि बेनामी है। अब बरमुडा का ही उदाहरण ले लीजिए। वैश्विक टैक्स गाइड प्राइस वाटर हाउस कूपर्स और डेलोएट के अनुसार, रहने की दृष्टि से बरमुडा सबसे महंगे देशों में से एक है, लेकिन वहां व्यक्तिगत आयकर के साथ-साथ कॉरपोरेट टैक्स शून्य है। इसी तरह नीदरलैंड्स, लक्जमबर्ग, कैमेन द्वीपसमूह, सिंगापुर आदि देश हैं।

यूपीए शासन के दौरान भी कई राजनेता आर्थिक अपराधों के आरोपों में पकड़े गए थे। लेकिन सवाल यह है कि क्या कांग्रेस उनसे निपटने में गंभीर थी। राजग सरकार में लोकसभा में 340 सीटों का बहुमत हासिल कर नरेंद्र मोदी निर्णायक स्थिति में हैं, जिन्होंने आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कसना शुरू किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम इसका एक क्लासिक उदाहरण हैं।

अदालती कार्यवाही के अनुसार, पिता और पुत्र की जोड़ी प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग ऐक्ट (पीएमएलए) के गंभीर अपराधों में शामिल थी। पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत की अर्जी पर फैसला सुनाने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के जज सुनील गौर अकाट्य टिप्पणियों के साथ सामने आए। आरोप है कि चिदंबरम जब वित्त मंत्री थे, तब उन्होंने आईएनएक्स मीडिया को वर्ष 2007 में विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी दी थी।

सरकारी जांच एजेंसी का मानना है कि कंपनी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम का इस्तेमाल करके नियम से ज्यादा निवेश हासिल करने की मंजूरी पाने में कामयाब रही। इस मामले के गुण दोष को हमें यहां रखने की जरूरत नहीं है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय इस संबंध में जांच कर रहे हैं। कानूनी प्रक्रिया चल रही है। अदालत आरोपों के आधार पर अपना फैसला सुनाएगी।

राजनीतिक क्षेत्र का भ्रष्टाचार हमारी व्यवस्था की जग जाहिर कमजोरी है। सत्ता में बैठे लोग अक्सर विवेकाधीन प्राधिकरणों का इस्तेमाल करने या नीतिगत खामियों का फायदा उठाने या कानूनों को कमजोर करने और निहित स्वार्थों के पक्ष में कानूनों का इस्तेमाल करने के लिए जाने जाते हैं। बदले में वे अक्सर आर्थिक रूप से लाभान्वित हुए हैं-व्यक्तिगत रूप से धन संचय और चुनावी धन, दोनों के लिए अवैध रूप से प्राप्त संसाधनों का उपयोग किया जाता है।

नरेंद्र मोदी सरकार ने कहा है कि वह नीतिगत बदलावों के साथ-साथ हाई प्रोफाइल नेताओं के खिलाफ मामलों को आगे बढ़ाने के लिए जांच एजेंसियों को खुली छूट देकर भ्रष्टाचार पर नकेल कसेगी। यदि यह भविष्य के भ्रष्टाचार के लिए एक निवारक के रूप में काम करता है, तो इससे व्यवस्थागत भ्रष्टाचार को दूर करने में मदद मिल सकती है।
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