{"_id":"5c794042bdec22077e437852","slug":"after-negotiation-failure","type":"story","status":"publish","title_hn":"वार्ता की विफलता के बाद","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया","slug":"opinion"}}
वार्ता की विफलता के बाद
Fri, 01 Mar 2019 07:52 PM IST
Raman Singh
निकोलस क्रिस्टॉफ
निकोलस क्रिस्टॉफ
Published by: Raman Singh
Updated Fri, 01 Mar 2019 07:52 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
किम एव ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक खराब परमाणु समझौते को स्वीकार करने के बजाय किम जोंग उन के साथ अपने शिखर सम्मेलन को खत्म कर सही फैसला किया, लेकिन परिणाम यह बताते हैं कि पिछले वर्ष किम के साथ अपनी पहली शिखर मुलाकात में वह धोखा खा गए थे। जो भी हो, प्रतिभाशाली ट्रंप जब आईने में अपना चेहरा देखते होंगे, तो जानते होंगे कि 'सौदेबाजी की कला' उनके वश की बात नहीं है।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
इस बैठक में किम ने कुछ परमाणु स्थलों को बंद करने के बदले में उत्तर कोरिया पर से सभी प्रतिबंधों को हटाने की मांग की। यह कोई अच्छा सौदा नहीं था और ट्रंप ने इसे स्वीकार करने के बजाय बैठक खत्म करके सही किया।
ट्रंप ने कहा कि 'वास्तव में वे चाहते थे कि हम पूरी तरह से प्रतिबंध हटा लें, लेकिन हम ऐसा नहीं कर सकते थे।' आगे उन्होंने कहा कि 'कभी-कभी आपको कुछ चीजों को छोड़ देना पड़ता है।'
राष्ट्रपति रीगन रूस के साथ हथियार नियंत्रण समझौते को स्वीकार करने के बजाय आइसलैंड के रेकजाविक में आयोजित शिखर सम्मेलन से बाहर निकल गए थे, क्योंकि उस सौदे को उन्होंने त्रुटिपूर्ण माना था। एक वर्ष बाद रूस कुछ बेहतर शर्तों के साथ लौटा और तब जाकर सौदा हुआ- और हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस बार भी कुछ वैसा ही होगा।
फिर भी, आगे कई महत्वपूर्ण जोखिम हैं। सबसे अहम बात यह है कि उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों का फिर से परीक्षण कर सकता है, इससे बहुत ज्यादा तनाव बढ़ेगा और एक बार फिर से युद्ध एवं अस्थिरता को लेकर चिंता पैदा होगी।
दुर्भाग्य से, उत्तर कोरिया एक अन्यथा महत्वहीन देश है, जो केवल तभी ध्यान आकर्षित करता है, जब वह भड़काऊ व्यवहार करता है।
इसलिए उसके नेताओं ने यह मान लिया है कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति मिसाइल दागना, विस्फोटकों का धमाका करना या परमाणु परिसरों को चालू करना है।
बेशक इस मामले में समझौते न करके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सही किया, लेकिन लगता है कि उन्होंने इस शिखर सम्मेलन को बहुत खराब ढंग से संचालित किया। विशेष रूप से इसलिए कि उन्होंने संकेत दिया था कि वह उत्सुकता से यह समझौता करना चाहते हैं और उस 'शानदार सफलता' की संभावना थी, इन सबने शायद किम को इस विश्वास के साथ मांगों को उठाने के लिए प्रेरित किया कि वह ट्रंप को मना लेंगे।
सामान्य राष्ट्रपतियों के साथ शिखर सम्मेलन के समझौते पर समय से पहले ही सहमति व्यक्त की जाती है। जैसा कि एक अनुभवी राजनयिक ने कहा है कि राष्ट्रपति अपनी टोपियों से खरगोशों को इसलिए निकाल पाते हैं, क्योंकि इससे पहले राजनयिक काफी मेहनत कर टोपियों में खरगोशों को रखते हैं। लेकिन ट्रंप ने उस सावधानीपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए कभी धैर्य नहीं रखा, बल्कि व्यक्तिगत संबंधों से पैदा होने वाली सफलताओं पर ज्यादा भरोसा किया और साफ है कि इस बार उनका भरोसा स्पष्ट रूप से गलत था।
उत्तर कोरियाई पक्ष ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीफन बेगुन द्वारा अनुमानित शिखर सम्मेलन के नतीजों को पहले से मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि किम ने सोचा कि वह हनोई में राष्ट्रपति ट्रंप को चतुराई में मात दे सकते हैं, जैसा कि उन्होंने नौ महीने पहले सिंगापुर में किया था।
नवीनतम बातचीत का इस तरह बेनतीजा खत्म होना यह भी रेखांकित करता है कि पहले की बैठक में ट्रंप कितने गुमराह थे। वह यह समझ नहीं पाए कि किम ने 'गैर-परमाणवीकरण' का वह अर्थ लगाया, जो अमेरिका के मायने से अलग था और उन्होंने किम को वैधता का एक बड़ा तोहफा दिया, जो शिखर सम्मेलन के साथ उन्हें मिला, वह भी बदले में बिना कुछ हासिल किए।
ट्रंप ने किम की जिस तरह से प्रशंसा की थी, वह बेहद अरुचिपूर्ण था। उन्होंने किम को अपना दोस्त और महान नेता बताया था और जोर देकर कहा था कि किम ने उन्हें 'खूबसूरत पत्र' भेजे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि हम एक दूसरे से प्यार करते हैं। निर्दयी तानाशाह से संवाद करना उचित है, लेकिन उसकी खुशामद करना हमारे मूल्यों के साथ विश्वासघात है।
वियतनाम में ट्रंप ने किम को संभवतः यह भी दिखाया होगा कि प्रेस की स्वतंत्रता कैसी दिखती है। जबकि ह्वाइट हाउस ने चार अमेरिकी पत्रकारों को डिनर से सिर्फ इसलिए वंचित कर दिया था, क्योंकि उनमें से दो ने ट्रंप से सवाल करने की कोशिश की थी।
फिर भी, अगर आगे भारी तनाव का जोखिम है, तो कुछ समय बाद उत्तर कोरिया के साथ रिश्तों में प्रगति के लिए रास्ता बनाना भी संभव है। मैं उन संदेहों से सहमत हूं, जो मानते हैं कि अपने परमाणु हथियार भंडार सौंपने का किम का कोई इरादा नहीं है (जैसा कि 2017 में उत्तर कोरिया की मेरी यात्रा के दौरान वहां के लोगों ने मुझे बताया था), फिर भी कूटनीति के लिए अब भी गुंजाइश बची है, जो दुनिया को बेहतर बनाती है।
विशेष रूप से किम विस्फोटक आयुधों और मिसाइलों के परीक्षण पर प्रतिबंध तथा योंगब्योन में परमाणु ईंधन के उत्पादन ठप करने पर सौदेबाजी करना चाहता है और ये बहुत कीमती नहीं, तो योग्य लक्ष्य जरूर हैं। अंतर-कोरियाई परियोजनाओं पर प्रतिबंध से राहत उचित मूल्य होगा, जो उसे बाहरी दुनिया में हिस्सेदारी का मौका देगा और शासन के अधिकार को कमतर करेगा। इस तरह के सीमित सौदे आगामी कूटनीति का लक्ष्य होना चाहिए और दक्षिण कोरिया को राष्ट्रपति मून जे इन (जिन्होंने उत्तर कोरिया और पश्चिम के बीच शांति प्रक्रिया शुरू करने में मदद की) अमेरिकी समर्थन से इसे आगे बढ़ाने के लिए बेहतर व्यक्ति हैं।