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Taliban: तालिबान का फरमान और मलाला
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तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
नवविवाहिता मलाला यूसुफजई जब शादी के बाद पहली बार अपने शौहर के साथ लाहौर एयरपोर्ट पर उतरी थीं, तब मैंने ट्वीट किया था, 'वेलकम बैक क्वीन'। पंजाब की प्रांतीय राजधानी में करीब हफ्ते भर के उनके प्रवास के दौरान उनके अभिभावक भी साथ थे। वह स्कूली छात्राओं को विज्ञान, इंजीनियरिंग, गणित और कला की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही ऑक्सफोर्ड पाकिस्तान कार्यक्रम के तहत अपने काम से भी परिचित कराने के लिए आई थीं। मलाला नोबेल से सम्मानित पाकिस्तान की दूसरी शख्स हैं। वह तीन बार पाकिस्तान आ चुकी हैं और आखिरी बार वह देश में आई भीषण बाढ़ से बुरी तरह से प्रभावित सिंध में मदद के लिए आई थीं।
लाहौर की इस यात्रा का यह मतलब भी था कि वह अपने घर स्वात नहीं जा सकेंगी, क्योंकि वहां प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक तालिबान पाकिस्तान फिर से सक्रिय हो गया है और जिसकी वजह से वहां के हालात बदतर हैं। ऐसा लगता है कि स्वात तथा उत्तरी पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में कुछ भी नहीं बदला है। मलाला को तब अपना घर छोड़ना पड़ा था, जब उग्रवादियों ने लड़कियों की शिक्षा का विरोध किया। और जब सुरक्षा बलों ने इस क्षेत्र में अपना दखल बढ़ाया, तब जीवन सामान्य स्थिति की ओर लौटने लगा। इन दिनों वहां नागरिक उग्रवाद के खिलाफ नारे लगाते हुए शांति रैलियां निकाल रहे हैं और सरकार से अपने जीवन की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
मलाला न केवल पाकिस्तान और कई अन्य देशों में शिक्षा पर काम कर रही हैं, बल्कि वह और उनके पिता जियाउद्दीन यूसुफजई वास्तव में अफगानिस्तान में भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पिता और पुत्री हर संभव मंच से आवाज उठा रहे हैं और तालिबान सरकार से लड़कियों को स्कूल जाने की इजाजत देने की मांग कर रहे हैं। लेकिन वास्तव में जब लड़कियों की शिक्षा की बात आती है, तो शक्ति काबुल में नहीं, बल्कि कंधार में नेतृत्व के पास होती है, जो ऐसे मामलों में निर्णय लेते हैं। मलाला ने हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और उनके कुछ मंत्रियों से न्यूयॉर्क में मुलाकात की थी। एक बहुत ही दिलचस्प वीडियो था, जिसमें मलाला ने प्रधानमंत्री को बधाई देने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, लेकिन वह इसके बजाय प्यार से अपना हाथ उनके सिर पर रखते हैं, जैसा कि पूर्वी परंपरा है, और हाथ नहीं मिलाते हैं।
इस हफ्ते मलाला ने विपक्ष के नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री चौधरी परवेज इलाही से मुलाकात की, क्योंकि उनके कुछ प्रोजेक्ट्स पंजाब में भी चल रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं राजनीतिक रूप से सही होने के बारे में कभी चिंता नहीं करती। मैं सिर्फ सच के साथ होना चाहता हूं। मेरे लिए यह सबसे महत्वपूर्ण चीज है। मैं विशेषज्ञों के काम में यकीन करती हूं। हम शोध और उपलब्ध आंकड़ों को देखते हैं। जब मैं शिक्षा की वकालत करती हूं, तो हम देखते हैं कि डाटा हमें क्या बताता है।'
पाकिस्तान की ओर से भी कई बार तालिबान से कहा गया है कि कुछ अन्य मांगों को स्वीकार करने के साथ वह लड़कियों की शिक्षा को अनुमति दे, तो उसे आधिकारिक तौर पर मान्यता देने का रास्ता खुल सकता है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने न्यूयॉर्क में एक इंटरव्यू में इस तरह की बात की थी। उनके अलावा विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार ने काबुल की अपनी पहली यात्रा के दौरान ऐसा कहा था, लेकिन अफगानिस्तान के हालात देखकर लगता नहीं कि ऐसा हो पाएगा। पाकिस्तान ने तालिबान के किसी पुरुष राजनयिक को भेजे जाने पर जोर देने के बावजूद एक उच्च शिक्षित एक वरिष्ठ महिला को काबुल भेजकर स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की। विदेश राज्यमंत्री रब्बानी जब- बिना बुर्के या चादर, जैसा कि अफगान महिलाएं पहनती हैं- सिर्फ दुपट्टा डाले काबुल हवाई अड्डे पर उतरीं, तो कई लोग हैरत में पड़ गए थे। मेरे लिए रब्बानी की सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि उन्होंने वहां अफगान महिला व्यवसायियों से भी मुलाकात की। वहां उन्होंने उनके साथ भोजन किया और एलान किया कि पाकिस्तान की नई व्यापार नीति में अफगान महिलाओं से आयात को प्राथमिकता दी जाएगी।
दुनिया जब भी तालिबान के साथ बातचीत करती है, तो लड़कियों की शिक्षा को हर चर्चा में सबसे ऊपर रखती है। लेकिन काबुल पर कब्जा करने के बाद से तालिबान इस मुद्दे पर जरा भी झुकने को तैयार नहीं हैं। इस बीच, अफगान के शिक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने जब लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा पर प्रतिबंध का एलान किया, तो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इस पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। अगस्त, 2021 में तालिबान ने सत्ता में कब्जे के बाद लड़कियों के स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया था। मार्च में उसने माध्यमिक स्कूलों में लड़कियों के लौटने पर प्रतिबंध लगाया।
मैं तब सही थी, जब मैंने कहा था कि मुझे कोई उम्मीद नहीं। पाकिस्तान ने निराशा व्यक्त करते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और काबुल की सत्ता से आग्रह किया है कि वह अफगान महिलाओं और छात्राओं की उच्च शिक्षा पर रोक लगाने के अपने फैसले पर फिर से विचार करे। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम दृढ़ता से मानते हैं कि इस्लाम के अनुसार प्रत्येक पुरुष और महिला को शिक्षा का अंतर्निहित अधिकार है। विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने विश्वविद्यालयों में महिलाओं के प्रवेश पर तालिबान के प्रतिबंध पर निराशा व्यक्त की है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहा, मुझे अभी भी लगता है कि काबुल और अंतरिम सरकार से संवाद के जरिये ही हम अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस्लामाबाद में ओआईसी की बैठक में कहा कि मेरी सबसे बड़ी चिंता यह है कि अफगानिस्तान अफरा-तफरी की ओर बढ़ रहा है।
मीडिया से बात करते हुए मलाला ने कहा, 'मैं अफगानिस्तान की महिलाओं और लड़कियों के लिए उम्मीद से भरी हुई हूं, जिसकी एक वजह अफगान महिलाओं द्वारा अभी उठाए जा रहे कदम हैं। वे हार नहीं मान रही हैं। वे सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए नारे लगा रही हैं, और लड़कियां शिक्षा के अपने अधिकार के लिए चीख रही हैं। यह कुछ ऐसा है, जो मुझे आशा देता है।'