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संस्कृति: एक स्त्री ने किया दस पुरुषों से विवाह

Sun, 06 Oct 2024 04:51 AM IST
Ashutosh Garg आशुतोष गर्ग
Updated Sun, 06 Oct 2024 04:51 AM IST
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सार
चंद्रमा ने कहा, आपके कारण ही मानव जाति लुप्त हुई थी और अब आपको ही उस भूल का परिमार्जन करना होगा। इसके लिए आप दसों प्रचेतस भाइयों को मारिशा से विवाह करके पृथ्वी को पुन: आबाद करना होगा।
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A woman married ten men prachetas bhai aur marisha vivah
धर्म विवाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पृथु के प्रपौत्र प्राचीनवर्हि का विवाह समुद्र की कन्या से हुआ था। उनके दस पुत्र हुए, जो सामूहिक रूप से ‘प्रचेतस’ कहलाते थे। वे सब विष्णु के भक्त थे। जल्द ही, प्राचीनवर्हि के सामने अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करने का समय आ गया। परंतु प्रचेतस में से कोई भी यह उत्तरदायित्व लेने को तैयार नहीं था। उन सबने यही कहा, ‘नारायण का चिंतन करना ही हमारे जीवन का उद्देश्य है।’ प्राचीनवर्हि निरंतर प्रचेतस से आग्रह करता रहा। आखिर प्रचेतस ने एक प्रस्ताव रखा। वे बोले, ‘हम नारायण का आह्वान करेंगे। यदि उन्होंने हमें शासन करने की अनुमति दी, तो ठीक है अन्यथा हम अपनी आध्यात्मिक खोज जारी रखेंगे।’ प्राचीनवर्हि ने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।


प्रचेतस भाई नारायण की साधना में लीन हो गए। उनकी तपस्या के दस हजार वर्ष बाद भगवान विष्णु प्रकट हुए। उन्होंने प्रचेतस को कहा, ‘महान राजा पृथु के वंशज होने के नाते शासन करना आपका कर्तव्य है।’ प्रचेतस भाइयों ने देखा कि उनके चारों ओर केवल घना जंगल था। कई दिनों तक घूमने के बाद भी उन्हें कोई मनुष्य दिखाई नहीं दिया। हर जगह फफूंद उग आई थी। तब सूर्य ने प्रचेतस भाइयों को बताया कि जिन दिनों वे तपस्या में लीन थे, पृथ्वी शासक विहीन हो गई और सभ्यता का अंत हो गया। भूलोक पर हर जगह वनस्पति उग आई है।


यह सुनकर प्रचेतस हाथ पकड़कर एक वृत्त बनाकर खड़े हो गए और उन्होंने अपने मुख खोल दिए। उनके मुख से प्रचंड ज्वाला निकली, जिसने सारे वृक्ष जला डाले। तभी उन्होंने सुना कि चंद्रमा उनसे रुकने की विनती कर रहा था। उसने कहा, ‘मैं वनस्पति का पोषण करता हूं। आपकी अनुपस्थिति के कारण सब ओर जंगल उग आए हैं। परंतु इसमें वन का दोष नहीं है। उन्हें जलाना अनुचित है।’

किंतु प्रचेतस भाइयों ने चंद्रमा के आग्रह को नहीं माना। वे बोले, मानव जाति के विलुप्त होने के बाद, उनके लिए प्रजनन करना संभव नहीं है। उनकी मृत्यु के साथ मनुष्यता का अंत हो जाएगा। इसलिए वे सब नष्ट कर रहे हैं।

तब चंद्रमा ने कहा, ‘तब भी आपका वंश समाप्त नहीं होगा, क्योंकि अब भी एक प्राणी जीवित है। वही आपके वंश को आगे बढ़ाएगा।’ प्रचेतस भाइयों ने किसी की आहट सुनी। उन्होंने मुड़कर देखा, तो पाया कि पीछे एक स्त्री खड़ी थी।

‘यह कौन है?’ प्रचेतस ने चंद्रमा से पूछा। ‘इसका नाम मारिशा है। यह महर्षि कंडू की पुत्री है। ऋषि कंडू और एक अप्सरा के संयोग से मारिशा का जन्म हुआ था। अप्सरा से उत्पन्न होने के कारण यह जीवित बच गई और वृक्षों ने ही इसका पालन-पोषण किया है। सृष्टि ने मारिशा को बचाकर आपके वंश की रक्षा की है। इसी के गर्भ से मनुष्य पुन: जन्म लेंगे। भूलोक ने अपनी भूमिका निभाई और अब आपको भी अपना दायित्व निभाना चाहिए। आपके कारण ही मानव जाति लुप्त हुई थी और अब आपको ही उस भूल का परिमार्जन करना होगा। इसके लिए आप दसों प्रचेतस भाइयों को मारिशा से विवाह करके पृथ्वी को पुन: आबाद करना होगा।’

तब मारिशा ने कहा, ‘पूर्वजन्म में मेरा विवाह एक राजा से हुआ था। रोगग्रस्त होने के कारण राजा की युवावस्था में ही मृत्यु हो गई। फिर मैंने भगवान विष्णु से प्रार्थना करके उनसे दो वरदान मांगे। एक, मेरा पुत्र ब्रह्मदेव जैसा हो, और दूसरा यह कि मुझे अगले दस जन्मों में दस स्वस्थ पति मिलें। ईश्वर ने मुझे पहला वरदान प्रदान कर दिया, किंतु दूसरे में थोड़ा संशोधन कर दिया। उन्होंने आशीर्वाद दिया कि एक ही जीवन में मेरे दस पति होंगे। आपके माध्यम से वह दूसरा आशीर्वाद भी सत्य हो गया है।’ चंद्रमा ने मारिशा से कहा, ‘आपका पुत्र सचमुच ब्रह्मा के समान होगा, क्योंकि वह स्वयं सृष्टिकर्ता का पुत्र होगा। उसे दक्ष कहा जाएगा। प्रचेतस भाइयों से आपके संयोग के फलस्वरूप, प्रजापति दक्ष का जन्म होगा।’ दावानल और तूफान भी रुक चुका था। इस तरह दसों प्रचेतस भाइयों ने मारिशा से विवाह कर लिया और सृष्टि के विस्तार का कार्य आगे बढ़ाया।
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