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एक लहर स्मार्ट फोन के खिलाफ
इंदिरा मितल
Updated Mon, 10 Oct 2016 06:56 PM IST
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इंदिरा मितल
एक तरफ दुनिया भर में ऐपल के नवीनतम आइफोन-7 और वायरलेस एयरपॉड हेडफोन खरीदने की होड़ है, तो दूसरी ओर पिछले महीने कनाडा में एक टेक्नोलॉजी कांफ्रेंस के दौरान स्मार्टफोन प्रतिरोधी लहर का उद्घाटन हुआ। हर वक्त चारों तरफ अपने-अपने स्मार्टफोन से चिपके लोगों को देखकर उद्यमी युगल क्रिस शेल्डन और वैन गूल्ड ने ‘नोफोनएयर’ नाम से एक छोटा यंत्र लांच किया है, ताकि सूचना प्रौद्योगिकी के शिकंजे में फंसे लोगों को वह वैसे ही झकझोर सकें, जैसे नशाखोरों को झकझोरा जाता है। लांच स्थल पर न तो सेल फोन सिग्नल था, न ही कोई अन्य यंत्र, जिसके सहारे सेल फोन काम कर सकें।
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रॉक म्यूजिक रिकॉर्ड प्रोड्यूसर क्रिस शेल्डन ने एक काली रेशमी थैली में से अपनी नई कंपनी का प्लास्टिक के समकोण रूपी नया गैजेट तकनीकी विशेषज्ञों के समक्ष पेश किया, तो सब हैरान रह गए। उन्होंने दावा किया कि नोफोनएयर अब तक का सबसे कम उन्नत नो-फोन है, जो दिखने में स्मार्टफोन जैसा है और तिलिस्मी करतब विहीन है। और यही इसकी पैकेजिंग की खूबसूरती है। लगभग दस डॉलर दर की कीमत वाले ऐसे 10 हजार नो-फोन अब तक बिक चुके हैं।
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अमेरिकी रिकॉर्डिंग आर्टिस्ट, गीतकार, रिकॉर्ड प्रोड्यूसर, फैशन डिजाइनर और उद्यमी सुपर स्टार कान्या वेस्ट का कहना है कि उन्हें फोन के फालतू ऐप्स से निजात और अपनी क्रिएटिविटी के लिए आजादी मिली है। अमेरिकी गीतकार और गायिका केटी पेरी का कहना है कि फोन से कटकर ही लोग दूसरों से सही मायनों में जुड़ सकते हैं। हम स्मार्टफोन पर नजर गड़ाए रखकर शिष्टाचार और सद्व्यवहार भूलते जा रहे हैं। हर व्यक्ति असंख्य सेल्फी लेता घूमता है।
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कनाडा के दो वकीलों, स्टीवन पल्वर और डैनियल लेवीन, ने वर्षों तक दर्जनों टेक कांफ्रेंसों में हिस्सा लेने के बाद निष्कर्ष निकाला कि स्मार्टफोन हद से ज्यादा हावी होते जा रहे हैं। 2015 में उन्होंने एक सप्ताहांत पर टेकनोलॉजी के बिना फायरसाइड कांफ्रेंस के नाम से टेक बैठक रखी। उन्हें डर था कि इसमें कोई नहीं आएगा, क्योंकि कुछ लोगों ने साफ कह दिया कि सेल फोन के बिना रह पाना मुमकिन न होगा। पर हुआ बिल्कुल अलग ही। बिना सेल फोन के बैठक में आने वाले लगभग 135 लोगों के बीच जो अनोखा संपर्क बना, उसकी आशा उन्हें स्वयं भी नहीं थी। गूगल मैप्स के बिना लोगों को रास्ता पूछना पड़ा, स्थान ढूंढना पड़ा। 2016 की टेक कांफ्रेस में पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुने लोग आए। कोलोराडो यूनिवर्सिटी के डग्लस डंकन ने कक्षाओं में हावी टेक्नोलॉजी के अध्ययन से पाया कि खगोल विज्ञान की उनकी क्लास में लगभग 70 प्रतिशत छात्र अपने-अपने आइफोन से चिपके रहते हैं और औसतन ऐसों छात्रों के ग्रेड उन छात्रों से नीचे होते हैं, जो फोन बंद रखते हैं।
फिर भी बहुत से ऐसे लोग हैं, जो हर समय फोन से मिनी-कंप्यूटर का काम नहीं लेना चाहते, आइफोन पर निर्भरता कम करने की कोशिश में वाई-फाई पहुंच वाले क्षेत्रों में ही उसका इस्तेमाल करते हैं। कुछ फ्लिप-फोन से काम लेते हैं, ताकि वे जरूरी काम कर सकें। शराब हो, अफीम हो या आधुनिक तकनीक, लत तो लत ही है। परिष्कृत आइफोन का प्रयोग इतना व्यापक है कि इसके बिना नजर आनेवाले बिरलों का अटपटा लगना स्वाभाविक है। जिन पर यह व्यसन की तरह हावी है, उनका इसके बगैर रह पाना मुश्किल। वीडियो गेम्स, फोन चैटिंग/टेक्सटिंग के लती युवाओं में तो गंभीर विदड्रॉल सिम्पटम्स दिखने लगते हैं। नोफोनएयर इस सबका निदान बन सकता है।