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गंगा से जुड़ने का अनूठा प्रयास

Thu, 30 Jan 2020 06:12 AM IST
Kuldeep Ratnoo कुलदीप रतनू
Updated Thu, 30 Jan 2020 06:12 AM IST
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A unique attempt to unite the Ganges
गंगा यात्रा - फोटो : a

हिमालय पर्वतमाला व अन्य ऊंचे पहाड़ों व हिमनदों के कारण भारत में वर्ष भर बहने वाली नदियों की बहुलता रही है। लेकिन जनसंख्या में तेज वृद्धि और ऊटपटांग विकास के नाम पर प्रकृति पर जो बोझ बढ़ा है, उसका सबसे अधिक प्रभाव नदियों पर दिखता है। हजारों वर्षों तक स्वच्छ व निर्मल जलयुक्त अविरल बहने वाली हमारी नदियां अनियंत्रित प्रदूषण से ग्रस्त होकर अपनी पवित्रता खोने के कगार पर पहुंच चुकी हैं। पश्चिमी देशों की जीवनशैली की नकल में हमने प्रकृति के साथ जीने की समझ को दरकिनार कर दिया और उपभोगवाद को श्रेष्ठ बताने वालों की बातों में आकर यूज ऐंड थ्रो यानी उपयोग करके फेंक दो, की आत्मघाती प्रवृति को स्वीकार कर लिया। इसका दुष्परिणाम हमें सर्वत्र दिख रहा है।


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कचरे व गंदगी से हो रहे नुकसान के प्रति जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'स्वच्छ भारत' का लक्ष्य देशवासियों के सामने रखकर उनसे अपील की कि वे जहां भी, जैसे भी संभव हो, वातावरण को स्वच्छ रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं। इसी क्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने जून, 2014 में ‘नमामि गंगे’ परियोजना का आरंभ किया और उसके लिए बीस हजार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान भी किया। ‘नमामि गंगे’ परियोजना का उद्देश्य है कि भारत की राष्ट्रीय नदी गंगा में स्वच्छता व निर्मलता सुनिश्चित की जाए और उसके अविरल प्रवाह को संरक्षित व पुनर्स्थापित किया जाए।

हालांकि मोदी सरकार से पहले भी कई सरकारों ने गंगा को स्वच्छ करने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाओं की घोषणाएं की थीं, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति व जनजागृति के अभाव में वे योजनाएं अधिक प्रभावी नहीं हो सकीं। लेकिन मोदी सरकार ने परियोजना की घोषणा करते ही पहले महीने में ही गंगा किनारे चल रही 704 औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण करके 48 इकाइयों को बंद करने का आदेश दे दिया। इसके साथ ही उसने गंगा टास्क फोर्स का गठन भी किया। लेकिन केंद्र सरकार की सख्ती के बावजूद तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की ढिलाई के चलते गंगा की सफाई के काम में आशातीत सफलता नहीं मिली।

मार्च, 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने सत्ता में आने के बाद गंगा की स्वच्छता और निर्मलता सुनिश्चित करने के मोदी सरकार के लक्ष्य को आवश्यक गति और दिशा दी। अप्रैल, 2017 में कानपुर व कन्नौज में स्थित चमड़े के कारखानों को समयबद्ध योजना के तहत अन्यत्र स्थानांतरित करने की घोषणा की गई और औद्योगिक कचरे व अपशिष्ट पदार्थों के गंगा में मिलने से रोकने हेतु जलशोधन संयंत्र लगाने की योजना पर कार्य प्रारंभ किया गया। गंगा किनारे के गांवों में शौचालय निर्माण पर जोर देकर खुले में शौच पर रोक लगाने की दिशा में काम शुरू किया गया। ‘नमामि गंगे’ परियोजना व स्वच्छ गंगा हेतु राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत प्रदेश में गंगा किनारे के 1,604 गांवों में 3,88,340 शौचालयों का निर्माण करवाकर उन्हें खुले में शौच से मुक्त गांव घोषित किया गया और नदी किनारे एक करोड़ 30 लाख पौधों का रोपण किया गया। प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में गंगा की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए भी व्यापक स्तर पर कार्य किए गए।

मोदी सरकार ने एक सराहनीय पहल करके स्वच्छ गंगा कोष की स्थापना की है, जिसमें स्थानीय नागरिक व भारतीय मूल के विदेशी व्यक्ति और संस्थाएं आर्थिक, तकनीकी व अन्य सहयोग कर सकते हैं। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें मिली विभिन्न भेंटों व स्मृति चिह्नों की नीलामी से प्राप्त 16 करोड़ 53 लाख रुपये की राशि इसी कोष में दी है।

गंगा का भारत के साथ प्राचीन सांस्कृतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक महत्व रहा है। लेकिन गंगा की भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आर्थिक भूमिका भी रही है। देश की लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या गंगा नदी पर निर्भर रहती है। गंगा की अविरलता और निर्मलता करोड़ों लोगों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। जब तक आम नागरिक इस विषय की गंभीरता को समझकर गंगा नदी को स्वच्छ रखने में व्यक्तिगत जुड़ाव अनुभव नहीं करेगा, सरकारी प्रयास दीर्घकालिक परिणाम नहीं दे सकते।

निश्चित रूप से इसी बात को समझकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने गंगा यात्रा निकालने की घोषणा की है। सुनने में यह एक साधारण जन संपर्क यात्रा लग सकती है, लेकिन इस यात्रा के बहाने योगी सरकार गंगा किनारे के 27 जिलों के सैकड़ों गांवों में बसे लाखों नागरिकों के लिए अनेक योजनाओं का शुभारंभ भी करने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा यात्रा को अत्यंत महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में बदल दिया है। उनके अनुसार, गंगा यात्रा नदी किनारे के गांवों व ग्रामवासियों के जीवन स्तर व अर्थव्यवस्था को बदलने में उत्प्रेरक बन सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जनवरी को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव से ‘नमामि गंगे’ परियोजना में अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली है और आशा व्यक्त की है कि गंगा यात्रा सरीखे जनजागरण कार्यक्रमों से गंगा पुनः अपनी निर्मलता व अविरलता को प्राप्त करेगी और राष्ट्रीय नदी के रूप में करोड़ों नागरिकों के लिए जीवनदायी व मोक्षदायिनी बनी रहेगी। ‘नमामि गंगे’ की उत्तर प्रदेश में सफलता से देश के अन्य प्रदेश भी प्रेरित होकर गंगा व अन्य नदियों के पुनरुद्धार की दिशा में सार्थक व टिकाऊ कार्यक्रम शुरू कर सकेंगे।

गंगा यात्रा नदियों की स्वच्छता व अविरलता सुनिश्चित करने की दिशा में एक विशिष्ट प्रयास है और इसके माध्यम से भारत के नागरिक प्रकृति व पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों के बारे में अधिक सजग व सक्रिय होंगे और भावी पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन की व्यवस्था कर पाएंगे।

-लेखक नई दिल्ली स्थित इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के निदेशक हैं

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