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एक गुमशुदा महल की तलाश

Fri, 23 Sep 2016 07:37 PM IST
रिक लिमैन
रिक लिमैन Updated Fri, 23 Sep 2016 07:37 PM IST
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A search of the missing castle
ऐंबर रूम

युद्ध के दौरान गायब हुए खजाने की खोजबीन करना पोलैंड में मनोरंजन के किसी साधन की तरह लोकप्रिय रहा है। अब इस कड़ी में एक नया नाम जुड़ा है इतिहासकार बार्ट्लोमिएज प्लेबैन्चेक का, जिनका दावा है कि उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान गायब हुए बेशकीमती एवं ऐतिहसिक ऐंबर रूम को ढूंढ निकाला है।

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जब द्वितीय विश्वयुद्ध खत्म हो रहा था, तभी पीटर द ग्रेट के बेशकीमती ऐंबर रूम के लुप्त हो जाने की खबर ने दुनिया को हैरत में डाल दिया कि कोई कक्ष भला कैसे गायब हो सकता है! बार्ट्लोमिएज के अनुसार कुछ बुजुर्ग ग्रामीणों ने उन्हें बताया है कि 1945 के आरंभ में उन्होंने रूसी सीमा के निकट काई से ढंके नाजी बंकर के गुप्त कक्ष में बड़े-बड़े बक्से उतारते हुए जर्मन काफिले को देखा था। मैमेरकी म्यूजियम ने हाल में जमीन भेदी रडार की मदद से उस परित्यक्त बंकर की स्कैनिंग के बाद इसके भीतर ऐंबर रूम के अवशेषों के छिपे होने का खुलासा किया, तो एक बार फिर लोग हैरान हुए बिना न रह सके।
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दरअसल, ऐंबर रूम एक अद्वितीय खजाना है, जो रूस के सेंट पीट्सबर्ग में 18वीं सदी में बनकर तैयार हुआ था। छह टन बहुमूल्य ऐंबर से बने इस कक्ष को सोने की नक्काशी से सजाया गया था। ऐंबर यानी कहरुवा या तृणमणि, वृक्ष की ऐसी गोंद को कहते हैं, जो समय के साथ सख्त होकर पत्थर बन गई हो। दूसरे शब्दों में, यह जीवाश्म रेजिन है। यह देखने में कीमती पत्थर की तरह लगता है। पुराने जमाने में इसका प्रयोग आभूषणों में किया जाता रहा है।
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जर्मन फौज ने 1941 में इस महल पर कब्जा कर लिया और 600 वर्ग फीट में फैले इस कक्ष को ध्वस्त करके इसे पूर्वी प्रशिया के कॉनिग्सबर्ग किले में ले जाया गया, जहां यह ब्रिटिश व सोवियत बमबारी की जद में आ गया। जनवरी, 1945 में बर्लिन की ओर से किले में मौजूद बहुमूल्य सांस्कृतिक चीजों को निकालने का आदेश दिया गया, लेकिन इसके बाद क्या हुआ, किसी को नहीं पता। अंततः सोवियत संघ ने ऐंबर रूम के अप्रैल, 1945 में नष्ट होने की घोषणा कर दी। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जब बाल्टिक में सोवियत टारपीडो डूबी, तो बेशकीमती ऐंबर पैनलों को जर्मन सैन्य जहाज विल्हेम गस्टलॉफ पर लादा गया था। इससे जुड़ी अन्य बहुत सी अवधारणाएं हैं। मैमेरकी वैसे तो देखने लायक कोई खास जगह नहीं है, पर वहां मौजूद बंकर जर्मन थलसेना के हेडक्वार्टर का हिस्सा था। पोलिश अथॉरिटीज की योजना जल्द ही बंकर की खुदाई कर यह पता लगाने की है कि क्या वाकई इसमें कुछ मौजूद है? जो भी हो, प्लेबैनचेक को तो पूरी उम्मीद है!

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